77 साल पुराने विवाद का अंत, अब वारिस नहीं जता पाएंगे 'स्वतंत्र' हक, हाई कोर्ट ने दिया अहम फैसला

Ashish Bhardwaj | Feb 12, 2026, 19:25 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने 77 साल पुराने किरायेदारी विवाद में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किरायेदार की मृत्यु के बाद उसके कानूनी वारिस स्वतंत्र रूप से किरायेदारी अधिकार का दावा नहीं कर सकते है।

News In Short

  • राजस्थान हाईकोर्ट ने 77 साल पुराने किरायेदारी विवाद में अहम फैसला सुनाया।
  • कोर्ट ने कहा, किरायेदार की मृत्यु के बाद उसके वारिसों को स्वतंत्र अधिकार नहीं मिलते।
  • फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्णयों का हवाला दिया गया।
  • कोर्ट ने मौखिक बिक्री के दावे को खारिज किया, पंजीकृत दस्तावेजों को आवश्यक बताया।
  • इस फैसले से मकान मालिकों को किरायेदारी विवादों में राहत मिल सकती है।

News In Detail

राजस्थान हाई कोर्ट ने 77 साल पुराने एक किरायेदारी विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इस फैसले के अनुसार, किरायेदार की मृत्यु के बाद उसके वारिसों को स्वतंत्र रूप से किरायेदारी का अधिकार नहीं मिलता। वे केवल संयुक्त किरायेदार के रूप में अधिकारों का दावा कर सकते हैं।



क्या था मामला

यह मामला 77 साल पुराना था, जब 15 फरवरी 1949 को स्व. बालकिशन ने अपनी संपत्ति को स्व. जमनालाल और स्व. बंशीधर को पांच रुपए मासिक किराए पर दिया था। इसके बाद दोनों किरायेदारों की मृत्यु के बाद उनके परिवार के सदस्य इस संपत्ति पर काबिज रहे। लेकिन विवाद तब बढ़ा, जब मकान मालिकों ने किरायेदारों के खिलाफ बेदखली याचिका दायर की।



मूल किरायेदारों के वारिसों की स्वतंत्रता पर सवाल

पूर्व किरायेदारों के वारिसों ने यह दावा किया कि उन्हें मौखिक रूप से मालिकाना अधिकार मिला था और वे स्वतंत्र रूप से किरायेदारी अधिकार का दावा कर सकते हैं। हालांकि, कोर्ट ने इस दावे को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि 2001 के राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम में ‘वारिस’ शब्द को जानबूझकर किरायेदार की परिभाषा से हटा दिया गया है। इसका मतलब है कि वारिस स्वतंत्र रूप से किरायेदारी अधिकार का दावा नहीं कर सकते।



सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया कि संयुक्त किरायेदारी एक अविभाज्य इकाई होती है। इसमें अगर किसी एक किरायेदार के खिलाफ बेदखली आदेश पारित हो जाता है तो वह आदेश सभी वारिसों पर लागू होगा।



किरायेदारी विवादों में राहत

यह फैसला पूरे राजस्थान सहित देशभर में किरायेदारी विवादों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल के रूप में सामने आया है। इससे मकान मालिकों को लंबे समय से चल रहे किरायेदारी विवादों में राहत मिल सकती है। अब यह साफ हो गया है कि किरायेदार की मृत्यु के बाद उसके सभी वारिस स्वतंत्र रूप से अधिकार का दावा नहीं कर सकते।



कानूनी प्रभाव

इस फैसले से यह भी साफ हो गया है कि यदि किसी किरायेदार के खिलाफ बेदखली का आदेश पारित होता है, तो यह आदेश उसकी पूरी परिवार इकाई पर लागू होगा। इसके साथ ही कोर्ट ने मौखिक बिक्री के दावे को भी खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि केवल पंजीकृत दस्तावेज़ों के जरिए संपत्ति का हस्तांतरण किया जा सकता है।



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