80 की उम्र, चलना-फिरना बंद, फिर भी रिकॉर्ड में हिस्ट्रीशीटर का ठप्पा
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में ऐसे भी हिस्ट्रीशीटर, जो जीवन के आखिरी पड़ाव पर हैं।
- इन हिस्ट्रीशीटरों की उम्र 80 के पार हो चुकी, चलने की भी स्थिति नहीं।
- राजस्थान पुलिस के रिकॉर्ड में प्रदेशभर में 12 हजार से अधिक हिस्ट्रीशीटर।
- विधि विशेषज्ञों का सुझाव है कि हिस्ट्रीशीटरों की सूची की नियमित समीक्षा हो।
उम्र 80 के पार...कोई बिस्तर से उठने में असमर्थ है तो कोई पैरालिसिस की मार झेल रहा है। हाथों में लाठी थामने की भी ताकत नहीं बची, लेकिन पुलिस के सरकारी रिकॉर्ड में ये आज भी हिस्ट्रीशीटर दर्ज हैं।
दशकों पहले अपराध की दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह चुके कई बुजुर्ग आज भी ढलती उम्र में पुलिस थानों और कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने को मजबूर हैं। यह चौंकाने वाली और मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाली हकीकत राजस्थान की है।
प्रदेश भर में 12 हजार से अधिक हिस्ट्रीशीटरों की सूची की नियमित समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है।
अपराध छूटा, पर हिस्ट्रीशीटर का दाग नहीं
झालावाड़ जिले से कुछ बेबस बुजुर्गों की कहानियां सामने आई हैं, जो सिस्टम की सुस्ती की बानगी पेश करती हैं:
रघुसिंह (80 वर्ष): चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं। इनके खिलाफ सात वर्ष पहले दुर्घटना का एक मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद ये हिस्ट्रीशीटर सूची में शामिल हो गए और लगातार पुलिस की निगरानी में हैं।
जगमाल खां (80 वर्ष): लकवाग्रस्त होने के कारण बिस्तर पर हैं। इनके खिलाफ तीन मामले दर्ज हैं। इन्होंने आखिरी अपराध 29 वर्ष पहले किया था। इसके बावजूद इनका नाम आज भी हिस्ट्रीशीटर सूची से नहीं हटा है।
मोग्या तंवर (81 वर्ष): इनके खिलाफ आखिरी मुकदमा आज से करीब 49 साल पहले यानी वर्ष 1977 में दर्ज हुआ था। आज वे चलने-फिरने लायक नहीं हैं, लेकिन नियम इतने कड़े हैं कि उन्हें हर छह महीने में मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होकर पाबंद होना पड़ता है।
71 बुजुर्गों को मिली बड़ी राहत
इस जटिल व्यवस्था के बीच झालावाड़ के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने एक मानवीय पहल की है। उन्होंने हाल ही में जिले के करीब 450 हिस्ट्रीशीटरों की फाइलों की समीक्षा (रिव्यू) करवाई।
इस जांच में 71 ऐसे लोग मिले, जिनके खिलाफ लंबे समय से कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। इसके बाद पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए इन सभी 71 लोगों की पुलिस निगरानी हमेशा के लिए बंद कर दी, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है।
क्या कहते हैं पुलिस के नियम?
विधि विशेषज्ञों के अनुसार पुलिस नियमों में हिस्ट्रीशीट खोलने का उद्देश्य किसी को स्थायी अपराधी घोषित करना नहीं है, बल्कि आदतन अपराधियों और संदिग्ध असामाजिक तत्वों पर केवल निगरानी रखना है।
नियमों के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से अपराधमुक्त जीवन जी रहा है। उसके खिलाफ कोई नया मामला दर्ज न हुआ हो या वह अधिकांश मामलों में दोषमुक्त (बरी) हो चुका हो तो वह एसपी के समक्ष हिस्ट्रीशीट बंद करने का आवेदन कर सकता है।
अगर वहां से राहत नहीं मिलती तो हाई कोर्ट में याचिका दायर की जा सकती है। सामान्यतः 15 से 20 वर्षों तक कोई नया मामला दर्ज नहीं होने पर हिस्ट्रीशीट बंद होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
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