सरकार का बड़ा फैसला, यूनिवर्सिटी नियमों में मिली ढील
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में निजी यूनिवर्सिटी खोलने के नियम आसान हुए।
- अब 30 नहीं सिर्फ 20 एकड़ जमीन जरूरी होगी।
- दो अलग-अलग भूखंडों पर भी यूनिवर्सिटी बन सकेगी।
- 7 साल बाद नई निजी यूनिवर्सिटी का रास्ता साफ हुआ।
- जयपुर, जोधपुर, कोटा जैसे शहरों को मिलेगा फायदा।
राजस्थान सरकार ने निजी यूनिवर्सिटी के लिए जमीन की शर्त आसान कर दी है। पहले 30 एकड़ जमीन जरूरी थी, अब यह घटाकर 20 एकड़ कर दी गई है। अब दो अलग-अलग भू-खंडों पर भी यूनिवर्सिटी स्थापित की जा सकेगी। यह नया आदेश राज्य भर में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। 7 साल से रुकी नई निजी यूनिवर्सिटी की स्थापना अब शुरू हो सकेगी।
क्यों लिया गया यह फैसला
राजस्थान में नई यूनिवर्सिटी स्थापित करने में सबसे बड़ी बाधा बड़े भू-खंड की उपलब्धता थी। सरकार ने अब इस समस्या को काफी हद तक आसान कर दिया है।
पिछले 7 सालों से राज्य में एक भी नई प्राइवेट यूनिवर्सिटी न खुलना उच्च शिक्षा क्षेत्र में ठहराव की बड़ी वजह बन रहा था। 30 एकड़ की सख्त शर्त और शहरी इलाकों में इतनी जमीन न मिलने के कारण कई बड़े एजुकेशनल ग्रुप्स राजस्थान में निवेश करने से हिचकिचा रहे थे।
चार बड़े बदलाव
नए आदेश में भूमि के साथ-साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर और बिल्डिंग कारपेट एरिया के मानकों में भी व्यावहारिक बदलाव किए गए हैं।
पहला बदलाव भूमि की सीमा से जुड़ा है। पहले नई निजी यूनिवर्सिटी के लिए कम से कम 30 एकड़ जमीन जरूरी थी, जिसे अब घटाकर 20 एकड़ कर दिया गया है।
दूसरा बदलाव खुले क्षेत्र से जुड़ा है। सरकार ने शर्त रखी है कि 20 एकड़ के परिसर में कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा खुले क्षेत्र के रूप में सुरक्षित रखना होगा, ताकि हरित परिसर और खेलकूद जैसी गतिविधियों के लिए जगह बनी रहे।
तीसरा बदलाव कारपेट एरिया और ओपन स्पेस के गणित से जुड़ा है। स्पॉन्सरिंग बॉडी के पास न्यूनतम 25,000 वर्गमीटर का निर्मित भवन और न्यूनतम 25,000 वर्गमीटर का खुला क्षेत्र होना अनिवार्य होगा।
चौथा और अहम बदलाव यह है कि अब यूनिवर्सिटी दो अलग-अलग भू-खंडों पर भी बनाई जा सकेगी। इसके लिए कुछ जरूरी सुरक्षा और दूरी की शर्तें तय की गई हैं।
तत्काल प्रभाव से लागू हुआ आदेश
गृह और उच्च शिक्षा विभाग के समन्वय से तैयार यह नया आदेश राज्य भर में तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। जमीन की अनिवार्यता कम होने से शैक्षणिक संस्थानोंऔर स्पॉन्सरिंग बॉडीज के लिए भारी बजट और विशाल भू-खंड जुटाने की चुनौती काफी हद तक कम हो जाएगी।
जयपुर, जोधपुर, कोटा को मिलेगा फायदा
नियमों के सरल होने से अब जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर जैसे प्रमुख शहरों के पास नई और आधुनिक यूनिवर्सिटी खुल सकेंगी। इससे राजस्थान के छात्रों को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
गुणवत्ता पर नहीं पड़ेगा असर
नियमों में दी गई इस बड़ी छूट को लेकर शिक्षाविदों की राय सकारात्मक है। सेंट्रल यूनिवर्सिटी, अजमेर के प्रोफेसर अमिताभ श्रीवास्तव के अनुसार नियमों के सरलीकरण और जमीन की बाध्यता कम होने से शिक्षा की गुणवत्ता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
उनका कहना है कि आधुनिक शिक्षा के लिए सिर्फ विशाल जमीन की बजाय आधुनिक लैब्स, लाइब्रेरी, डिजिटल क्लासरूम और योग्य फैकल्टी की ज्यादा जरूरत होती है। उनके अनुसार यह सब 20 एकड़ और 25 हजार वर्गमीटर के परिसर में भी बेहतरीन तरीके से विकसित किया जा सकता है।
FAQ
- निजी यूनिवर्सिटी के लिए अब कितनी जमीन जरूरी है?
पहले 30 एकड़ जमीन जरूरी थी, जिसे अब घटाकर 20 एकड़ कर दिया गया है। इसके साथ 25,000 वर्गमीटर निर्मित भवन और 25,000 वर्गमीटर खुला क्षेत्र भी जरूरी होगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। - क्या यूनिवर्सिटी अब दो अलग-अलग जगह पर भी बन सकती है?
हां, सरकार ने अब दो अलग-अलग भू-खंडों पर भी यूनिवर्सिटी स्थापित करने की छूट दी है। इसके लिए कुछ सुरक्षा और दूरी की शर्तें तय की गई हैं। इससे शहरों के पास बड़ी जमीन न मिलने की समस्या हल होगी।
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