पता नहीं, आज के टीकाराम सीएम बनेंगे या नहीं, राज्यपाल ने आखिर ऐसा क्यों कहा?
News In Short
- राज्यपाल हरिभाउ बागड़े विधानसभा के एक कार्यक्रम में मजाकिया मूड में दिखे।
- राज्यपाल ने राजस्थान के पहले सीएम टीकाराम से जोड़कर एक किस्सा सुनाया।
- बोले, आज के टीकाराम का पता नहीं, सीएम बनने का नंबर आएगा या नहीं।
- विपक्ष का कोई भरोसा नहीं, महाराष्ट्र में तो नेता प्रतिपक्ष ही पाला बदल गए।
- जहां तीन साल से एक भी छात्र नहीं, वैसी यूनिवर्सिटीज तुरंत बंद होनी चाहिए।
News In Detail
राजस्थान के राज्यपाल हरिभाउ बागड़े ने विधानसभा में हुए कार्यक्रम केे दौरान अपने भाषण में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को लेकर एक जोरदार बात कही। राज्यपाल ने टीकाराम की ओर इशारा करते हुए कहा कि राजस्थान के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री थे टीकाराम। जब मैंने नाम सुना तो आज के टीकाराम को देखकर ऐसा नहींं लगा कि ये पहले सीएम वाले होंगे, क्योंकि इनकी उम्र तो बहुत कम है और अभी युवा भी है।
उन्होंने कहा कि वो वाले टीकाराम जी तो मुख्यमंत्री बन गए, लेकिन आज वाले ये टीकाराम सीएम बनेंगे या नहीं, यह मुझे मालूम नहीं। पता नहीं इनका नंबर कब आएगा?
प्रतिपक्ष का भी भरोसा नहीं
राज्यपाल ने कहा कि प्रतिपक्ष का भी भरोसा नहीं रहता। जब मैं विधानसभा अध्यक्ष था तो महाराष्ट्र में दो प्रतिपक्ष के नेता इस्तीफा देकर सत्ताधारी पक्ष में जाकर जाकर मंत्री बन गए।
राज्यपाल की इस टिप्पणी पर वहां मौजूद विधायक हंसने लगे। इस पर राज्यपाल ने फिर चुटकी ली और कहा कि मैं टीकाराम जूली के बारे में नहीं बोल रहा, बल्कि महाराष्ट्र का बता रहा हूं।
विधानसभा अध्यक्ष का मुख्य काम, नीचे बैठ जाओ
बागडे ने खुद के महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष के वक्त का किस्सा सुनाते हुए कहा-कि जब मैं अध्यक्ष बनने के बाद अपने गांव गया तो दोस्तों ने पूछा कि आपका सबसे महत्वपूर्ण काम क्या होता है? मैंने कहा कि सबसे बड़ा काम यही होता है कि नीचे बैठो, विधायकों को नीचे बैठाने का ही काम होता है, लेकिन यहां का मुझे मालूम नहीं।
बंद हो नाम-मात्र की यूनिवर्सिटी
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि मैं महाराष्ट्र और राजस्थान के सभी यूनिवर्सिटी में गया हूं। यहां राजस्थान में कई यूनिवर्सिटी में किसी को सैलरी-पेंशन देते हो, किसी को नहीं देते हो। यह सारा बोझ यूनिवर्सिटी के मैनेजमेंट पर आता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक यूनिवर्सिटी को तोड़कर दो से तीन नई यूनिवर्सिटी बना दी। इससे उनकी आय बंट गई। कई यूनिवर्सिटी ऐसी हैं, जिनमें तीन साल से एक भी छात्र नहीं है। सिर्फ नाम की यूनिवर्सिटी हैं। वहां केवल कुलपति, एक रजिस्ट्रार और एक अफसर है। जब इन यूनिवर्सिटी में एक भी स्टूडेंट का नामांकन नहीं है तो तीन साल से ये सब वहां कर क्या रहे हैं ?
विधायक वोट कटने के डर से नहीं बोलते
राज्यपाल ने कहा कि जिन नए यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट के नामांकन नहीं हो रहें हैं, उन्हें या तो मर्ज कर दीजिए या फिर बंद कीजिए। लेकिन विधायक वोट कटने के डर से बोलते नहीं है।
विधायकों को इस पर आवाज उठानी चाहिए। यह राज्य हित का मामला है। सब मिलकर इस पर विचार करें। जब स्टूडेंट संख्या हो जाए तो मर्ज की गई यूनिवर्सिटी वापस भी खुल सकती हैं।
टॉपर यूपीएससी-आरपीएएसी की परीक्षाएं नहीं देना चाहते
राज्यपाल ने कहा कि मैं कई यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोहों में गया। वहां गोल्ड मेडलिस्ट, टॉपर स्टूडेंट से पूछा कि आप इसके आगे यूपीएससी, आरपीएससी परीक्षा देंगे क्या? मैंने देखा कि उनमें से कोई इच्छुक नहीं है।
यूपीएससी या आरपीएससी से जल्दी नौकरी मिलने की बात कहने के बावजूद कोई जाने को तैयार नहीं है। क्योंकि उन्हें लगता है पास नहीं होंगे और इसका सबसे बड़ा कारण है कि शिक्षा की नींव मजबूत नहीं है।
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