प्रिंसिपल का कारनामा, एक दिन स्कूल आकर 7 शिक्षकों को किया एपीओ, हिल गया पूरा शिक्षा विभाग
News In Short
- बारां जिले में एक स्कूल प्रिंसिपल का अजब कारनामा।
- प्रिंसिपल ने स्कूल के 12 में से 7 शिक्षकों को किया एपीओ।
- इतना ही नहीं, सभी शिक्षकों को स्कूल से भी कर दिया रिलीव।
- मजेदार बात यह है कि खुद प्रिंसिपल मेडिकल लीव पर थे।
- हड़कंप मचने पर शिक्षा निदेशक ने प्रिंसिपल का आदेश किया निरस्त।
News In Detail
Baran: राजस्थान के बारां जिले में एक स्कूल प्रिंसिपल का अजब-गजब मामला सामने आया है। शाहबाद उपखंड के खटका स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल ने 7 शिक्षकों को एकसाथ एपीओ (APO) कर दिया। इस आदेश से पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा गया। बाद में शिक्षा निदेशालय ने इस आदेश को निरस्त किया।
क्या है पूरा मामला?
खटका विद्यालय के प्रिंसिपल भंवरलाल शर्मा चालू शैक्षणिक सत्र में केवल एक दिन 6 अप्रैल को स्कूल आए थे। इसके बाद से वे लगातार अनुपस्थित रहे। कागजों में खुद को मेडिकल लीव पर बताते रहे।
हैरान करने वाला मोड़ तब आया जब प्रिंसिपल ने श्रीगंगानगर से ऑनलाइन माध्यम से एक आदेश जारी कर विद्यालय के 12 में से 7 शिक्षकों को एपीओ कर दिया। उन्हें कार्यमुक्त (रिलीव) भी दिखा दिया।
प्रिंसिपल के इस मनमाने फैसले से स्कूल की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई। गुस्साए छात्र-छात्राओं ने मंगलवार को स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया। खटका-निवाड़ी मार्ग पर करीब तीन घंटे तक जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किया।
शिक्षा विभाग की कड़ी कार्रवाई
मामला संज्ञान में आते ही माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने एक आदेश जारी कर प्रिंसिपल द्वारा शिक्षकों को कार्यमुक्त करने के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।
आदेश में एपीओ किए गए संबंधित शिक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपनी उपस्थिति पुनः अपने मूल पदस्थापन स्थान (राउमावि खटका) पर ही देना सुनिश्चित करें।
अधिकारियों का पक्ष
बारां के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी गेंदालाल रैगर ने इस मामले पर स्पष्ट रूप से कहा कि कोई भी प्रिंसिपल किसी शिक्षक को अपनी मर्जी से एपीओ नहीं कर सकता। यह पूरी तरह नियमों के विपरीत है। निदेशालय के निर्देशों के अनुसार अब इस मामले में आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है।
वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) सीताराम गोयल ने पुष्टि की कि प्रधानाचार्य भंवरलाल शर्मा इस सत्र में केवल 6 अप्रैल को विद्यालय आए थे। उसके बाद अनुपस्थित चल रहे हैं। उनके द्वारा चिकित्सा अवकाश का दावा किया गया है, जिसकी गंभीरता से जांच की जा रही है।
विद्यार्थियों का रोष और व्यवस्था पर सवाल
ग्रामीणों और विद्यार्थियों का आरोप है कि प्रिंसिपल के इस रवैये से विद्यालय का माहौल खराब हो रहा है। बोर्ड परीक्षाओं और नए सत्र की तैयारी के बीच शिक्षकों को इस तरह हटाए जाने से छात्रों के भविष्य पर संकट मंडराने लगा था।
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