इंडस्ट्री की जगह जमीन का खेल, छूट लेकर बेच दिया इंडस्ट्रियल प्लॉट, कैग ने पकड़ी एक करोड़ की स्टाम्प ड्यूटी चोरी
News In Short
- इंडस्ट्रियल भूखंडों के पंजीकरण में दी गई छूट का हो रहा दुरूपयोग।
- कैग की रिपोर्ट में माना, लगभग 1.05 करोड़ रुपये की छूट दे दी गलत।
- 5 मामलों में पाया गया कि जमीन का उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया।
- छूट केवल नई औद्योगिक इकाइयों या विस्तार परियोजनाओं के लिए।
- दुरुपयोग रोकने के लिए परियोजनाओं की सख्त निगरानी की आवश्यकता।
News In Detail
राजस्थान में इंडस्ट्रियल भूखंडों के पंजीकरण में स्टाम्प ड्यूटी और सरचार्ज में दी गई छूट में अनियमितताओं का बड़ा खुलासा हुआ है। यह खुलासा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में कहा है कि यह अनियमितता राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS), 2019 में हुई है। इसमें पंजीकरण और स्टाम्प ड्यूटी में लगभग 1.05 करोड़ रुपये की छूट गलत तरीके से दे दी गई।
अगस्त 2023 से मार्च 2024 के दस्तावेजों की जांच
ऑडिट के दौरान अगस्त 2023 से मार्च 2024 के बीच चार उप-पंजीयक कार्यालयों के रिकॉर्ड की जांच की गई। इसमें 5 मामलों में पाया गया कि औद्योगिक भूखंडों की खरीद पर 75% से 100% तक स्टाम्प ड्यूटी छूट दी गई, लेकिन बाद में जमीन का उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया।
औद्योगिक इकाई ही नहीं की स्थापित
कैग रिपोर्ट के अनुसार भीलवाड़ा और नीमराना में तीन मामलों में रीको (RIICO) ने सार्वजनिक नीलामी से आवंटित औद्योगिक भूखंडों पर पूरी स्टाम्प ड्यूटी छूट दी। हालांकि, भूखंड लेने वालों ने वहां कोई औद्योगिक इकाई स्थापित नहीं की। बाद में उन्हें बेच दिया। इन मामलों में दी गई 22.23 लाख रुपये की छूट को अनुचित बताते हुए इसे ब्याज सहित वसूलने की बात कही गई है।
छूट मिले भूखंड को चार हिस्सों में बांटकर बेच दिया
एक अन्य मामले में जयपुर में एक कंपनी को औद्योगिक भूखंड के लिए 74.21 लाख रुपये की पूर्ण छूट दी गई, लेकिन बाद में कंपनी ने उस भूखंड को चार हिस्सों में बांटकर बेच दिया। ऑडिट में कहा गया कि उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए दी गई यह रियायत जमीन के व्यापार के लिए इस्तेमाल की गई।
इसी तरह पाली में एक बिक्री विलेख को 75 प्रतिशत छूट दी गई, जबकि पंजीकरण के समय वहां औद्योगिक इकाई पहले से संचालित थी। ऐसे में वह इस लाभ के लिए पात्र नहीं थी।
ऐसी परियोजनाओं के लिए है यह योजना
ऑडिट में कहा गया कि योजना के तहत दी जाने वाली छूट केवल नई औद्योगिक इकाइयों या विस्तार परियोजनाओं के लिए है। यदि शर्तों का उल्लंघन होता है तो छूट वापस ली जानी चाहिए। कुल मिलाकर 1.05 करोड़ रुपये की स्टाम्प ड्यूटी व सरचार्ज, और लगभग 32 लाख रुपये ब्याज सहित वसूलने योग्य पाए गए।
सख्त निगरानी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के दुरुपयोग को रोकने के लिए परियोजनाओं की सख्त निगरानी जरूरी है। औद्योगिक भूखंडों के पुनर्विक्रय या विभाजन पर निश्चित अवधि तक रोक लगाई जानी चाहिए और उद्योग विभाग, रीको तथा पंजीयन विभाग के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए।
अधिकारियों ने यह भी सुझाव दिया कि समय-समय पर इकाइयों का सत्यापन किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आवंटित जमीन का उपयोग वास्तव में औद्योगिक उत्पादन के लिए ही किया जा रहा है।
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