जोधपुर के वसुंधरा हॉस्पिटल पर 15.61 लाख का जुर्माना, सोडियम ओवरडोज से हुई थी महिला की मौत

thesootr Desk | Apr 16, 2026, 20:08 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में जालोर उपभोक्ता आयोग ने जोधपुर के वसुंधरा हॉस्पिटल पर 15.61 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। इस हॉस्पिटल में महिला की मौत सोडियम ओवरडोज से हुई थी। आयोग ने इसे मेडिकल लापरवाही माना।

News In Short

  • जालोर उपभोक्ता आयोग ने वसुंधरा हॉस्पिटल पर 15.61 लाख का जुर्माना लगाया।
  • पीड़ित महिला की मौत सोडियम ओवरडोज से हुई, डॉक्टरों को दोषी ठहराया गया।
  • अस्पताल पर 1.50 लाख रुपए का अतिरिक्त जुर्माना, स्टेट वेलफेयर फंड में जमा होगा।
  • पीड़ित परिवार को 15 लाख रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और इलाज खर्च मिला।
  • बिना मॉनिटरिंग के सोडियम चढ़ाना ‘घोर लापरवाही’ मानी गई।

News In Detail

Jalore: एक छोटी सी पित्ताशय की पथरी (गॉल ब्लैडर में स्टोन) ने एक महिला की जान ले ली। इसे उपभोक्ता आयोग ने भी मेडिकल लापरवाही माना है। जालोर के जिला उपभोक्ता आयोग ने जोधपुर के नामी वसुंधरा हॉस्पिटल और उसके तीन डॉक्टरों को बेहद गंभीर लापरवाही का दोषी पाते हुए 15.61 लाख रुपए से अधिक का हर्जाना देने का आदेश दिया है। साथ ही अस्पताल पर 1.50 लाख रुपए का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।



क्या था पूरा मामला?

जालोर निवासी परिवादी जोयब खान ने अपनी मां सायरा बानू को पेट दर्द की शिकायत पर मई 2022 में वसुंधरा अस्पताल में भर्ती कराया था। सर्जन डॉ. विनोद शैली ने पथरी बताकर ऑपरेशन किया, लेकिन ऑपरेशन के दौरान ही उलझनें शुरू हो गईं। 3 जून को हालत में सुधार न होने के बावजूद मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया।



9 जून 2022 को सायरा बानू की तबीयत फिर बिगड़ने पर उन्हें दोबारा अस्पताल लाया गया, जहां उनका सोडियम लेवल कम (114.3) पाया गया। फिजीशियन डॉ. अनिल शर्मा ने बिना किसी वाइटल मॉनिटरिंग के 3 प्रतिशत सोडियम का इंजेक्शन लगातार चढ़ाया। सोडियम का लेवल क्षमता से कहीं अधिक (160.07) बढ़ गया, जिससे मरीज बेसुध हो गईं।



न्यूरोलॉजिस्ट की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अचानक और अत्यधिक सोडियम चढ़ाने से सायरा बानू का ब्रेन डैमेज हो गया, जिसके बाद 14 जून को उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।



आयोग की सख्त टिप्पणी

आयोग के अध्यक्ष घनश्याम यादव और सदस्य निरंजन शर्मा की पीठ ने अस्पताल के मालिक डॉ. संजय मकवाना, सर्जन डॉ. विनोद शैली और फिजीशियन डॉ. अनिल शर्मा को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया। आयोग ने कहा कि डॉक्टर और मरीज के बीच परम विश्वास का संबंध होता है, लेकिन बिना मॉनिटरिंग के सोडियम चढ़ाना घोर लापरवाही की श्रेणी में आता है।



जुर्माने और मुआवजे का विवरण

आयोग ने पीड़ित परिवार को न्याय देते हुए मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 15 लाख रुपए, इलाज के खर्च के रूप में 51,662 रुपए तथा वाद व्यय के रूप में 10,000 रुपए की राशि निर्धारित की है, जिससे कुल देय राशि 15,61,662 रुपए बनती है। यदि यह राशि 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं की जाती है, तो 9% ब्याज भी देय होगा। इसके अतिरिक्त अस्पताल पर 1.50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसे स्टेट कंज्यूमर वेलफेयर फंड में जमा किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही को रोका जा सके।



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