अंधेरे में डूबी स्वास्थ्य सेवा, 80 से ज्यादा PHC-CHC पर नहीं है बिजली कनेक्शन

Ashish Bhardwaj | Jul 22, 2026, 11:59 IST
अंधेरे में में चिकित्सा व्यवस्था
राजस्थान के 80 से ज्यादा सीएचसी-पीएचसी में बिजली नहीं है। इसमें भी उदयपुर की हालत सबसे ज्यादा खराब है। यहां 24 सेंटर में बिजली नहीं है। इससे दवाएं खराब हो रहीं है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान के 80 से ज्यादा सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली की सुविधा नहीं है।
  • बिजली संकट से दवाएं, वैक्सीन और मरीजों की इलाज व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
  • उदयपुर जिले के 24 स्वास्थ्य केंद्र सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं।
  • कई जगह कनेक्शन नहीं लिया गया तो कुछ जगह बिल बकाया होने से बिजली कटी है।
  • बिजली के अभाव में मरीजों को दूर के अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है।

राजस्थान के 80 से अधिक अस्पतालों में बिजली नहीं है। इनमें सीएचसी, पीएचसी और सब-सेंटर शामिल हैं। बिजली न होने से दवाएं और वैक्सीन हर साल खराब हो जाती हैं। डॉक्टर भी एसी और पंखे न होने से सेंटर पर नहीं आते। सबसे खराब हालत उदयपुर जिले की है, जहां 24 सेंटर अंधेरे में चल रहे हैं।



पण्डयावाडा पीएचसी का हाल

उदयपुर के पण्डयावाडा में पीएचसी का उद्घाटन पिछले साल मार्च में हुआ था। लेकिन आज तक यहां बिजली का कनेक्शन नहीं हुआ। कोल्ड चेन न होने से दवाएं और वैक्सीन खराब हो जाती हैं। एसी-पंखे न होने से डॉक्टर भी यहां नहीं टिकते। मरीजों को बुखार-जुकाम जैसी छोटी बीमारियों के लिए भी 50 से 60 किमी दूर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। तैनात स्टाफ का कहना है कि डॉक्टर न होने से मरीज परेशान होते हैं।



पूरे प्रदेश में यही हाल

यह सिर्फ एक पीएचसी की कहानी नहीं है। प्रदेश में 80 से ज्यादा ऐसे अस्पताल हैं जहां बिजली नहीं आती। कुछ जगह कनेक्शन ही नहीं लिया गया। कुछ जगह बिल न भरने से कनेक्शन काट दिया गया। इसके बाद दोबारा कनेक्शन नहीं कराया गया। उदयपुर की स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है, जहां 24 स्वास्थ्य केंद्र अंधेरे में हैं।



इन जगहों पर नहीं है बिजली

कोटा की मासलपुर पीएचसी में बिजली नहीं है। किशनगढ़बास की इस्माइलपुर पीएचसी भी अंधेरे में है। तिजारा की भागोर पीएचसी और प्रतापनगर की यूपीएचएसी (UPHC – Urban Primary Health Centre) भी प्रभावित हैं। पीपलिया पीएचसी में भी बिजली नहीं आती। जयपुर के आंधी, जालौर के जसवंतपुरा, झालावाड़ के भवानी और करौली के मंडरायल केंद्र भी इसी सूची में हैं। नागौर के जायल और प्रतापगढ़ के कापूड़ा एसएचसी (SHC – Sub Health Centre) में भी यही समस्या है। कुल मिलाकर ऐसे 80 सेंटर हैं।



आयुष्मान योजना पर भी असर

बिजली न होने से आयुष्मान योजना और मुफ्त इलाज की सुविधाएं भी प्रभावित होती हैं। एएनएम एचएमआईएस (HMIS – Health Management Information System) का काम रुक जाता है। आरसीएच पोर्टल (RCH – Reproductive and Child Health) पर रिकॉर्ड अपडेट नहीं हो पाता। फ्रिज बंद रहने से दवाई, इंसुलिन और ओआरएस या तो रखे ही नहीं जाते। यदि रखे भी जाएं तो वे जल्दी खराब हो जाते हैं।



हर महीने सैकड़ों मरीज रेफर

उदयपुर, जोधपुर और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में मरीज बिजली न होने से अस्पताल आते ही नहीं। जो आते हैं उन्हें जिला अस्पताल भेज दिया जाता है। हर महीने करीब 600 मरीज इसी वजह से रेफर होते हैं। उदयपुर के आरएनटी अस्पताल और बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में हर दिन 20 से ज्यादा मरीज रेफर होते हैं। जोधपुर मेडिकल कॉलेज में औसतन 6 मरीज रोज रेफर किए जाते हैं। स्टाफ का कहना है कि बिजली न होने वाले केंद्र आसपास के अस्पतालों पर निर्भर हैं। वैक्सीनेशन और दवाइयों के लिए भी लोग पास की सीएचसी-पीएचसी पर ही जाते हैं।



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