दूसरे राज्यों के डॉक्टरों के नाम पर चल रहे हैं अस्पताल, धौलपुर में 12 के रजिस्ट्रेशन सस्पेंड
News In Short
- दूसरे राज्यों के डॉक्टरों के नाम पर चल रहे अस्पतालों को लेकर अधिकारी जागे।
- डॉक्टरों के लिए यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर तैयार करने का काम तीन साल से अधर में।
- इसके अभाव में दूसरे राज्यों के डॉक्टर धड़ल्ले से प्रैक्टिस और ऑपरेशन कर रहे हैं।
- धौलपुर में ऐसे 12 निजी अस्पतालों पर एक्शन हुआ, जिनके संचालक दूसरे राज्यों के थे।
- फर्जीवाड़ों की लगातार शिकायत आने पर अब सभी निजी अस्पतालों से मांगा रिकॉर्ड।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के बड़े-बड़े दावों के बीच एक बेहद लापरवाही सामने आई है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के स्तर पर डॉक्टरों के लिए यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर और राष्ट्रीय स्तर का रियल-टाइम डेटाबेस तैयार करने की योजना तीन साल से अधर में लटकी हुई है।
इस ढीले सिस्टम का फायदा उठाकर चिकित्सा क्षेत्र में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्थिति यह है कि एक राज्य में पंजीकृत डॉक्टर बिना किसी सूचना, एनओसी या वैध स्थानांतरण के दूसरे राज्यों में धड़ल्ले से प्रैक्टिस और बड़े-बड़े ऑपरेशन कर रहे हैं।
इस ढिलाई के बीच अब प्रदेश का चिकित्सा विभाग हरकत में आता हुआ दिखाई दे रहा है। धौलपुर जिले में 12 निजी अस्पतालों के पंजीयन सस्पेंड किए जाने की हालिया कार्रवाई इस बात का संकेत है कि स्वास्थ्य महकमा अब जाग रहा है। नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी अस्पतालों व डॉक्टरों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर रहा है।
धौलपुर में 12 निजी अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन रद्द
धौलपुर जिले में हाल ही में 12 निजी अस्पतालों पर एक्शन हुआ है। इन अस्पतालों के खिलाफ राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) में पंजीकरण न होने और बाहरी राज्यों के चिकित्सकों के नाम पर अवैध रूप से अस्पताल संचालन जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आई थी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. धर्म सिंह मीणा ने जिले के 12 निजी अस्पतालों के पंजीकरण को 5 दिन के लिए निलंबित कर दिया है। सीएमएचओ डॉ. मीणा ने अपनी टीम के साथ शहर के प्रमुख अस्पतालों का निरीक्षण किया था।
बाहरी राज्यों के डॉक्टरों के भरोसे चल रहा था खेल
राजस्थान स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह तथ्य सामने आया कि धौलपुर में कई निजी अस्पताल दूसरे राज्यों से पंजीकृत चिकित्सकों के माध्यम से संचालित किए जा रहे थे। नियमों के मुताबिक कोई भी डॉक्टर किसी राज्य में तब तक प्रैक्टिस नहीं कर सकता, जब तक कि वह उस विशिष्ट राज्य की मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत न हो।
यदि कोई बाहरी राज्य का चिकित्सक राजस्थान में मरीजों का इलाज या ऑपरेशन करना चाहता है, तो उसे राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) में अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इस नियम का खुला उल्लंघन पाए जाने पर विभाग ने सख्त कार्रवाई की है।
यूनिक आईडी की कमी और राजस्थान के सामने चुनौतियां
आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में वर्तमान में लगभग 80 से 82 हजार डॉक्टर पंजीकृत हैं। लेकिन एक राष्ट्रीय स्तर की ट्रैकिंग प्रणाली और यूनिक आईडी व्यवस्था न होने के कारण अवैध रूप से प्रैक्टिस करने वाले और फर्जी डॉक्टरों का बोलबाला लगातार बढ़ रहा है।
जब कोई डॉक्टर बिना स्थानीय पंजीकरण के किसी निजी अस्पताल में सेवाएं देता है, तो काउंसिल के पास उसका कोई रिकॉर्ड नहीं होता। ऐसी स्थिति में उस डॉक्टर की योग्यता, डिग्री और विशेषज्ञता की प्रामाणिकता की जांच करना लगभग असंभव हो जाता है।
सबसे बड़ा संकट तब खड़ा होता है जब दूसरे राज्यों के ये डॉक्टर बिना पंजीकरण के यहां आकर बड़े ऑपरेशन या जटिल चिकित्सा प्रक्रियाएं कर देते हैं और किसी अनहोनी या मरीज की मौत की स्थिति में उनकी कानूनी जिम्मेदारी तय करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
तीन साल पहले ही संसदीय समिति ने चेताया था
हैरानी की बात यह है कि डॉक्टरों के इस मल्टी-स्टेट रजिस्ट्रेशन और ट्रैकिंग की गंभीर समस्या को सुलझाने के लिए तीन साल पहले ही संसदीय समिति ने अपनी महत्वपूर्ण सिफारिशें सौंप दी थीं। समिति ने सुझाव दिया था कि अमेरिका के जीपीआई ट्रैक (GPI Track) की तर्ज पर भारत में भी एक रियल-टाइम राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया जाना चाहिए।
इस डेटाबेस के क्रियान्वयन से राजस्थान स्वास्थ्य मंत्रालय, राज्य सरकारों, मेडिकल कॉलेजों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को एक ही डिजिटल मंच पर देश के सभी डॉक्टरों की सही स्थिति और जानकारी मिल सकेगी। यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर लागू होने से एक ही डॉक्टर के अलग-अलग राज्यों में होने वाले फर्जी या डुप्लीकेट पंजीकरण पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे।
निजी अस्पतालों से मांगा गया संपूर्ण रिकॉर्ड
लगातार सामने आ रहे फर्जीवाड़ों और धौलपुर की घटना के बाद अब राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) ने प्रदेशभर में सख्ती दिखाना शुरू कर दिया है। काउंसिल ने राज्य के सभी निजी अस्पतालों को एक कड़ा निर्देश जारी करते हुए वहां कार्यरत सभी डॉक्टरों के पंजीकरण का पूरा विवरण और डेटा मांगा है।
इस कवायद का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि राजस्थान में वर्तमान में ऐसे कितने डॉक्टर सक्रिय हैं, जो पंजीकृत किसी अन्य राज्य में हैं लेकिन सेवाएं यहां दे रहे हैं। आरएमसी के सूत्रों का कहना है कि अब डॉक्टरों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जाएगा, ताकि सिस्टम की ढील का फायदा उठा रहे तत्वों को बेनकाब किया जा सके।
FAQ
- धौलपुर में 12 निजी अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन क्यों सस्पेंड किया गया?
धौलपुर में 12 निजी अस्पतालों का पंजीकरण इसलिए निलंबित किया गया क्योंकि वहां बाहरी राज्यों के डॉक्टर बिना राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में रजिस्ट्रेशन के प्रैक्टिस कर रहे थे। जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। - राजस्थान में बाहरी राज्यों के डॉक्टरों के पंजीकरण लिए क्या नियम हैं?
यदि कोई डॉक्टर दूसरे राज्य से आकर राजस्थान में इलाज या ऑपरेशन करना चाहता है, तो उसे राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। बिना वैध रजिस्ट्रेशन के प्रैक्टिस करना नियमों का उल्लंघन माना जाता है। - यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर और राष्ट्रीय डेटाबेस की जरूरत क्यों है?
यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर और राष्ट्रीय डेटाबेस से फर्जी डॉक्टरों, डुप्लीकेट पंजीकरण और अवैध प्रैक्टिस पर रोक लगेगी। इससे मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी और डॉक्टरों की वास्तविक पहचान व रिकॉर्ड आसानी से ट्रैक किए जा सकेंगे।
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