अवैध खनन करने वालों से वसूली में दो आरपीएस एपीओ, आईपीएस पहले ही हटाए

Ashish Bhardwaj | Apr 07, 2026, 12:42 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में गारनेट का अवैध खनन करने वालों से वसूली के मामले में दो आरपीएस पर गाज गिरी है। इससे पहले आईपीएस अधिकारी माधव उपाध्याय को एपीओ कर दिया गया था।

News In Short

  • गारनेट का अवैध खनन करने वालों से वसूली के मामले में दो आरपीएस पर गाज।
  • एक दिन पहले आईपीएस अधिकारी माधव उपाध्याय को किया गया एपीओ।
  • वसूली की परतें खुलने के बाद भीलवाड़ा में डिस्ट्रिक्ट स्पेशल टीम भंग।
  • जांच में 20 से 40 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन की बात सामने आ रही है।
  • विधायक के संरक्षण में उनके पीए अजय पांचाल चला था यह गैंग।

News In Detail

​Bhilwara: राजस्थान में गारनेट का अवैध खनन करने वालों से वसूली के मामले में पुलिस की मिलीभगत की परतें तेजी से खुल रही हैं। आईपीएस अधिकारी माधव उपाध्याय के बाद दो पुलिस उपाधीक्षकों को भी एपीओ कर दिया गया है। पुलिस विभाग में संभवतः यह पहला मामला है, जहां प्रोबेशन पीरियड के दौरान ही किसी आईपीएस अधिकारी पर इस तरह के गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।



​क्या है पूरा मामला?

यह पूरा प्रकरण गारनेट के अवैध खनन व परिवहन से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन के खेल में पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत थी। ट्रेनी आईपीएस माधव उपाध्याय भीलवाड़ा के गंगापुर क्षेत्र में तैनात थे। उन पर अवैध वसूली का नेटवर्क चलाने और लेनदेन के पुख्ता सबूत मिले हैं। शुरुआती जांच में 20 से 40 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन की बात सामने आ रही है।



​डीएसटी हो गई भंग

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी धर्मेंद्र सिंह ने डिस्ट्रिक्ट स्पेशल टीम (डीएसटी) को तत्काल भंग कर दिया है। जांच में सामने आया है कि इस पूरे सिंडिकेट में जहाजपुर सेभाजपा विधायक गोपीचंद मीणा के निजी सहायक अजय पांचाल की भूमिका संदिग्ध रही है। अजय पांचाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट ने उसे 3 दिन की रिमांड पर भेजा है।


​अजय पांचाल के पुलिस अधिकारियों के साथ गहरे संबंध थे। सोशल मीडिया पर ऐसी कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें वह पुलिसकर्मियों के साथ होटल में पार्टी करते और जन्मदिन मनाते नजर आ रहे हैं। इसी निकटता का फायदा उठाकर वह अवैध खनन के परिवहन में वसूली का जरिया बना हुआ था। बताया जाता है कि इस कार्य में उन पर विधायक मीणा का हाथ था।



​विभाग में मची खलबली

​ट्रेनी आईपीएस के अलावा बारां जिले में शाहबाद के डीएसपी रिछपाल मीणा और चित्तौड़गढ़ में गंगरार की डीएसपी शिवन्या सिंह को एपीओ किया गया है। तीनों अधिकारियों को पदमुक्त कर जयपुर मुख्यालय रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।



संदेह के दायरे में डीएसटी

सरकार ने यह कदम भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत उठाया है। वर्तमान में अजमेर रेंज आईजी ने इस पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जांच के दायरे में डीएसटी के अन्य पुलिसकर्मी और कुछ स्थानीय रसूखदार लोग भी आ सकते हैं।



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