पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल रिमांड पर, एसीबी उगलवाएगी 960 करोड़ के घोटाले का सच
News In Short
- जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल तीन दिन की रिमांड पर
- 51 दिन की फरारी के बाद गुरुवार को सुबोध अग्रवाल की हुई थी गिरफ्तारी।
- सुबोध ने कोर्ट में कहा, सरेंडर नहीं किया, अपनी इच्छा से सहयोग करने आया हूं।
- रिमांड अवधि के दौरान एसीबी अब सुबोध से 960 करोड़ के घोटाले का उगलवाएगी सच।
- सुबोध ने एसीबी की हिरासत में कोर्ट जाते समय मीडिया के सवालों के नहीं दिए जवाब।
News In Detail
राजस्थान के चर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में गिरफ्तार रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल को जयपुर की एसीबी कोर्ट ने तीन दिन की रिमांड पर भेज दिया है। एसीबी ने पूछताछ के लिए पांच दिन की मोहलत मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने तीन दिन का रिमांड स्वीकार किया।
एसीबी ने कोर्ट को बताया कि टेंडर प्रक्रियाओं में हुए बड़े स्तर के फर्जीवाड़े और लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने के लिए सुबोध के रिमांड की जरूरत है। एसीबी ने अग्रवाल को गुरुवार को दिल्ली में हिरासत में लिया था। बाद में उनकी जयपुर लाकर गिरफ्तार दिखाई गई। पेशी के दौरान अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने सरेंडर नहीं किया है, बल्कि वह अपनी इच्छा से अनुसंधान में सहयोग करने आए हैं। कोर्ट के बाहर सुबोध ने मीडिया के सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया।
फर्जी प्रमाण पत्र और पद का दुरुपयोग
एसीबी की जांच में पता चला है कि पूरा घोटाला करीब 960 करोड़ रुपये का है। आरोप है कि गणपति ट्यूबवेल और श्याम ट्यूबवेल जैसी कंपनियों ने इरकॉन कंपनी के नाम पर फर्जी वर्क कंप्लीशन सर्टिफिकेट लगाकर टेंडर हासिल किए थे।
चौंकाने वाली बात यह है कि इरकॉन ने फरवरी 2023 में ही सुबोध अग्रवाल को ईमेल भेजकर इन प्रमाण पत्रों के फर्जी होने की सूचना दी थी। आरोप है कि अग्रवाल ने अफसरों के साथ मिलकर इस शिकायत को दबा दिया। इसके बाद मई 2023 में फाइनेंस कमेटी के अध्यक्ष के नाते उन्होंने इन फर्मों को कार्यादेश जारी करने की मंजूरी दे दी।
51 दिनों की फरारी और 260 ठिकानों पर दबिश
सुबोध अग्रवाल को पकड़ने के लिए एसीबी को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। 51 दिन तक चले इस सर्च ऑपरेशन में 18 टीमों ने दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद और मुंबई सहित 260 ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान अग्रवाल ने 10 से ज्यादा बार अपने ठिकाने बदले।
आखिरकार जब कोर्ट ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर उनकी संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की तब वे सामने आए। हालांकि, कोर्ट में पेशी के दौरान उन्होंने इसे सरेंडर मानने से इनकार किया और कहा कि वे अपनी इच्छा से अनुसंधान में सहयोग करने आए हैं।
होटल में बांटी गई रिश्वत और राजनीतिक आरोप
एसीबी की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि घोटाले की रकम और रिश्वत का बंटवारा जयपुर के एक नामचीन होटल में बुलाकर किया गया था। जलदाय विभाग के इंजीनियरों ने फर्जी ईमेल आईडी बनाकर इन फर्जी दस्तावेजों का सत्यापन किया था।
इस मामले पर कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि पिछली सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर था और उनके धरने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुबोध अग्रवाल फाइनेंस कमेटी के मुखिया थे, इसलिए वे सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।
केस की वर्तमान स्थिति
कुल गिरफ्तारियां: अब तक 10 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। इस मामले में ईडी पूर्व मंत्री महेश जोशी को भी गिरफ्तार कर चुकी है। जोशी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
अभी भी फरार: तत्कालीन एसई मुकेश गोयल, एक्सईएन जितेंद्र शर्मा और संजीव गुप्ता अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
अगला कदम: 3 दिन की रिमांड के दौरान एसीबी सुबोध अग्रवाल से टेंडर में हेरफेर और फरारी के दौरान मदद करने वाले लोगों के बारे में पूछताछ करेगी।
मुख्य बिंदु: फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करीब 50 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स को गलत तरीके से मंजूरी देने का आरोप सुबोध अग्रवाल पर है।
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