आईएएस पुरुषोत्तम शर्मा से छीना परिवहन आयुक्त का काम, हाई कोर्ट ने यह कारण बताते हुए लगाई रोक

Mukesh Sharma | Apr 30, 2026, 19:22 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने आईएएस पुरुषोत्तम शर्मा के परिवहन आयुक्त के रूप में नियुक्त करने वाले आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि रोडवेज एमडी के रूप में उनका वित्तीय हित होने के कारण वे परिवहन आयुक्त के रूप में रेगुलेटर नहीं बन सकते।

News In Short

  • आईएएस पुरुषोत्तम शर्मा के बतौर ट्रांसपोर्ट कमिश्नर काम करने पर रोक।
  • कोर्ट बोला, रोडवेज चेयरमैन नहीं हो सकता ट्रांसपोर्ट कमिश्नर।
  • कोर्ट के अनुसार दोनों पोस्ट पर एक ही व्यक्ति के होने से हितों का टकराव।
  • दो पोस्ट पर रहना मोटर व्हीकल एक्ट और सुप्रीम कोर्ट फैसले का उल्लंघन।
  • हाई कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई करेगा 18 मई 2026 को।

News In Detail

राजस्थान में आईएएस अधिकारी पुरुषोत्तम शर्मा फिलहाल परिवहन आयुक्त के रूप में काम नहीं कर सकेंगे। राजस्थान हाई कोर्ट ने पुरुषोत्तम शर्मा को परिवहन आयुक्त नियुक्त करने वाले 21 नवंबर,2025 के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस आनंद शर्मा ने यह आदेश ऑल इंडिया ट्यूरिस्ट परमिट बस ऑनर्स एसोसिएशन की याचिका पर दिए।



दो पोस्ट पर एक ही व्यक्ति नहींं

याचिका में कहा है कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा-68(2) के तहत किसी ट्रांसपोर्ट कंपनी या संस्था में वित्तीय हित रखने वाला व्यक्ति राज्य स्तरीय या क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी नहीं हो सकता। यदि होता है तो उसे चार हफ्ते में सरकार को लिखित में सूचना देने के साथ ही राज्य या क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी का पद छोड़ना होता है।



परिवहन पर संपूर्ण अधिकार

परिवहन आयुक्त का राज्य की परिवहन संबंधी सभी गतिविधियों पर संपूर्ण अधिकार होता है। सभी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी उसके अधीन होते हैं। परिवहन आयुक्त परिवहन संबंधी पॉलिसी बनाने और उन्हें लागू करने का काम करता है।



याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के दी मोर मार्डन को ऑपरेटिव ट्रांसपोर्ट सोसायटी लि. के आए फैसले और मोटर व्हीकल एक्ट की धारा-68(2) के तहत पुरुषोत्तम शर्मा राजस्थान रोडवेज के एमडी रहते हुए परिवहन आयुक्त के पद पर निष्पक्ष काम नहीं कर सकते। वह भी तब, जब राजस्थान रोडवेज सरकारी संस्था है और उसका राज्य की परिवहन गतिविधियों में सारभूत आर्थिक हित है।



मामला विचारणीय है क्योंकि

सरकार ने याचिका के विरोध में कहा कि परिवहन आयुक्त अकेले ही नीतिगत फैसले नहीं लेते, बल्कि यह काम एक बोर्ड करता है। हालांकि, सरकार इस बात से इनकार नहीं कर सकी कि परिवहन आयुक्त राज्य स्तरीय ट्रांसपोर्ट आॅथोरिटी का सदस्य होता है और सभी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी उसके अधीन होते हैं। कोर्ट ने इस मामले को विचारणीय माना और पुरुषोत्तम शर्मा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।



तब तक नहीं करेंगे परिवहन आयुक्त का काम

कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई 18 मई को तय की है। तब तक पुरुषोत्तम शर्मा परिवहन आयुक्त के रूप में काम नहीं कर सकेंगे। कोर्ट ने परिवहन आयुक्त नियुक्त करने के 21 नवंबर, 2025 के आदेश पर रोक लगा दी।



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