LDC 2013 भर्ती में रिकॉर्ड गायब कर 145 को दी फर्जी जॉइनिंग, जांच रिपोर्ट में बड़े खेल का खुलासा
News In Short
- जयपुर जिला परिषद में रिकॉर्ड गायब कर LDC 2013 में 145 अभ्यर्थियों को दी गई फर्जी नियुक्ति।
- जांच कमेटी ने डीलिंग बाबू और प्रभारी अधिकारियों को माना फर्जी दस्तावेजों के लिए जिम्मेदार।
- एक ही समय में संविदा नौकरी और नियमित डिग्री दिखाने वाले जादूगर अभ्यर्थियों का हुआ पर्दाफाश।
- ACB को आधा दर्जन कार्मिकों के खिलाफ भ्रष्टाचार की धारा 17A में कार्रवाई की अनुमति का इंतजार।
- संदिग्ध 145 नियुक्तियों पर अब गाज गिरना तय, पंचायत समितियों से जुटाया जा रहा रिकॉर्ड।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में कनिष्ठ लिपिक (LDC) भर्ती-2013 में एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जयपुर कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच कमेटी ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में बताया है कि किस तरह नियमों को ताक पर रखकर अयोग्य लोगों को सरकारी कुर्सियों पर बैठा दिया गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि गड़बड़ियों को छिपाने के लिए 6 साल का भर्ती रिकॉर्ड ही गायब कर दिया गया है।
जांच में हुए 8 बड़े खुलासे
जांच कमेटी ने कुल 627 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों को खंगाला, जिनमें से 145 में गंभीर कमियां पाई गईं। गड़बड़ी के मुख्य तरीके इस प्रकार थे:
दोहरी उपस्थिति का जादू: दर्जनों अभ्यर्थियों ने एक ही समय में राजस्थान में संविदा पर नौकरी की और उसी दौरान दूसरे राज्यों से नियमित डिग्री भी हासिल की।
बोनस अंकों की रेवड़ी: बिना किसी पात्रता के अभ्यर्थियों को 10 से 30 बोनस अंक दे दिए गए ताकि वे मेरिट में आ सकें।
अवैध यूनिवर्सिटी का सहारा: मेघालय, सिक्किम और मध्यप्रदेश जैसी उन यूनिवर्सिटीज की डिग्रियां लगाई गईं, जिन्हें सरकार पहले ही अवैध घोषित कर चुकी थी।
कंप्यूटर कोर्स में फर्जीवाड़ा: कई अभ्यर्थियों ने फर्जी RS-CIT कोड का इस्तेमाल किया, जिनका कोई रिकॉर्ड वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) में मौजूद नहीं है।
साजिश के तहत रिकॉर्ड गायब: जांच टीम को 2013 से 2019 तक की कोई भी नोटशीट, रोस्टर या मेरिट लिस्ट नहीं दी गई। आरोप है कि साक्ष्यों को नष्ट करने या छिपाने का प्रयास किया गया।
कोटा उल्लंघन: एक्स-सर्विसमैन, दिव्यांग और आयु सीमा के नियमों का जमकर उल्लंघन किया गया।
संदिग्ध मेडिकल और शपथ पत्र: फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट और बाल विवाह जैसी जानकारियों को छिपाकर नियुक्तियां ली गईं।
इनकी मिलीभगत
तत्कालीन एडीएम (तृतीय) कुंतल विश्नोई की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भर्ती शाखा के डीलिंग बाबू और प्रभारी अधिकारियों की मिलीभगत से यह संभव हुआ।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (धारा 17A) के तहत नितेश टाटीवाल, मुकेश शर्मा, संदीप वर्मा, रुपेंदर सिंह, नरेन्द्र यादव और हरीश वर्मा के खिलाफ ACB ने जांच की अनुमति मांगी गई है, जो फिलहाल विभाग स्तर पर लंबित है।
कहां से कितनी संदिग्ध फाइलें मिलीं?
रिकॉर्ड गायब होने के बावजूद जांच कमेटी ने विभिन्न पंचायत समितियों से कुछ फाइलें जुटाई हैं:
गोविंदगढ़: 51 | कोटपूतली: 37 | शाहपुरा: 35 | सांगानेर: 32 | बस्सी: 30 | आमेर: 21 | दूदू: 20 (अन्य समितियों से भी डेटा मिला है)।
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