3200 मेगावाट बिजली खरीद का जिन्न फिर बाहर, सरकार ने दोबारा लगाई गुहार, आखिर क्या है खेल?

Mukesh Sharma | Feb 18, 2026, 12:48 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में निजी क्षेत्र से 3200 मेगावाट बिजली खरीदने का सरकारी जिन्न फिर बाहर निकल आया है। सरकार ने बिजली खरीद के लिए फिर विद्युत नियामक आयोग में अर्जी लगा दी है। सरकार इस कंपनियों को फायदा देने के लिए अपने बिजली प्लांटों की बलि देने को तैयार है।

News In Short

  • निजी क्षेत्र से 3200 मेगावाट बिजली खरीद के लिए सरकार ने फिर लगाई अर्जी।
  • बिजली नियामक आयोग नवंबर 2025 में खारिज कर चुका है सरकार का प्रस्ताव।
  • राजस्थान में बिजली कर्मचारी और औद्योगिक संगठन कर रहे हैं प्रस्ताव का विरोध।
  • प्रस्ताव मान लिया गया तो राजस्थान में सभी वर्गों को मिलेगी महंगी बिजली।
  • निजी कंपनियों को लाभ देने के लिए सरकार अपने बिजली प्लांटों को बंद करने पर उतारू।

News In Detail

राजस्थान से निजी क्षेत्र से 3200 मेगावट कोयला आधारित थर्मल बिजली खरीदने की सरकार की व्याकुलता ने सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की व्याकुलता इतनी ज्यादा है कि वह निजी क्षेत्र से बिजली खरीद के लिए कोटा-सूरतगढ़ के थर्मल प्लांट को बंद करने पर आमादा है। इस बारे में राजस्थान विद्युत नियामक आयोग से अर्जी खारिज होने के बावजूद सरकार ने पुनर्विचार की याचिका लगा दी है। सरकार की इस कोशिश का विद्युत कर्मचारी एसोसिएशन, रिटायर्ड कर्मचारी वैलफेयर एसोसिएशन के साथ ही औद्योगिक संगठन भी विरोध कर रहे हैं।





kota


अपने बिजली प्लांट सक्षम

बताया जाता है कि राजस्थान सरकार निजी क्षेत्र से कोयला आधारित 3200 मेगावाट बिजली खरीद के लिए कोटा थर्मल पावर प्लांट की 5 और सूरतगढ़ की 2 इकाईयों को 2030 तक बंद करने को तैयार है। हकीकत यह है कि दोनों प्लांट बिजली उत्पादन में बेहतर काम कर रहे हैं।



कोटा प्लांट की इकाइयां 1983 से 1994 के बीच शुरु हुई हैं। वर्ष 2030 तक यह मात्र 36 से 47 साल पुरानी ही होंगी। दूसरी तरफ 1998 व 2000 के बीच शुरु होने वाली सूरतगढ़ इकाइयां मात्र 30 से 32 साल ही पुरानी होंगी। एक तस्वीर यह है कि देश में 50 साल से ज्यादा समय से प्लांट भी चल रहे हैं।





पीएम मोदी की पहल पर ही उठाया सवाल

राजस्थान सरकार ने 3200 मेगावाट निजी बिजली खरीदने के लिए केंद्र सरकार की कंपनियों के साथ ही अपनी थर्मल क्षमता बढ़ाने के समझौतों पर भी सवाल उठा दिए हैं। इतना ही नहीं, नरेंद्र मोदी सरकार के न्यूक्लियर पावर प्लांट्स पर भी राज्य शंका जाहिर कर रहा है।



राजस्थान सरकार ने नियामक आयोग को लिखे पत्र में कहा था कि केंद्र सरकार के राज्य में लगाए जा रहे न्यूक्लियर पावर प्लांट के समय पर चलने की संभावना कम है।



राज्य ने रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स पर ज्यादा भरोसा नहीं करने व आर्थिक विकास के लिए नए कोयला आधारित बिजली की जरूरत बताई है। सरकार के अनुसार 2035 तक राज्य में बिजली की भारी कमी हो जाएगी। इस कमी को पूरा करने का एकमात्र तरीका नया कोयला आधारित पावर प्लांट बनाना है।





kota 1


सरकार के बिजली खरीद पर ये हैं मुख्य आपत्तियां

  • कोटा प्लांट की इकाइयां (1983-1994) 2030 तक मात्र 36-47 वर्ष पुरानी होंगी। सूरतगढ़ की इकाइयां (1998-2000) सिर्फ 30-32 वर्ष पुरानी होंगी। हकीकत यह है कि देश में कई प्लांट 50 वर्ष से अधिक चल रहे हैं।
  • वित्त वर्ष 2024-25 में कोटा प्लांट का प्लांट लोड फैक्टर लगभग 80% रहा, जो केंद्र सरकार के प्लांट के 75.32%, राज्य सरकार के प्लांट 63.40% और निजी प्लांट 70.30% से कहीं बेहतर है।
  • केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार प्लांट केवल आयु के आधार पर नहीं, बल्कि तकनीकी स्थिति, उत्पादन लागत, लोड फैक्टर आदि के आधार पर ही रिटायर किया जाता है।
  • सरकार के निर्णय से कोटा और सूरतगढ़ में कार्यरत लगभग 6,000 श्रमिकों एवं कर्मचारियों सहित 7,000 परिवारों की आजीविका संकट में पड़ जाएगी। पूरे सार्वजनिक क्षेत्र में लगभग 25,000 कर्मचारी प्रभावित होंगे।

राजस्थान विद्युत कर्मचारी एसोसिएशन का आरोप है कि यह सार्वजनिक क्षेत्र की मजबूत इकाइयों को जानबूझकर कमजोर कर निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की सुनियोजित नीति है। राजस्थान सौर ऊर्जा में देश का अग्रणी राज्य है। इसलिए महंगे निजी अनुबंध के बजाय सस्ती सौर ऊर्जा का पूरा उपयोग होना चाहिए।



विभिन्न संगठनों की ये हैं मुख्य मांगें

  • कोटा एवं सूरतगढ़ की इकाइयों को बंद करने का प्रस्ताव तत्काल निरस्त किया जाए।
  • यदि अतिरिक्त बिजली की जरूरत है तो उसका विकास सार्वजनिक क्षेत्र में ही किया जाए।
  • राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) को नई क्षमता स्थापित करने की अनुमति दी जाए।

औद्योगिक संगठन भी कर रहे हैं विरोध

औद्योगिक संघों और उद्योगों का एक साझा मंच यूनाइटेड काउंसिल ऑफ राजस्थान इंडस्ट्रीज (यूकोरी) और सीतापुरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बिजली की दीर्घकालिक खरीद के लिए चल रहे टेंडर को तत्काल रद्ध करने की मांग की है। एसोसिएशन ने प्रस्तावित टेंडर राजस्थान के उद्योगों, उपभोक्ताओं और समग्र आर्थिक संरचना पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला बताया है।





kota 2


बर्बाद हो जाएंग राज्य के उद्योग

एसोसिएशन ने कहा है कि प्रस्तावित बिजली 40 से 50 पैसे प्रति यूनिट महंगी होगी। सार्वजनिक क्षेत्र की क्षमता को घटाकर सस्ती सौर ऊर्जा को नजरअंदाज करने से बिजली 80 पैसे प्रति यूनिट तक महंगी हो जाएगी। ​बिजली खर्चा उद्योग के लिए निर्णायक कारण होता है।



महंगी बिजली से लागत बढ़ेगी और राजस्थान के उद्योग राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएंगे। नया निवेश नहीं होगा व निर्यात प्रभावित होगा तथा बेरोजगारी बढ़ेगी। राजस्थान देश का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक राज्य है। इसके बावजूद महंगे निजी कोयला आधारित अनुबंध करना राज्य के नवीकरणीय ऊर्जा के प्राकृतिक लाभ को खोने जैसा होगा एसोसिएशन ने लिखा है कि सरकार के यह कदम ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, मेक इन राजस्थान, राइजिंग राजस्थान और विकसित राजस्थान 2047 जैसे सरकार के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के बिल्कुल विपरीत है।



3200 मेगावाट निजी बिजली खरीद के टेंडर का पृष्ठभूमि

राजस्थान ऊर्जा विकास निगम एवं आईटी सेवा लिमिटेड (आरयूवीआईटीएल) ने राज्य में 800 मेगावाट की चार यूनिटों (कुल 3200 मेगावाट) की कोयला आधारित राउंड-द-क्लॉक बिजली 25 साल के लिए खरीदने का टेंडर निकाला है। यह टेंडर 2025 से विवादों में है।



राजस्थान विद्युत नियामक आयोग ने नवंबर 2025 में सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। आयोग का कहना था कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की रिसोर्स एडिक्वेसी योजना के अनुसार 2035-36 तक राजस्थान को 3200 मेगावाट से बहुत कम मात्र 1,905 मेगावाट अतिरिक्त थर्मल क्षमता की जरूरत है। साथ ही यह राज्य की क्लीन एनर्जी पॉलिसी से भी मेल नहीं खाता। नियामक के खारिज करने के बावजूद टेंडर प्रक्रिया जारी रही।



20 मार्च को होगी सुनवाई

नवंबर 2025 में प्रस्ताव खारिज होने के बावजूद राजस्थान ऊर्जा विकास एवं आईटी सेवा लिमिटेड ने आयोग में पुनर्विचार याचिका लगाई है। इस पर 6 मार्च को सुनवाई हुई थी। अब अगली सुनवाई 20 मार्च को होगी। मामले में कई पक्षकारों ने आपत्ति जताई है और कहा है कि मामले में ऐसा नया फैक्ट या दस्तावेज नहीं है, ​जो मामले को प्रभावित करता हो और जो पहले पेश करने से रह गया हो। जो फैक्ट और दस्तावेज पुनर्विचार याचिका के साथ दिए हैं, वह तो पहले भी दिए जा चुके हैं। इसलिए पुनर्विचार याचिका को खारिज किया जाए।



ये भी पढे़:-

​भिवाड़ी अग्निकांड: पुलिसकर्मी का भाई और मैनेजर गिरफ्तार, गारमेंट की आड़ में चल रहा था 'मौत का कारोबार'



राजस्थान सरकारी विभाग में भर्ती, 20 फरवरी तक करें ऑनलाइन आवेदन



Weather Update : एमपी और राजस्थान में तेज हवाओं के साथ बारिश का अलर्ट, सीजी में शुष्क रहेगा मौसम



त्योहार पर रेलवे ने शुरू की होली स्पेशल ट्रेन, राजस्थान के इन स्टेशन पर हैं ठहराव



Tags:
  • बिजली कर्मचारी
  • बिजली
  • आईटी
  • राजस्थान ऊर्जा विकास निगम
  • राजस्थान विद्युत नियामक आयोग