खेजड़ी पर कुल्हाड़ी और आंदोलनकारियों को 'नोटिस': बीकानेर में रक्षक और प्रशासन आमने-सामने
Ashish Bhardwaj | Feb 12, 2026, 19:03 IST
Photograph: (the sootr)
'खेजड़ी' को बचाने की लड़ाई अब राजस्थान में बीकानेर की सड़कों से निकलकर प्रशासनिक दमन के खिलाफ भी है। आंदोलन दबाने के लिए प्रशासन अब आंदोलनकारियों को नोटिस देने और जांच का सहारा ले रहा है।
News In Short
- बीकानेर में 2 फरवरी से चल रहा है खेजड़ी बचाओ आंदोलन।
- प्रशासन पर आंदोलन को दबाने के लिए हथकंड़े अपनाने का आरोप।
- आंदोलन नेता भागीरथ तेतरवाल बोले, उन्हें किया जा रहा परेशान।
- आंदोलन से जुड़े मनोज विश्नोई की होटल को बीडीए ने दिया नोटिस।
- नोटिस के खिलाफ मनोज अपने समर्थकों के साथ दे चुके धरना।
News In Detail
चौंकाने वाली बात यह है कि पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम को कुचलने के लिए प्रशासन अब 'साम-दाम-दंड-भेद' की नीति पर उतर आया है। आंदोलन के प्रमुख चेहरों को कभी सड़क पर रोका जा रहा है, तो कभी उनके निजी व्यवसायों पर नोटिसों की मार दी जा रही है। लेकिन, बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों ने साफ कर दिया है कि जब तक राजस्थान की 'कल्पवृक्ष' खेजड़ी की कटाई पर राज्यव्यापी पूर्ण लिखित प्रतिबंध नहीं लगता, यह संघर्ष थमेगा नहीं।
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डराने की कोशिश या महज इत्तेफाक
तेतरवाल के अनुसार, जब वे बज्जू जा रहे थे, तब डीटीओ (DTO) की टीम ने उन्हें रोककर परेशान किया। उन्होंने दावा किया कि यह सब कलेक्टर के इशारे पर किया जा रहा है ताकि वे आंदोलन से पीछे हट जाएं। सिर्फ सड़क पर ही नहीं, बल्कि विकास कार्यों में भी अड़ंगे लगाए जा रहे हैं।
तेतरवाल की पत्नी बज्जू में प्रधान हैं। उनका आरोप है कि उनके द्वारा अनुशंसित विकास कार्यों को जानबूझकर रोका जा रहा है। यह सीधे तौर पर एक निर्वाचित प्रतिनिधि की शक्ति को बाधित कर आंदोलनकारी की आवाज दबाने की कोशिश दिखाई देती है।
होटल पर नोटिस और बीडीए के खिलाफ प्रदर्शन
इस कार्रवाई को मनोज विश्नोई ने 'चुनिंदा निशाना' (Targeted Action) करार दिया है। उनके समर्थकों का सवाल है कि क्या बीकानेर के अन्य होटल पूर्णतः वैध हैं? क्या यह नोटिस केवल इसलिए आया, क्योंकि मनोज खेजड़ी बचाने की लड़ाई में आगे हैं? इसके विरोध में बुधवार को बीडीए कार्यालय के बाहर धरना दिया गया। हालांकि बाद में बीडीए सचिव के साथ हुई चर्चा में एक सप्ताह के भीतर दस्तावेज दिखाने पर सहमति बनी।
अधिकारी बोले, दिखाने होंगे दस्तावेज
क्या है आंदोलन की मुख्य मांग
लिखित गारंटी: केवल बीकानेर या जोधपुर ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान में खेजड़ी की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध का लिखित सरकारी आदेश जारी हो।
सौर ऊर्जा बनाम पर्यावरण: सोलर प्लांट का स्वागत है, लेकिन पेड़ों की बलि देकर नहीं। प्रशासन उन जमीनों का चयन करे जहां वनस्पति न हो।
दोषियों पर कार्रवाई: अब तक जिन खेजड़ी के पेड़ों को अवैध रूप से काटा गया है, उनके जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
विफल रही मंत्री की मध्यस्थता
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