मंत्री गौतम दक का आया ऑडियो, तीन मिनट में 17 बार दी गालियां, भाजपा बैकफुट पर
News In Short
- सहकारिता मंत्री गौतम दक का एक कथित ऑडियो सामने आया।
- ऑडियो में मंत्री पुलिसकर्मियों को भद्दी गालियां देते सुनाई दे रहे हैं।
- तीन मिनट के ऑडियो में पुलिसकर्मियों को दी 17 बार भद्दी गालियां।
- मंत्री ने कहा कि कहा कि यह आवाज मेरी नहीं लगती है। ऐसा कुछ भी नहीं।
- इस ऑडियो के बाद भाजपा बैकफुट पर, नहीं आया कोई बयान।
News In Detail
राजस्थान की सियासत में इन दिनों एक कथित ऑडियो टेप ने भूचाल ला दिया है। मामला प्रदेश के सहकारिता राज्य मंत्री गौतम कुमार दकसे जुड़ा है, जिन पर डूंगला थाने के बाहर पुलिसकर्मियों को सरेआम बेहद भद्दी गालियां देने और धमकाने का गंभीर आरोप लगा है।
दावा किया जा रहा है कि मंत्री जी अपने एक कार्यकर्ता से वसूली किए जाने की शिकायत पर इस कदर आगबबूला हुए कि प्रोटोकॉल भूलकर सीधे थाने जा धमके। तीन मिनट की इस कथित रिकॉर्डिंग में गुस्से का ऐसा तांडव है कि मंत्री ने हर वाक्य की शुरुआत और अंत गाली से किया।
इस पूरे घटनाक्रम और लीक ऑडियो के बाद जहां राजस्थान पुलिस के महकमे में सुगबुगाहट तेज है, वहीं सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बैकफुट पर आ गई है।
3 मिनट, 17 गालियां
यह पूरा वाकया 25 मई का बताया जा रहा है। आरोप है कि सहकारिता मंत्री गौतम दक अचानक डूंगला थाने पहुंचे और उन्होंने एसएचओ शैतान सिंह, कांस्टेबल लक्ष्मीनारायण और विष्णु को थाने से बाहर बुलवाया। इसके बाद जो हुआ, उसने गरिमा को तार-तार कर दिया।
मंत्री दक ने बिना किसी भूमिका के सीधे गालियों से बातचीत शुरू की। तीन मिनट के दौरान मंत्री ने एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 17 बार अत्यंत अभद्र अपशब्दों का इस्तेमाल किया। वे इस बात से खफा थे कि पुलिस उनके कार्यकर्ता के घर क्यों पहुंची और कथित तौर पर पैसे क्यों मांगे?
लीक ऑडियो के कुछ अंश:
'तेरी मां... @#$%&! इनके भरोसे मत रहना तू। यहां चोट्टागिरी मेरे को पसंद नहीं है। ...पुलिस होने पर शर्म आएगी तेरे को। नौकरी खराब करना मेरे को भी आता है।'
मंत्री दक का गुस्सा यहीं नहीं थमा, उन्होंने कांस्टेबल विष्णु को टारगेट करते हुए कहा- तुझे बड़ी सादड़ी से भगाया था। एक भी आदमी से पैसे मांगे और मुझे पता चल गया तो यहीं इलाज करेंगे।
उन्होंने थानाधिकारी (एसएचओ) को भी नहीं बख्शा और चेतावनी भरे लहजे में कहा कि उन्हें यहां 'चोट्टागिरी' (उगाही) के लिए नहीं लाया गया है।
अनुशासन के दावे पर उठे सवाल
इस ऑडियो के सामने आने के बाद भाजपा के भीतर सन्नाटा पसरा हुआ है। खुद को कैडर बेस्ड और अनुशासित बताने वाली पार्टी के एक जिम्मेदार कैबिनेट मंत्री की ऐसी भाषा ने आलाकमान को असहज कर दिया है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल अब सरकार को कानून-व्यवस्था और सरकारी कर्मियों के अपमान के मुद्दे पर घेर रहे हैं।
पार्टी सूत्रों की मानें तो इस घटनाक्रम से भाजपा की छवि को धक्का लगा है। खासकर तब जब राज्य में सुशासन (गुड गवर्नेंस) का दावा किया जा रहा हो।
मंत्रियों को ऐसी बयानबाजी से बचने की हिदायत दी जाती रही है, लेकिन ऑन-कैमरा या ऑन-ऑडियो ऐसी भाषा आना पार्टी को 'डैमेज कंट्रोल' मोड में ले आया है।
मंत्री की सफाई: यह मेरी आवाज नहीं लगती, ऑडियो एडिटेड
मामला जब तूल पकड़ने लगा तो सहकारिता मंत्री गौतम दक ने खुद का बचाव किया है। मंत्री ने पूरी तरह से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह आवाज मेरी नहीं लगती है। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है।
जब सीआई साहब की नहीं सुनी, तो हमारी कौन सुनता!
इस पूरे मामले पर जब डूंगला थाने के पुलिसकर्मियों से बात की गई, तो उनका दर्द और बेबसी साफ छलक आई।
हालांकि, एसएचओ शैतान सिंह ने मामले को शांत करने की कोशिश करते हुए कहा, मंत्रीजी थाने के बाहर आए थे, किसी बात पर नाराज थे। कुछ खास बात नहीं है।
लेकिन पीड़ित कांस्टेबल विष्णु ने कहा कि मैं क्या कह सकता हूं? किसी ने मंत्रीजी को गलत जानकारी दे रखी है शायद। हमें अपनी बात कहने और सुनने का मौका तो मिलना चाहिए। जब वहां सीआई साहब (थानेदार) भी खड़े थे और मंत्रीजी ने उनकी ही नहीं सुनी, तो हमारी कौन सुनता? अब तो मैं खुद यहां से लाइन हाजिर (लाइन में जाना) होना चाहता हूं।
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