बजट सत्र 28 जनवरी से, 2000 प्रश्नों के जवाब अभी तक नहीं मिले, जानिए क्यों लापरवाह हो रहे विभाग
Jaipur: राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होना है, लेकिन पिछले सत्रों के 2000 प्रश्नों के जवाब अभी तक नहीं मिले है। विधानसभा सचिवालय ने इन प्रश्नों के जवाब भेजने के लिए सरकारी विभागों को बार-बार ध्यान दिलाया है। इसके बावजूद विभाग विधानसभा सत्रों के सवालों के जवाब भेजने में देरी कर रहे हैं। यह स्थिति तब है, जब स्पीकर वासुदेव देवनानी आईएएस अफसरों को बुलाकर लताड़ लगा चुके हैं।
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एक महीने में जवाब आना चाहिए
नियमों के अनुसार सत्र अवसान के बाद विभागों को एक माह के भीतर सभी प्रश्नों के जवाब दिए जाने चाहिए। इतना ही नहीं, ध्यानाकर्षण, विशेष उल्लेख प्रस्ताव व सरकारी आश्वासन के जवाब के लिए भी यही व्यवस्था है। प्रश्नों के साथ ही इनके जवाब भी विधानसभा सचिवालय में समय पर नहीं पहुंच रहे हैंं।
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59 विभागों की अधिक लापरवाही
इस महीने हो रहे बजट सत्र से पहले राजस्थान विधानसभा के चार सत्र हो चुके हैं। प्रत्येक विधानसभा सत्र में पेंडेंसी चल रही है। सूत्रों के अनुसार करीब 59 विभाग ऐसे हैं, जो समय पर प्रश्नों के जवाब नहीं भेज रहे हैं। पिछले दिनों हुई बैठक में सामने आया था कि 2 हजार से ज्यादा प्रश्नों के जवाब लंबित चल रहे हैं। ऐसी स्थिति से विधानसभा सचिवालय भी हैरत में है।
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इन विभागों की सबसे अधिक लापरवाही
विधानसभा सचिवालय सूत्रों के अनुसार जो विभाग प्रश्नों का समय पर जवाब नहीं दे रहे, उनमें पहले नंबर पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग है। बताया जाता है कि इस विभाग से संबंधी प्रश्न अधिक लगते हैं। शिक्षा, स्वायत्त शासन, राजस्व, युवा मामले एवं खेल, नगरीय विकास एवं आवासन, कार्मिक, ऊर्जा, पंचायती राज, खान एवं पेट्रोलियम, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, उद्योग और गृह विभाग में प्रश्नों की सबसे ज्यादा पेंडेंसी है।
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कम प्रश्न लगे, फिर भी नहीं आए जवाब
विधानसभा में इस सरकार के तीसरे सत्र में जल उपयोगिता से जुड़ा एक, उद्यानिकी से जुड़े दो, मंत्रिमंडल सचिवालय से जुड़े सात प्रश्न लगाए गए थे। बताया जाता है कि स्पीकर ने जिस दिन बैठक ली, उस दिन तक इन विभागों ने एक भी प्रश्न का जवाब नहीं दिया। इसी तरह चौथे सत्र में इंदिरा गांधी नहर, निर्वाचन, नीति निर्धारण, भू-संरक्षण, मंत्रिमंडल सचिवालय, राजकीय उपक्रम विभाग से जुड़े एक और सूचना एवं जनसंपर्क से तीन प्रश्न लगाए गए थे। किसी ने एक भी प्रश्न का जवाब नहीं दिया।
मुख्य बिन्दु
- विधानसभा सचिवालय ने बार-बार संबंधित विभागों को जवाब देने के लिए सूचित किया है, लेकिन लापरवाही और देरी के कारण 2000 से अधिक प्रश्नों के जवाब अब तक नहीं मिले
- चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में सबसे ज्यादा लापरवाही पाई गई है। इसके अलावा, शिक्षा, स्वायत्त शासन और राजस्व विभाग में भी जवाब देने में देरी हुई है।
- राजस्थान विधानसभा में बजट सत्र में आमतौर पर 7,000 से 8,000 प्रश्न होते हैं, जो मानसून सत्र के मुकाबले काफी ज्यादा होते हैं।