राजस्थान में लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्ती, जानकारी छुपाई तो 3 महीने की जेल हो सकती

Saurabh Mishra | Aug 17, 2026, 11:52 IST
लिव-इन पर सरकार सख्त
राजस्थान में समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 कैबिनेट से मंजूर हो चुका है। इसमें बिना सूचना एक महीने से ज्यादा लिव-इन रिलेशनशिप में रहने पर 3 महीने की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान सरकार ने समान नागरिक संहिता विधेयक को तैयार किया है।
  • बीते दिनों UCC विधेयक को कैबिनेट ने मंजूरी दी है।
  • इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन के नियम शामिल किए हैं।
  • बिना सूचना लिव-इन में रहने पर तीन महीने की सजा हो सकती है।
  • यह विधेयक अब मानसून सत्र में राजस्थान विधानसभा में पेश होगा।

राजस्थान सरकार लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर सख्त कानून लाने जा रही। 18 साल से कम उम्र के पार्टनर के साथ रहने पर पॉक्सो का मामला दर्ज होगा। बिना सूचना एक महीने से ज्यादा लिव-इन रिलेशनशिप में रहने पर 3 महीने तक जेल हो सकती।



अनुसूचित जनजाति परिवारों को छोड़कर बाकी सभी धर्मों के परिवारों पर यह कानून लागू होगा। तलाक अब सभी के लिए कोर्ट से ही मान्य होगा। किसी धर्म में दोबारा विवाह से जुड़ी कुरीति हो तो उसे भी रोका जाएगा।



राजस्थान के UCC विधेयक में 400 धाराएं

भजनलाल कैबिनेट से मंजूर ससमान नागरिक संहिता ( UCC ) में करीब 400 धाराएं होंगी। यह विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन से जुड़े कानूनों को कवर करेगा। इससे राज्य में सभी धर्मों के लिए एक समान कानूनी प्रावधान लागू होंगे।



यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप तैयार किया गया। इसका नाम 'द राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक-2026' रखा गया है। अब इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा। संविधान से संरक्षित पारंपरिक अधिकारों वाले वर्गों को इससे बाहर रखा गया।



UCC विधेयक में उत्तराधिकार में बेटा-बेटी को बराबर हक

सिविल नागरिक संहिता विधेयक में बेटा और बेटी को संपत्ति में समान अधिकार दिया गया। बिना वसीयत मौत होने पर संपत्ति हस्तांतरण के लिए तीन श्रेणियां बनाई गई हैं।



पहली श्रेणी में जीवित पति-पत्नी, उनकी संतान और माता-पिता आते हैं। दूसरी श्रेणी में सौतेले माता-पिता, भाई-बहन और दादा-दादी शामिल हैं। तीसरी श्रेणी में बाकी रिश्तेदार आते हैं। अगर किसी श्रेणी में उत्तराधिकारी न मिले तो संपत्ति सरकार के पास चली जाएगी।



UCC के तहत विवाह और तलाक के नए नियम

इस कानून के तहत लड़की की न्यूनतम उम्र 18 साल और लड़के की 21 साल तय की गई है। यह सभी धर्मों पर लागू होगा। बहुविवाह मान्य नहीं होगा और तलाक सिर्फ कोर्ट से ही हो सकेगा।



विवाह या तलाक पंजीकरण का प्रमाण पत्र 15 दिनों के भीतर देना अनिवार्य होगा। आवेदन खारिज होने पर रजिस्ट्रार को कारण बताना होगा। पंजीकरण न कराने पर 10 हजार रुपए तक जुर्माना लग सकता है। नोटिस की अनदेखी करने पर यह जुर्माना 25 हजार रुपए तक हो सकता है।



भरण-पोषण और लिव-इन पर सख्त प्रावधान

सभी धर्मों में भरण-पोषण के नियम एक समान होंगे। बिना सूचना एक महीने से ज्यादा लिव-इन में रहने पर तीन महीने की जेल और 10 हजार रुपए तक जुर्माना हो सकता। गलत सूचना देने पर भी इतनी ही सजा तय की गई है।



नोटिस का जवाब न देने पर 6 महीने की जेल और 25 हजार रुपए तक जुर्माना हो सकता। जबरन सहमति लेने पर 5 साल तक की जेल का प्रावधान है। नाबालिग को शादीशुदा जैसा रखने पर पॉक्सो में केस चलेगा।



राजस्थान UCC


गुजरात की तर्ज पर बना राजस्थान का UCC विधेयक

राजस्थान का 'द राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक-2026' गुजरात के समान नागरिक संहिता विधेयक की तर्ज पर तैयार किया गया है। दोनों राज्यों के विधेयकों को अंतिम रूप देने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई थी।



विधेयक में विवाह पंजीकरण अनिवार्य किया गया और बहुविवाह पर रोक लगाई गई। सभी धर्मों और समुदायों को अपनी परंपराओं के अनुसार विवाह करने की आजादी रहेगी। लेकिन कानून लागू होने के बाद हर विवाह और लिव-इन का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना जरूरी होगा।



FAQ

  1. राजस्थान में UCC विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप पर क्या नया नियम हैं?
    बिना सूचना एक महीने से ज्यादा लिव-इन में रहने पर 3 महीने की जेल हो सकती। 18 साल से कम उम्र के साथी पर पॉक्सो का केस दर्ज होगा।
  2. राजस्थान के समान नागरिक संहिता विधेयक में क्या-क्या शामिल है?
    इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन से जुड़े करीब 400 प्रावधान हैं। यह सभी धर्मों पर एक समान लागू होगा। अनुसूचित जनजाति परिवारों को इससे बाहर रखा गया है।
  3. राजस्थान में UCC विधेयक किस राज्य की तर्ज पर बनाया गया है?
    यह विधेयक गुजरात के समान नागरिक संहिता विधेयक की तर्ज पर तैयार किया गया है। इसे अंतिम रूप रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की समिति ने दिया।

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