पहली बार एक साथ निकाय और पंचायत चुनाव, क्या सरकार वन स्टेट-वन इलेक्शन की राह पर?

Mukesh Sharma | Jul 23, 2026, 18:03 IST
Share
राजस्थान पहली बार 309 निकायों और 14,403 पंचायतों के चुनाव कराएगा एक साथ
राजस्थान पहली बार 309 निकायों और 14,403 पंचायतों के चुनाव कराएगा एक साथ

राजस्थान में भाजपा सरकार क्या वन स्टेट-वन इलेक्शन की राह पर है? उसने प्रदेश में स्थानीय निकायों और पंचायतों के चुनावों के लिए जो शेड्यूल बनाया है, उससे यही दिख रहा है।

राजस्थान देश का ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहां भाजपा की वन स्टेट वन इलेक्शन पॉलिसी साकार रूप लेगी।

राजस्थान में पहली बार 309 निकायों और 14,403 पंचायतों के चुनाव एक साथ होंगे। इसके तहत 90 दिनों के भीतर चार चरणों में 15 नवंबर तक चुनावी प्रक्रिया पूरी होगी।

इसलिए ही नहीं करवाए थे चुनाव

राजस्थान में अनेक ग्राम पंचायतों का कार्यकाल जनवरी 2025 से पहले ही खत्म हो गया था। सरकार ने इनके चुनाव करवाने के स्थान पर पूर्व सरपंचों को ही प्रशासक लगा दिया। यही हाल नगर पालिका,नगर परिषद और नगर निगमों में रहा था।

सरकार ने मई 2025 में ओबीसी सीट तय करने के लिए राज्य ओबीसी आयोग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) गठित कर दिया था।

आयोग को तीन महीने में सर्वे पूरा करके रिपोर्ट देनी थी। लेकिन, आयोग ऐसा नहीं कर पाया। इसके लिए वह अनेक परेशानियां और कारण गिनाता रहा।

उधर राज्य चुनाव आयोग ने वार्डों के पुर्नसीमांकन के नाम पर भी चुनाव टालना जारी रखा। इसके बाद मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के नाम पर चुनाव टाले जाते रहे।

नहीं माने हाई कोर्ट के आदेश भी

राजस्थान सरकार चुनाव नहीं करवाने के लिए इस हद तक अड़ी हुई थी कि उसने हाई कोर्ट के आदेश की भी परवाह नहीं की।

हाई कोर्ट ने 14 नवंबर के फैसले में 15 अप्रैल तक पंचायत व निकाय चुनाव करवाने के आदेश दिए। लेकिन, सरकार और राज्य चुनाव आयोग अपनी चाल पर टिके रहे।

स्थिति यह थी कि 15 अप्रैल तक तो चुनाव आयोग नगर पालिका चुनाव के लिए मतदाता सूचियां तैयार करवाने में लगा हुआ था।

अवमानना का भी नहीं था डर

15 अप्रैल तक चुनाव नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर हुई। लेकिन, सरकार निश्चिंत रहीं। इस बार हाई कोर्ट ने 22 मई के आदेश से 31 जुलाई तक चुनाव करवाने की डेडलाइन बढ़ी दी।

इसके बावजूद राज्य सरकार, राज्य चुनाव आयोग और ओबीसी आयोग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) सुस्ती बरतता रहा।

सरकार को पता था कि अनेक पंचायत समितियों और नगर पालिकाओं का कार्यकाल अक्टूबर व नवंबर में समाप्त हो रहा है। ऐसे में उसने 31 जुलाई की समय सीमा को भी पार कर दिया।

सूत्रों का कहना है कि सरकार की मंशा एक साथ ही सभी पंचायतों व पालिकाओं के चुनाव करवाने की थी। इसलिए चुनाव आयोग ओर ओबीसी आयोग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) भी चुनाव टालने के लिए कोई न कोई बहाना बनाते रहे।

राज्य सरकार की ओर से राजस्थान हाई कोर्ट में जो चुनावी कार्यक्रम पेश किया गया। इसमें स्पष्ट रूप से बताया गया है कि प्रदेश की सभी नगर निकायों और पंचायतों के चुनाव एक साथ होंगे।

ओबीसी आयोग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) अब तक 20 अगस्त से पहले रिपोर्ट नहीं देने की बात कह रहा था। अप्रत्याशित रूप से वह अब 5 अगस्त तक रिपोर्ट देने को तैयार हो गया है। यही हाल सरकार और राज्य चुनाव आयोग का है।

हालांकि यह चुनाव अलग-अलग चरण में होंगे, लेकिन पहली बार एक साथ 90 दिन में प्रदेश की सभी निकायों और पंचायतों के चुनाव कराए जाएंगे।

हार का डर या कुछ और

एक अधिकारी का कहना है कि पंचायत चुनाव व शहरी स्थानीय निकायों में भाजपा सरकार हार के भय से चुनाव टाल रही थी। कुछ महीने पहले इस तथ्य की पुष्टि प्रदेश भाजपा के एक सीनियर लीडर भी कर चुके हैं।

भाजपा शहरी इलाकों में शुरु से ही मजबूत रही है। इसलिए सरकार ने योजना के अनुसार नगर पालिकाओं के चुनाव पहले करवाना तय किया है।

भाजपा का मानना है कि शहरों में भाजपा की जीत का संदेश ग्रामीण इलाको में भी होगा और पंचायतों में भी पार्टी जीत हासिल कर सकेगी।

09 निकाय और 14,403 पंचायतों के होंगे चुनाव

राजस्थान में कुल 309 नगर निकाय हैं। इनमें नगर निगम, नगर पालिकाएं और नगर परिषदें शामिल हैं। इन सभी निकायों के चुनाव पहली बार एक साथ होने जा रहे हैं।

प्रदेश में कुल 14,403 ग्राम पंचायतें और 457 पंचायत समितियां हैं। इन सभी के चुनाव भी एक साथ होने जा रहे हैं। कुल 4 चरण में ये चुनाव संपन्न होंगे।

राजस्थान ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहां शहरी निकाय व पंचायतों के चुनाव एक साथ होंगे। हालांकि दोनों संस्थाओं के चुनाव 90 दिन में 15 नवंबर तक पूरे होंगे।

ये भी पढ़ें:-

पंचायत-निकाय चुनाव 15 नवंबर तक, शेड्यूल पर हाई कोर्ट ने लगाई मुहर

पंचायत-निकाय चुनाव टालने पर हाई कोर्ट सख्त, चुनाव आयुक्त को किया तलब

चुनाव आयोग ने खड़े किए हाथ, 31 जुलाई तक नहीं होंगे पंचायत-निकाय चुनाव

पंचायत-निकाय चुनाव टालने की फिर गुहार, सरकार ने हाई कोर्ट में लगाई अर्जी



Tags:
  • राजस्थान सरकार
  • राजस्थान हाई कोर्ट
  • हाई कोर्ट
  • राज्य चुनाव आयोग
  • वन स्टेट वन इलेक्शन
  • राज्य ओबीसी आयोग
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती

By VINAY VERMA

मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता

By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar

नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं