चतुर्थ श्रेणी भर्ती में जीरो कट ऑफ वाली मेरिट लिस्ट रद्द, हाई कोर्ट का अहम फैसला
News In Short
- हाई कोर्ट ने चतुर्थ श्रेणी भर्ती में जीरो कट-ऑफ वाली मेरिट लिस्ट को किया रद्द।
- कोर्ट बोली- बिना न्यूनतम अंक तय किए भर्ती कराना गैर-संविधानिक।
- RSSB को नियमों में सुधार कर न्यूनतम अंक निर्धारित करने के निर्देश।
- सरकारी सेवा में चाहे कोई भी पद हो, बेसिक स्टैंडर्ड का होना आवश्यक।
News In Detail
राजस्थान हाई कोर्ट ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 में अलग-अलग कैटेगिरी की मैरिट लिस्ट को रद्द कर दिया है। जस्टिस आनंद शर्मा की अदालत ने विनोद कुमार की याचिका पर फैसला सुनाते जीरो कट ऑफ वाली कैटेगिरी की मैरिट लिस्ट को रद्द कर दिया।
अदालत ने कहा कि भर्ती में न्यूनतम अंक निर्धारित करना जरूरी है। बिना न्यूनतम अंक निर्धारण के भर्ती करना गैर संविधानिक माना जाएगा। अदालत ने राजस्थान स्टॉफ सलेक्शन बोर्ड (RSSB) को न्यूनतम अंक निर्धारित करने की छूट दी हैं।
कोर्ट ने कहा- चाहे पद चतुर्थ श्रेणी का ही क्यों न हो, लेकिन सरकारी सेवा में एक बेसिक स्टैंडर्ड का होना जरूरी है।
जीरो और माइंस में नंबर लाने वाले में क्या फर्क?
वकील हरेंद्र नील ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में एक्स सर्विसमैन (ओबीसी) कैटेगरी में आवेदन किया था। भर्ती परीक्षा में उसके माइनस में अंक आए। उसकी कैटेगरी में बोर्ड को उपयुक्त कैंडीडेट नहीं मिल रहे हैं। जबकि भर्ती में सैकड़ों पद खाली है।
ऐसे में माइनस में अंक लाने वालों को भी नियुक्ति दी जाए। क्योंकि भर्ती विज्ञप्ति और सेवा नियमों में न्यूनतम अंक निर्धारित नहीं किए गए हैं। वहीं कई कैटेगिरी में कट ऑफ 0.0033 (जीरो) गई हैं। इसके बावजूद उन कैटेगिरी में सलेक्शन किया है।
ऐसे में जीरों नंबर लाने वाले कैंडीडेट नहीं मिलने पर माइनस अंक लाने वालों को भी नियुक्ति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जीरो और माइनस अंक लाने वाले कैंडीडेट की योग्यता में कोई फर्क नहीं है।
सेवा नियमों में न्यूनतम अंक का प्रावधान नहीं
सुनवाई के दौरान कार्मिक विभाग और कर्मचारी चयन बोर्ड (आरएसएसबी) ने कहा कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती के सेवा नियमों में न्यूनतम अंक का कोई प्रावधान नहीं हैं। ऐसे में हम जीरो अंक वालों का भी सलेक्शन कर सकते हैं। लेकिन माइनस में अंक लाने वाले कैंडीडेट अत्यंत कमजोर श्रेणी में माने जाते है। इसलिए उनका सलेक्शन नही किया।
हाईकोर्ट ने इस तर्क को नकारते हुए संबंधित विभाग और कर्मचारी चयन बोर्ड को न्यूनतम अंक निर्धारित करते हुए फिर इन कैटेगिरी में मैरिट लिस्ट जारी करने के आदेश दिए।
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