पहली बार नैचुरल ब्रीडिंग से जन्मे 3 चूजे, डेजर्ट नेशनल पार्क में गोडावण का कुनबा बढ़कर हुआ 79
News In Short
- जैसलमेर में गोडावण ने प्राकृतिक रूप से प्रजनन कर 3 चूजों को दिया जन्म।
- डेजर्ट नेशनल पार्क में गोडावण की संख्या अब 79 तक पहुंच गई है।
- पक्षियों को ब्रीडिंग सेंटर से आजाद कर छोड़ने की तैयारी।
- इसके लिए प्रिडेटर प्रूफ बाड़े हैं जहां सुरक्षित घेरे लगाए गए हैं।
- 5 साल में गोडावण के 'खतरे की सूची' से बाहर आने की संभावना।
News In Detail
Jaisalmer: रेगिस्तान की पहचान माने जाने वाले ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) का संरक्षण अभियान कामयाब होता दिख रहा है। जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में वैज्ञानिकों और वन विभाग की कड़ी मेहनत ने वो करिश्मा कर दिखाया है, जिसकी उम्मीद खुद विशेषज्ञों को भी नहीं थी। पहली बार कृत्रिम नर्सरी के सुरक्षित माहौल में गोडावण ने प्राकृतिक रूप से प्रजनन कर अपने वंश को आगे बढ़ाया है।
11 नन्हे मेहमानों ने दी दस्तक, संख्या पहुंची 79
डेजर्ट नेशनल पार्क के डीएफओ (DFO) बृजमोहन गुप्ता के अनुसार, इस प्रजनन सीजन में कुल 11 नन्हे चूजों का जन्म हुआ है। इनमें से 3 चूजे ऐसे हैं जिनका जन्म बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप या कृत्रिम ऊष्मा (Incubation) के, पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से हुआ है। शेष 8 चूजों को वैज्ञानिकों की देखरेख में हैच करवाया गया है। इस बढ़त के साथ अब रामदेवरा सेंटर में 54 और सम (सुदासरी) ब्रीडिंग सेंटर में 25 गोडावण हो गए हैं। कुल मिलाकर संरक्षण केंद्रों में अब 79 पक्षी मौजूद हैं।
वैज्ञानिक बने केयरटेकर, पक्षी बने पेरेंट्स
2019 में जब यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ था, तब सारा दारोमदार जंगल से लाए गए अंडों पर था। लेकिन अब समीकरण बदल चुका है। शुरुआत में 33 संस्थापक पक्षी थे। इन पक्षियों ने अब तक 46 बच्चों को जन्म दिया है। जो इस बात का प्रमाण है कि गोडावण अब बंदी प्रजनन के माहौल में ढल चुके हैं और खुद अपनी विरासत संभालने के लिए तैयार हैं।
अब खुले आसमां की बारी
वन विभाग अब इन पक्षियों को पिंजरों और बाड़ों की बंदिशों से आजाद कर 'आजाद गगन' में छोड़ने की तैयारी कर रहा है। चूजों की बेहतरीन सेहत और सक्रियता को देखते हुए विभाग इन्हें उम्मीद से काफी पहले जंगल के माहौल में शिफ्ट करेगा।
इन नन्हे मेहमानों को खुले जंगल में छोड़ने से पहले जैसलमेर के घास के मैदानों में विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। जिसमें प्रिडेटर प्रूफ बाड़े हैं जहां शिकारी जानवरों (कुत्तों, लोमड़ियों) से बचाने के लिए सुरक्षित घेरे लगाए गए हैं। गोडावण की मौत का सबसे बड़ा कारण 'हाई टेंशन लाइन' है, जिस पर विभाग विशेष निगरानी रख रहा है।
खतरे की सूची बाहर आने की संभावना
DFO बृजमोहन गुप्ता ने इस सफलता को वैज्ञानिकों और फील्ड स्टाफ की जीत बताया है। उनका कहना है कि यदि प्रजनन की यही 'नेचुरल स्पीड' बनी रही, तो अगले 5 सालों में राजस्थान का राज्य पक्षी 'खतरे की सूची' (Critically Endangered) से बाहर आने की दिशा में बड़ी छलांग लगाएगा।
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