टीचिंग एसोसिएट की संविदा भर्ती का भारी विरोध, युवाओं ने पूछा- PhD के बाद 28 हजार क्यों?

Jageshwar prasad | May 03, 2026, 08:00 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के कॉलेजों में 3,540 टीचिंग एसोसिएट्स की संविदा भर्ती का प्रदेशभर में विरोध हो रहा है। नेट और पीएचडी धारक युवा 28,500 रुपये के कम मानदेय और अस्थायी नियुक्ति को शिक्षावीर योजना बताकर स्थाई भर्ती की मांग कर रहे हैं।

News In Short

  • राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा 3,540 पदों पर टीचिंग एसोसिएट की संविदा भर्ती का विरोध।
  • उच्च शिक्षित युवाओं ने इस भर्ती को शिक्षावीर नाम देते हुए इसे योग्यता का अपमान बताया।
  • महज 28,500 रुपये मानदेय पर नाराजगी, जो यूजीसी के असिस्टेंट प्रोफेसर वेतन से आधा है।
  • राजस्थान के कॉलेजों में 32% और राजस्थान विश्वविद्यालय में शिक्षकों के 60% पद खाली हैं।
  • छात्र संगठनों ने दी चेतावनी, संविदा भर्ती रद्द कर स्थाई नियुक्ति न करने पर आंदोलन उग्र होगा।

News In Detail

Jaipur: राजस्थान के उच्च शिक्षा विभाग में टीचिंग एसोसिएट के पदों पर संविदा भर्ती निकालने के फैसले ने प्रदेश के शैक्षणिक गलियारों में चर्चा का विषय पैदा कर दिया है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा 3,540 पदों पर की जा रही इस अस्थायी भर्ती को युवाओं ने शिक्षावीर योजना करार दिया है। नेट (NET), जेआरएफ (JRF) और पीएचडी (PhD) जैसी उच्च योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार स्थाई भर्ती के बजाय संविदा के जरिए उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।



योग्यता का अपमान और भविष्य पर संकट

विरोध कर रहे युवाओं का तर्क है कि उच्च शिक्षा में शोध और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लिए स्थाई शिक्षकों का होना अनिवार्य है। संविदा पर की जाने वाली नियुक्तियों से न केवल शिक्षा का स्तर गिरेगा, बल्कि शोध कार्य भी पूरी तरह ठप हो जाएंगे। अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया है कि बरसों की कड़ी मेहनत के बाद हासिल की गई उच्च डिग्रियों का क्या मोल रह जाएगा, यदि उन्हें एक अस्थायी कर्मचारी के रूप में काम करना पड़े।



असिस्टेंट प्रोफेसर से आधा मानदेय

युवाओं के गुस्से का सबसे मुख्य कारण तय किया गया मानदेय है। टीचिंग एसोसिएट के लिए सरकार ने मात्र 28,500 रुपये प्रतिमाह का वेतन तय किया है। छात्रों के अनुसार, यह राशि एक तृतीय श्रेणी शिक्षक (L-10) के वेतन से भी कम है। यूजीसी के नियमों के अनुसार, एक असिस्टेंट प्रोफेसर का शुरुआती मूल वेतन ही 57,700 रुपये होता है। ऐसे में आधे से भी कम वेतन पर काम कराना उच्च शिक्षित युवाओं का अपमान माना जा रहा है।



उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थिति

प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है प्रदेश के कॉलेजों में शैक्षणिक स्टाफ के करीब 32% पद खाली हैं।हैरानी की बात यह है कि राजस्थान की 15 में से 7 यूनिवर्सिटी ऐसी हैं, जहां एक भी नियमित शिक्षक नहीं है। सूबे के सबसे प्रतिष्ठित राजस्थान विश्वविद्यालय में 60% शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं।



विपक्ष की घेराबंदी

इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कांग्रेस के अन्य नेताओं ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र की अग्निवीर योजना की तर्ज पर राज्य सरकार अब युवाओं को शिक्षावीर और डॉक्टरवीर बनाकर उनके भविष्य को अंधकार में धकेल रही है।



छात्र संगठनों ने भी चेतावनी दी है कि यदि संविदा भर्ती का यह आदेश वापस नहीं लिया गया और स्थाई भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन किया जाएगा।



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