काम साइबर ठगी, खाते में 9 करोड़ का ट्रांजेक्शन, 16 वारदात से 19 करोड़ रुपए ठगे
News In Short
- 20 साल का बेरोजगार युवक साइबर ठगी से बना करोड़पति, 9 करोड़ के ट्रांजेक्शन।
- शेयर मार्केट और IPO निवेश के नाम पर 16 वारदातों में ठगे 19 करोड़ रुपए।
- किशनगढ़ की मार्बल मंडी की आड़ में चल रहा था साइबर ठगी का गोरखधंधा।
- ठगों ने डेढ़ लाख रुपये महीने किराए पर लिए बैंक खाते, मार्बल बेचने के नाम पर करवाई केवाईसी।
- डीआईजी बोले- 19 करोड़ की ठगी के पीछे अंतरराज्यीय साइबर सिंडिकेट की संभावना।
News In Detail
राजस्थान में साइबर ठगी का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया है। 20 वर्षीय बेरोजगार युवक राहुल धौलपुरिया न केवल करोड़पति बन चुका था, बल्कि उसके बैंक खाते में 9 करोड़ रुपए के ट्रांजेक्शन हो चुके थे। अजमेर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है, और जांच में खुलासा हुआ है कि उसने महज 16 वारदातों में 19 करोड़ रुपए की ठगी की है।
किशनगढ़ की मार्बल मंडी बनी सेफ हेवन
यह पूरा नेटवर्क अजमेर जिले की किशनगढ़ मार्बल मंडी की आड़ में चल रहा था। ठगों ने इस इलाके को इसलिए चुना क्योंकि यहां मार्बल-ग्रेनाइट का रोजाना करोड़ों का कारोबार होता है। इतने बड़े लेनदेन के कारण यहां के बैंक ट्रांजेक्शन आसानी से सामान्य लगते हैं और किसी को शक नहीं होता।
पुलिस के अनुसार, किशनगढ़ क्षेत्र के करीब 25 बैंकों में देश-विदेश से लगातार पैसा आता-जाता रहता है। ठगों ने इसी स्थिति का फायदा उठाकर अपना नेटवर्क तैयार किया।
किराए के बैंक खातों का बनाया नेटवर्क
ठगों ने आसपास के लोगों से डेढ़ लाख रुपए महीने के किराए पर बैंक खाते लिए थे। इन खातों को खोलने के लिए उन्होंने, मार्बल बेचने के लिए खाता चाहिए, का बहाना बनाया। स्थानीय लोगों को लालच देकर उनसे पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और इंटरनेट बैंकिंग की डिटेल ले ली गई।
अब पुलिस उन लोगों की भूमिका भी जांच रही है, जिन्होंने लालच में अपने खाते गिरोह को सौंप दिए।
IPO और शेयर मार्केट का झांसा
यह गिरोह साइबर ठगी के लिए एक खास पैटर्न अपनाता था:
पहला संपर्क: ठग मैसेजिंग एप्स (जैसे WhatsApp, Telegram) पर खुद को निवेश सलाहकार बताते थे।
छोटा मुनाफा दिखाना: शुरुआत में लोगों को छोटी रकम निवेश कराकर अच्छा मुनाफा दिखाया जाता था। इससे उनका भरोसा जीता जाता था।
बड़ा जाल: भरोसा जीतने के बाद IPO, म्यूचुअल फंड और डबल रिटर्न स्कीम के नाम पर लाखों रुपए निवेश करवा लिए जाते थे।
फर्जी एप और वेबसाइट: ठग फर्जी एप या वेबसाइट बनाते थे, जहां निवेशकों को लगातार बढ़ता हुआ प्रॉफिट दिखता रहता था। जब तक निवेशकों को ठगी का पता चलता, तब तक उनके लाखों-करोड़ों डूब चुके होते थे।
गिरफ्तारी कैसे हुई?
अजमेर एसपी हर्षवर्धन की सूचना पर बांदरसिंदरी थानाधिकारी दयाराम चौधरी ने किशनगढ़ के सरदार सिंह की ढाणी निवासी राहुल धौलपुरिया को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि बेरोजगार राहुल के खाते में ही 9 करोड़ रुपए के ट्रांजेक्शन हो चुके थे। पूरे मामले में अब तक 16 वारदातों में 19 करोड़ रुपये की ठगी का पता चला है।
साइबर सिंडिकेट और आगे की जांच
इस मामले की अब स्टेट साइबर क्राइम ब्रांच जांच कर रही है। डीआईजी स्टेट साइबर क्राइम शांतनु कुमार ने बताया कि 19 करोड़ की ठगी के पीछे बड़े अंतरराज्यीय साइबर सिंडिकेट की आशंका है। अन्य राज्यों की एजेंसियों से संपर्क कर नेटवर्क खंगाला जा रहा है और खाता धारकों की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
राजस्थान के किस इलाके में मार्बल मंडी की आड़ में ₹19 करोड़ का साइबर ठगी नेटवर्क पकड़ा गया है?
यह नेटवर्क अजमेर जिले के किशनगढ़ (बांदरसिंदरी थाना क्षेत्र) इलाके में संचालित हो रहा था, जहां मार्बल कारोबार के सामान्य लेनदेन की आड़ में ठगी का पैसा छुपाया जाता था।
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 20 वर्षीय आरोपी का क्या नाम है और उसके खाते में कितने का ट्रांजेक्शन मिला?
गिरफ्तार आरोपी का नाम राहुल धौलपुरिया (निवासी सरदार सिंह की ढाणी, किशनगढ़) है, जिसके बैंक खाते से अकेले ₹9 करोड़ के अवैध ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का खुलासा हुआ है।
साइबर ठगों द्वारा स्थानीय लोगों से बैंक खाते हासिल करने के लिए क्या तरीका अपनाया जाता था?
ठग स्थानीय लोगों को मार्बल व्यापार का पैसा जमा कराने का झांसा देते थे और इसके बदले उन्हें ₹1.5 लाख प्रति महीना किराया देने का लालच देकर उनके खाते व एटीएम कार्ड ले लेते थे।
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