गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे होंगे वापस, आश्रितों को मिलेगी सरकारी नौकरी
News In Short
- गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज हुए मुकदमें होंगे वापस।
- आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के आश्रितों को मिलेगी नौकरी।
- कैबिनेट सब-कमेटी ने अपनी सिफारिश गृह विभाग को भेजी।
- गृह विभाग इन सिफारिशों के आधार पर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगा।
- सरकार आंदोलन से जुड़ी अन्य मांगों को मानने की तैयारी में।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान की भजनलाल सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान विभिन्न जिलों में दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने के निर्णय पर भी कैबिनेट सब-कमेटी ने अपनी मुहर लगा दी है।
समिति की सिफारिश और गृह विभाग की सक्रियता
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल के नेतृत्व में गठित उच्च स्तरीय कैबिनेट सब-कमेटी ने इस मामले पर मंथन के बाद अपनी अंतिम सिफारिश गृह विभाग को भेज दी है। गृह विभाग अब इन सिफारिशों के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर न्यायालय को सौंपेगा। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस प्रक्रिया के बाद अदालतों में लंबित आंदोलन से जुड़े अधिकांश मामले वापस ले लिए जाएंगे, जिससे सैंकड़ों गुर्जर युवाओं और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
नौकरी का हक
कैबिनेट सब-कमेटी ने स्पष्ट किया है कि मृतकों के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने के फैसले पर अब कोई संशय नहीं है। मंत्री जोगाराम पटेल ने इस संबंध में कहा कि मृतक आश्रितों को नौकरी देने के लिए किसी अलग से रिपोर्ट की आवश्यकता नहीं है। गृह विभाग मुख्य रूप से इस पर कार्रवाई कर रहा है। संबंधित पुलिस अधीक्षक कार्यालयों से रिपोर्ट मांगी गई है।
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि यह अनुकंपा नियुक्ति का मामला है, जिस पर कैबिनेट सब-कमेटी पहले ही अपनी सहमति दे चुकी है। वर्तमान में संबंधित विभाग नियुक्ति पत्र जारी करने और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं।
एसपी ऑफिस से मांगी रिपोर्ट
मामले में पारदर्शिता और गति सुनिश्चित करने के लिए उन सभी जिलों के एसपी कार्यालयों से डेटा मांगा गया है, जहाँ गुर्जर आंदोलन का प्रभाव रहा था। रिपोर्ट मिलते ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि कितने मुकदमों को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जा सकता है और कितने परिवारों को तत्काल नियुक्ति दी जानी है।
भविष्य के अन्य फैसले
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर गुर्जर आरक्षण से जुड़े अन्य छोटे-बड़े प्रकरणों और मांगों पर भी जल्द ही बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में समुदायों के बीच के पुराने गतिरोधों को समाप्त कर नई धारा प्रवाहित की जाए। इस फैसले के बाद गुर्जर समुदाय और आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेताओं ने सरकार के इस रुख का स्वागत किया है।
ये भी पढे़:-
पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल ने घुटने टेके, जानिए गिरफ्त में आने के अलावा नहीं बचा था कोई रास्ता
भुज-दिल्ली के बीच चलेगी नई ट्रेन, पाली मारवाड़ के यात्रियों को यह मिलेगी सुविधा
राजस्थान के बांधों में अब सिर्फ 52% पानी, 6 महीने में घटा 38%, भराव में जयपुर जोन टॉप पर
रास्ता जाम मामला: कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर और मनीष यादव सहित 9 लोग कोर्ट से बरी