अधिकारियों की कार्यशैली से लेकर चुनावों में देरी पर जवाबदेही तय

Mukesh Sharma | Apr 05, 2026, 13:44 IST
Photograph: (the sootr)
यह सप्ताह राजस्थान हाई कोर्ट के लिए बेहद सक्रियता का रहा। कोर्ट ने अपने फैसलों में अफसरों की कार्यशैली से लेकर चुनाव में देरी तक जवाबदेही तय की।

यह सप्ताह राजस्थान हाई कोर्ट के लिए बेहद न्यायिक सक्रियता, ऐतिहासिक संशोधनों और प्रशासनिक सुधारों के नाम रहा। एक ओर कोर्ट ने पेपर लीक से कलंकित हुई एसआई भर्ती-2021 पर अंतिम मुहर लगाकर शुचिता का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर डिजिटल अरेस्ट जैसे आधुनिक अपराधों पर कड़ा प्रहार करते हुए बुजुर्गों के हक में आवाज बुलंद की। अधिकारियों की कार्यशैली से लेकर चुनाव में देरी तक हाईकोर्ट ने हर मोर्चे पर जवाबदेही तय की है।



एसआई भर्ती रद्द का आदेश बरकरार

इस सप्ताह राजस्थान हाई कोर्ट की खंडपीठ ने एएसआई परीक्षा 2021 को रद्द करने के एकलपीठ के आदेश को सही ठहरा दिया। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की बेंच ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए भर्ती रद्द के आदेश को बहाल रखा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पेपरलीक और भारी अनियमितताओं के कारण यह कार्रवाई आवश्यक थी, जिसके साथ ही मामले में स्व-प्रेरणा से दर्ज जनहित याचिका को भी खारिज कर दिया गया है।


कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 2021 की भर्ती में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को एसआई भर्ती-2025 में आवेदन के लिए आयु सीमा में विशेष छूट देने को कहा है। इससे ओवरऐज हो चुके अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी।



अधिकारी की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख

हाईकोर्ट ने रोडवेज की आरएएस अधिकारी ज्योति चौहान की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए उन्हें कानून की ट्रेनिंग दिलाने का निर्देश दिया। जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ ने एक कंडक्टर के निलंबन को बिना किसी ठोस कारण के सही ठहराने वाले अधिकारी के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बिना तर्क के लिए गए निर्णय प्रशासनिक पारदर्शिता और न्याय के खिलाफ हैं। हाईकोर्ट ने कार्मिक विभाग को आदेश दिया कि प्रशिक्षण पूरा होने तक अधिकारी को मानव संसाधन से जुड़े कार्यों से दूर रखा जाए।



डिजिटल अरेस्ट में जमानत खारिज

राजस्थान हाईकोर्ट ने 83 वर्षीय बुजुर्ग महिला से डिजिटल अरेस्ट के जरिए 80 लाख रुपये की ठगी करने वाले आरोपी नवीन टेमानी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस समीर जैन ने इसे एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध माना। जिसमें 34 म्यूल अकाउंट्स और हवाला के जरिए पैसा दुबई तक भेजा गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे गंभीर आर्थिक अपराधों में समझौते के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने पीड़िता की दयनीय स्थिति देख आरोपी द्वारा जमा कराए गए 13.40 लाख रुपये तत्काल उसे दिलाने और सरकार को सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।



ट्रांसजेंडर अधिकारों को विवादित एपिलॉग हटा

हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर अधिकारों पर दिए गए अपने ऐतिहासिक गंगा कुमारी फैसले से विवादित 'एपिलॉग' (अंतिम टिप्पणी) हटा दी है। 30 मार्च 2026 के मूल फैसले में कोर्ट ने ट्रांसजेंडर्स को शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण व गरिमा का अधिकार दिया था, लेकिन अंत में जोड़ी गई एक टिप्पणी से स्व-पहचान के अधिकार पर भ्रम पैदा हो रहा था।



दो अप्रैल के स्पष्टीकरण में कोर्ट ने कहा कि वह हिस्सा गलती से जुड़ा था और मुख्य दिशा-निर्देश पूरी तरह प्रभावी रहेंगे। इस संशोधन से स्पष्ट हो गया है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों और उनकी स्वायत्तता पर हाईकोर्ट का निर्णय अडिग है।



चयनित डॉक्टरों को मिली राहत

हाईकोर्ट ने सीनियर रेजिडेंसी कोर्स में चयनित डॉक्टरों को बड़ी राहत देते हुए उन्हें तुरंत रिलीव करने का आदेश दिया है। जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी ने कहा कि उच्च शिक्षा और करियर में उन्नति डॉक्टरों का अधिकार है, जिसे केवल प्रशासनिक असुविधा का हवाला देकर नहीं रोका जा सकता।



12 इन-सर्विस डॉक्टरों ने याचिका दायर कर बताया था कि चयन के बावजूद स्वास्थ्य विभाग उन्हें कार्यमुक्त नहीं कर रहा है। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि डॉक्टरों को तत्काल कार्यमुक्त किया जाए और उनके लिए आवंटित सीटें सुरक्षित रखी जाएं ताकि वे समय पर कोर्स जॉइन कर सकें।



पंचायत-निकाय चुनाव पर अवमानना नोटिस

हाईकोर्ट ने पंचायत और निकाय चुनाव में देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य चुनाव आयोग और आयुक्त राजेश्वर सिंह को अवमानना नोटिस जारी किया है।



कोर्ट ने नाराजगी जताई कि जब 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने की समय-सीमा तय थी तो आयोग ने 22 अप्रैल तक मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्यक्रम कैसे जारी किया। हालांकि सरकार ने चुनाव आगे बढ़ाने के लिए प्रार्थना पत्र देने की बात कही है, लेकिन कोर्ट ने आयोग से चार सप्ताह में जवाब माँगा है।



अगले सप्ताह पर फिर मिलेंगे नई डायरी के साथ।



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