क्या मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को मिलेगा सेवा विस्तार या नए चेहरे पर लगेगा दांव?
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का सेवाकाल अगले महीने पूरा।
- आखिर राजस्थान की प्रशासनिक कमान आगे किसके हाथों में होगी।
- यह सवाल चर्चा में क्या श्रीनिवास को सरकार सेवाविस्तार देगी।
- मुख्य सचिव की दौड में अभय कुमार और अखिल अरोड़ा का नाम।
Jaipur: राजस्थान में मुख्य सचिव के पद को लेकर चर्चाएं अपने चरम पर हैं। वर्तमान मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का कार्यकाल 31 अगस्त को समाप्त हो रहा है।
सचिवालय में यह सवाल तेजी से तैर रहा है कि राज्य की प्रशासनिक कमान आगे किसके हाथों में होगी। क्या सरकार वी. श्रीनिवास को सेवा विस्तार देगी या किसी नए अधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी?
यदि राज्य सरकार वी. श्रीनिवास के अनुभव और प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें एक्सटेंशन नहीं देती है तो नए मुख्य सचिव की दौड़ में सीनियर आईएएस अभय कुमार और अखिल अरोड़ा का नाम सबसे आगे चल रहा है।
चयन के लिए सिर्फ वरिष्ठता नहीं, कई पहलू अहम
मुख्य सचिव का पद केवल वरिष्ठता या प्रशासनिक अनुभव के आधार पर तय नहीं होता। इसमें सीएम की कार्यशैली, सरकार की प्राथमिकताएं, केंद्र के साथ बेहतर समन्वय और राज्य की आगामी रणनीतियां अहम भूमिका निभाती हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार अपना आधा कार्यकाल पूरा कर चुकी है। आने वाले वर्षों में सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं।
फ्लैगशिप योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, निवेश आकर्षित करना, वित्तीय अनुशासन बनाए रखना और प्रशासनिक सुधारों को गति देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
ऐसे में सरकार को एक ऐसे प्रशासनिक मुखिया की जरूरत होगी, जो केवल फाइलों के प्रबंधन तक सीमित न रहकर योजनाओं को समयबद्ध तरीके से परिणाम में बदल सके।
दिल्ली के साथ मजबूत तालमेल और सरकार की प्रशासनिक साख को मजबूत करना भी चयन का एक मुख्य आधार रहेगा।
रेस में कौन आगे?
राजस्थान सचिवालय में चल रही चर्चाओं के अनुसार यदि नया मुख्य सचिव चुना जाता है तो अखिल अरोड़ा का पलड़ा थोड़ा भारी माना जा रहा है।
इसके पीछे उनकी शांत, संतुलित और बिना किसी प्रचार-प्रसार के परिणाम देने की कार्यशैली है। वित्तीय मामलों पर उनकी मजबूत पकड़ रही है। वर्तमान सरकार व केंद्र के साथ उनका बेहतर तालमेल उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाता है। वे अभी सीएम में हैं।
दूसरी ओर अभय कुमार भी अपनी बेदाग व ईमानदार छवि, लंबे प्रशासनिक अनुभव और संतुलित निर्णय लेने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। नौकरशाही में उन्हें एक बेहद सक्षम और भरोसेमंद अधिकारी के रूप में देखा जाता है।
अंतिम निर्णय पर टिकीं निगाहें
फिलहाल सबसे बड़ा सस्पेंस इस बात को लेकर है कि सरकार वी. श्रीनिवास के अनुभव पर उन्हें सेवा विस्तार देती है, अभय कुमार के प्रशासनिक अनुभव को चुनती है, या फिर अखिल अरोड़ा की वित्तीय व प्रशासनिक दक्षता पर दांव लगाती है। सचिवालय में चर्चाओं का बाजार गर्म है। अंतिम तस्वीर अगस्त के अंतिम सप्ताह में ही साफ हो पाएगी।
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