राजस्थान हाई कोर्ट: शादी से राज्य बदलने पर महिलाओं को EWS लाभ से नहीं कर सकते वंचित
News In Short
- राज्य बदलने पर महिलाओं को EWS लाभ से नहीं किया जा सकता वंचित।
- राजस्थान हाई कोर्ट ने राजस्थान ब्याही महिला की याचिका पर यह व्यवस्था दी।
- सरकार को 20 दिन के भीतर प्रार्थिया को नियुक्ति देने का आदेश दिया।
- नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में प्रार्थिया के EWS सर्टिफिकेट को खारिज कर दिया गया था।
- अन्य मामले में कोर्ट ने RPSC और सरकार से पूछा है कि SI भर्ती-2021 में सभी आवेदकों को मौका क्यों नहीं?
News In Detail
राजस्थान हाई कोर्ट ने प्रदेश की दो बड़ी भर्तियों को लेकर बेहद महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ के इन फैसलों से जहां एक ओर ब्याह कर दूसरे राज्य से राजस्थान आने वाली महिलाओं के आरक्षण के अधिकारों को मजबूती मिली है, वहीं दूसरी ओर सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए भी उम्मीद की नई किरण जागी है।
शादी के बाद भी मान्य होगा EWS
यह मामला करुणा सारस्वत की याचिका पर आया। करुणा मूल रूप से हरियाणा की रहने वाली हैं और उनका विवाह राजस्थान के निवासी से हुआ है। उन्होंने नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (EWS) के तहत आवेदन किया था और हरियाणा राज्य का ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया था। लेकिन भर्ती एजेंसी ने इसे राजस्थान का न होने के आधार पर खारिज कर दिया।
अदालत में प्रार्थिया के अधिवक्ता एसके सिंगोदिया ने दलील दी कि केवल शादी के कारण लोकेशन बदलने से किसी नागरिक का संवैधानिक श्रेणी का अधिकार खत्म नहीं हो जाता। कोर्ट ने गत 1 अप्रैल को मनीषा देवी के मामले में दिए गए समान आदेश को नजीर मानते हुए राज्य सरकार की दलीलें खारिज कर दीं।
हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए चिकित्सा विभाग को निर्देश दिया कि प्रार्थिया को EWS केटेगरी का लाभ देकर 20 दिन के भीतर नर्सिंग ऑफिसर के पद पर नियुक्ति प्रदान की जाए।
परीक्षा से वंचित रहे आवेदकों को भी मिले मौका
दूसरा मामला पेपर लीक के कारण रद्द की जा चुकी उप-निरीक्षक (SI) भर्ती-2021 से जुड़ा हुआ है। बड़े पैमाने पर हुई धांधली के बाद कोर्ट और सरकार के हस्तक्षेप से इस भर्ती को पूरी तरह रद्द कर आगामी सितंबर 2026 में दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया है। लेकिन RPSC केवल उन्हीं अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र जारी कर रहा था जो पूर्व में आयोजित परीक्षा में उपस्थित (Present) हुए थे।
इसके खिलाफ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि अभ्यर्थियों ने 2021 में फॉर्म तो भरा था, लेकिन किन्हीं कारणों से वे परीक्षा वाले दिन शामिल नहीं हो सके थे। अब जब पूरी परीक्षा ही स्क्रैप (रद्द) हो चुकी है, तो नए सिरे से होने वाले आयोजन में उन सभी लोगों को बैठने की अनुमति मिलनी चाहिए जिन्होंने वैध आवेदन किया था।
अधिवक्ता ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट ने अपने किसी भी आदेश में यह पाबंदी नहीं लगाई है कि पुन: परीक्षा में केवल पूर्व में उपस्थित रहे छात्रों को ही शामिल किया जाए। इससे पहले जब राज्य में अधिशासी अधिकारी और राजस्व अधिकारी (EO-RO) भर्ती परीक्षा पेपर लीक के कारण रद्द हुई थी, तब विभाग ने दोबारा परीक्षा में उन सभी अभ्यर्थियों को मौका दिया था जिन्होंने आवेदन किया था।
इस तर्क को गंभीरता से लेते हुए जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 20 मई 2026 तक अपना विस्तृत जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
शादी के बाद राज्य बदलने पर EWS सर्टिफिकेट को लेकर हाई कोर्ट ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि किसी अन्य राज्य से राजस्थान में विवाह होने के आधार पर केवल भौगोलिक स्थान (लोकेशन) बदलता है। ऐसे में महिला को उसकी मूल आर्थिक पात्रता यानी ईडब्ल्यूएस (EWS) कैटेगरी के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
एसआई भर्ती-2021 की पुन: परीक्षा कब होना प्रस्तावित है?
पेपर लीक के कारण रद्द की गई एसआई/प्लाटून कमांडर भर्ती-2021की दोबारा परीक्षा इसी साल 20 सितंबर को आयोजित होना प्रस्तावित है।
एसआई भर्ती को लेकर कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग क्या है?
याचिकाकर्ताओं की मांग है कि जिन अभ्यर्थियों ने साल 2021 में इस भर्ती के लिए आवेदन किया था लेकिन वे मुख्य परीक्षा में उपस्थित नहीं हो पाए थे, उन्हें भी सितंबर में होने वाली पुन: परीक्षा में बैठने का समान अवसर दिया जाए।
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