50 साल बाद टूटेगा सीटों का फ्रीज, सात VIP लोकसभा सीटों के होंगे टुकड़े
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में 2026 के बाद लोकसभा सीटें 25 से बढ़ाकर 38 करने का प्रस्ताव।
- प्रदेश में 1977 के बाद लोकसभा सीटों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ।
- जयपुर-जोधपुर सहित 6 हाई-प्रोफाइल सीटों के होंगे तीन-तीन टुकड़े।
- SC सीटों को छुए बिना आदिवासी (ST) गढ़ों के विभाजन की भी सिफारिश।
- EAC-PM का गणितीय प्रस्ताव अंतिम नहीं, परिसीमन आयोग लेगा आखिरी फैसला।
राजस्थान की राजनीति में 50 साल बाद लोकसभा सीटों का गणित बदल सकता है। प्रदेश में साल
1977 से लोकसभा सीटों की संख्या 25 बनी हुई हैं। आने वाले समय में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 38 हो सकती है।
इस मामले में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की ताजा स्टडी रिपोर्ट आई है।
इसमें राजस्थान के राजनीतिक भूगोल को नया आकार देने का मॉडल पेश किया गया है। यह केवल सीटों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि प्रदेश के कई हाई-प्रोफाइल सांसदों के सियासी गढ़ों का पुनर्गठन भी है।
आधी सदी बाद बढ़ेगा प्रतिनिधित्व
राजस्थान में आखिरी बार 1977 के लोकसभा चुनाव के दौरान सीटों की संख्या 23 से बढ़ाकर 25 की गई थी। इसके बाद 2001 में संविधान के 84वें संशोधन के तहत देश भर में सीटों की संख्या को साल 2026 तक के लिए फ्रीज कर दिया गया था।
2008 के परिसीमन में सिर्फ सीमाओं में फेरबदल हुआ, सीटें नहीं बढ़ीं। अब जब यह समय सीमा (2026) आ चुकी है। इसमें राजस्थान को उसकी बढ़ती आबादी के अनुपात में संसद में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने का रास्ता साफ होता दिख रहा है।
7 VIP सीटों के होंगे तीन-तीन टुकड़े
इस नए प्रस्ताव के कारण सबसे बड़ा बदलाव 7 मौजूदा लोकसभा क्षेत्रों में होगा। प्रस्ताव में इन सीटों को विभाजित करने की सिफारिश की गई है।
इनमें से 6 सीटें ऐसी हैं जिन्हें सीधे तीन हिस्सों में बांटने का सुझाव है। इससे कई दिग्गज नेताओं के पारंपरिक वोट बैंक और समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे।
इन सीटों का होगा विभाजन
सिफारिश में 13 लोकसभा सीट बढ़ाने के लिए मौजूदा सात सीटों को दो व तीन टुकडों में विभाजित करने का सुझाव दिया है।
चूरु लोकसभा को दो और जयपुर, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर, सीकर, उदयपुर व बांसवाड़ा सीटों को तीन—तीन भाग में बांटने का सुझाव दिया है। बाकी 18 सीटों को ज्यों का त्यों रखा जाएगा।
ST सीटों में बदलाव
इस रिपोर्ट में अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित चार सीटों (बीकानेर, श्रीगंगानगर, भरतपुर और करौली-धौलपुर) को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। यानी इन्हें तोड़ने की कोई सिफारिश नहीं है।
इसके विपरीत आदिवासी बहुल (ST) सीटों उदयपुर और बांसवाड़ा को तीन-तीन हिस्सों में तोड़ने का सुझाव है। परिसीमन लागू होने के बाद आबादी के नए गणित के हिसाब से राज्य में SC और ST दोनों ही वर्गों की आरक्षित सीटों की कुल संख्या में इजाफा होना तय है।
FAQ
- राजस्थान में लोकसभा सीटें कब से 25 हैं?
राजस्थान में 1977 के बाद से लोकसभा सीटों की संख्या 25 है। 2001 में संविधान के 84वें संशोधन के तहत सीटों की संख्या को 2026 तक फ्रीज कर दिया गया था।
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