खेजड़ी पर कुल्हाड़ी और आंदोलनकारियों को 'नोटिस': बीकानेर में रक्षक और प्रशासन आमने-सामने

'खेजड़ी' को बचाने की लड़ाई अब राजस्थान में बीकानेर की सड़कों से निकलकर प्रशासनिक दमन के खिलाफ भी है। आंदोलन दबाने के लिए प्रशासन अब आंदोलनकारियों को नोटिस देने और जांच का सहारा ले रहा है।

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Ashish Bhardwaj
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Photograph: (the sootr)

News In Short

  • बीकानेर में 2 फरवरी से चल रहा है खेजड़ी बचाओ आंदोलन।
  • प्रशासन  पर आंदोलन को दबाने के लिए हथकंड़े अपनाने का आरोप।
  • आंदोलन नेता भागीरथ तेतरवाल बोले, उन्हें किया जा रहा परेशान।
  • आंदोलन से जुड़े मनोज विश्नोई की होटल को बीडीए ने दिया नोटिस।
  • नोटिस के खिलाफ मनोज अपने समर्थकों के साथ दे चुके धरना। 

News In Detail

Bikaner: राजस्थान की मरुधरा पर 'प्राण जाए पर वृक्ष न जाए' का नारा फिर गूंज रहा है। सोलर प्लांट के नाम पर खेजड़ी के पेड़ों की बलि दिए जाने के खिलाफ बीकानेर में शुरू हुआ 'खेजड़ी पेड़ बचाओ अभियान' अब सत्ता और समाज के बीच सीधे टकराव का रूप ले चुका है। 

चौंकाने वाली बात यह है कि पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम को कुचलने के लिए प्रशासन अब 'साम-दाम-दंड-भेद' की नीति पर उतर आया है। आंदोलन के प्रमुख चेहरों को कभी सड़क पर रोका जा रहा है, तो कभी उनके निजी व्यवसायों पर नोटिसों की मार दी जा रही है। लेकिन, बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों ने साफ कर दिया है कि जब तक राजस्थान की 'कल्पवृक्ष' खेजड़ी की कटाई पर राज्यव्यापी पूर्ण लिखित प्रतिबंध नहीं लगता, यह संघर्ष थमेगा नहीं।

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डराने की कोशिश या महज इत्तेफाक

​आंदोलनकारियों का आरोप है कि बीकानेर जिला प्रशासन आंदोलन की धार कुंद करने के लिए उन पर व्यक्तिगत और राजनीतिक दबाव बना रहा है। आंदोलन के अग्रणी नेता भागीरथ तेतरवाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें और उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है। 

तेतरवाल के अनुसार, जब वे बज्जू जा रहे थे, तब डीटीओ (DTO) की टीम ने उन्हें रोककर परेशान किया। उन्होंने दावा किया कि यह सब कलेक्टर के इशारे पर किया जा रहा है ताकि वे आंदोलन से पीछे हट जाएं। ​सिर्फ सड़क पर ही नहीं, बल्कि विकास कार्यों में भी अड़ंगे लगाए जा रहे हैं। 

तेतरवाल की पत्नी बज्जू में प्रधान हैं। उनका आरोप है कि उनके द्वारा अनुशंसित विकास कार्यों को जानबूझकर रोका जा रहा है। यह सीधे तौर पर एक निर्वाचित प्रतिनिधि की शक्ति को बाधित कर आंदोलनकारी की आवाज दबाने की कोशिश दिखाई देती है।

​होटल पर नोटिस और बीडीए के खिलाफ प्रदर्शन

​दबाव की रणनीति का दूसरा उदाहरण बीकानेर के पूर्व पार्षद और आंदोलन से जुड़े सक्रिय नेता मनोज विश्नोई के मामले में देखने को मिला। बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) ने अचानक उनकी 'होटल शौर्य 3.0' को अवैध बताते हुए नोटिस थमा दिया। बीडीए का दावा है कि निरीक्षण के दौरान न तो वैध अनुमति मिली और न ही लैंड कन्वर्जन के दस्तावेज।

​इस कार्रवाई को मनोज विश्नोई ने 'चुनिंदा निशाना' (Targeted Action) करार दिया है। उनके समर्थकों का सवाल है कि क्या बीकानेर के अन्य होटल पूर्णतः वैध हैं? क्या यह नोटिस केवल इसलिए आया, क्योंकि मनोज खेजड़ी बचाने की लड़ाई में आगे हैं? इसके विरोध में बुधवार को बीडीए कार्यालय के बाहर धरना दिया गया। हालांकि बाद में बीडीए सचिव के साथ हुई चर्चा में एक सप्ताह के भीतर दस्तावेज दिखाने पर सहमति बनी। 

अधिकारी बोले, दिखाने होंगे दस्तावेज

उधर, बीडीए अधिकरियों का कहना है कि होटल को नोटिस देने की प्रक्रिया पूरी तरह प्रशासनिक है। इसके पीछे किसी तरह का कोई दुराभाव नहीं है। पिछले दिनों बीडीए के अधिकारियों ने मनोज विश्नोई के होटल का निरीक्षण किया था। उसमें कागजातों को लेकर मिली खामियों के बाद ही नोटिस दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि होटल संचालक को वैध दस्तावेज बीडीए में पेश करने ही होंगे। बगैर किसी अनुमति के होटल बनाना और उसका संचालन करना नियमों में गलत है।

क्या है आंदोलन की मुख्य मांग

​बीकानेर में सोलर प्लांट स्थापना के लिए बड़े पैमाने पर खेजड़ी के पेड़ों की कटाई के विरोध में 2 फरवरी 2026 से यह अनिश्चितकालीन धरना शुरू हुआ था। बिश्नोई समाज की मांगें अत्यंत स्पष्ट और अडिग हैं:

​लिखित गारंटी: केवल बीकानेर या जोधपुर ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान में खेजड़ी की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध का लिखित सरकारी आदेश जारी हो।

​सौर ऊर्जा बनाम पर्यावरण: सोलर प्लांट का स्वागत है, लेकिन पेड़ों की बलि देकर नहीं। प्रशासन उन जमीनों का चयन करे जहां वनस्पति न हो।
​दोषियों पर कार्रवाई: अब तक जिन खेजड़ी के पेड़ों को अवैध रूप से काटा गया है, उनके जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।

​विफल रही मंत्री की मध्यस्थता

मंत्री केके बिश्नोई ने हाल ही में बीकानेर पहुंचकर आंदोलनकारियों से संवाद किया। उन्होंने संतों को जूस पिलाकर अनशन खत्म कराने की कोशिश की और आश्वासन दिया कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीर है। हालांकि, आंदोलनकारी नेता इस बार मौखिक आश्वासन के झांसे में आने को तैयार नहीं हैं। ​आंदोलनकारियों का दोटूक कहना है- "अश्वासन बहुत मिल चुके, अब सिर्फ आदेश चाहिए।" जब तक राज्य सरकार आधिकारिक तौर पर खेजड़ी की कटाई को प्रतिबंधित करने का गजट नोटिफिकेशन या लिखित आदेश नहीं लाती, धरना जारी रहेगा।

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