जयपुर में UCC के विरोध में मुस्लिम समाज का प्रदर्शन, पुलिस ने विधानसभा कूच रोका
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर में UCC के विरोध में मुस्लिम समाज सड़कों पर उतरा।
- विधानसभा कूच से पहले ही पुलिस ने रोका जुलूस।
- राजस्थान सरकार से UCC लागू न करने की मांग उठी।
- जस्टिस रंजना देसाई की अगुआई में बना है UCC मसौदा।
- मंच ने मांगा संविधान के अनुच्छेदों का हवाला देकर संवाद।
राजस्थान में प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) को लेकर मुस्लिम समाज ने विरोध किया। शुक्रवार को जयपुर के मोती डूंगरी रोड स्थित मुसाफिर खाने में बड़ी सभा हुई। वक्ताओं ने सरकार से यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू न करने की मांग की। विरोध में विधानसभा कूच की कोशिश हुई, जिसे पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया। बाद में राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
मुसाफिर खाने में UCC के विरोध में बड़ी सभा
UCC के विरोध में हुई सभा में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष शामिल हुए। वक्ताओं ने यूसीसी को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं। उन्होंने राजस्थान सरकार से यह कानून लागू न करने की मांग की। इस दौरान समुदाय से जुड़े अन्य धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
सभा में सामाजिक, धार्मिक और मानवाधिकार संगठनों के साझा मंच ने प्रस्तावित कानून पर आपत्ति जताई। मंच ने सरकार से UCC पर डिटेल श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। साथ ही कानून बनाने से पहले समुदायों, महिला संगठनों, विधि विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों से व्यापक परामर्श करने को भी कहा गया।
पुलिस ने यूसीसी के खिलाफ विधानसभा कूच रोका
यूसीसी के विरोध में मुस्लिम समाज के लोगों ने विधानसभा तक कूच करने की कोशिश की। हालांकि पुलिस ने उन्हें एमडी रोड पर ही समझाइश के बाद रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
70 साल से चर्चा में है UCC
मंच से वक्ताओं ने कहा कि भारत में समान नागरिक संहिता का मुद्दा पिछले सात दशकों से चर्चा में है। यह संविधान सभा की बहसों से लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और चुनावी घोषणापत्रों तक उठता रहा है। उत्तराखंड ने 2024 में राज्य स्तर पर UCC लागू किया था। इसके बाद गुजरात, असम, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
राजस्थान सरकार ने राज्य स्तरीय UCC का मसौदा तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।
धार्मिक स्वतंत्रता और अधिकारों का सवाल
वक्ताओं ने सभा में कहा कि UCC सिर्फ कानूनी सुधार का मामला नहीं। इसका सीधा संबंध धर्म, संस्कृति, पहचान, महिला अधिकार और संघीय ढांचे से भी है। उनके मुताबिक राजस्थान जैसे बहुधार्मिक राज्य में समान कानून के अलग-अलग समुदायों पर पड़ने वाले असर का गंभीरता से अध्ययन जरूरी।
मंच ने संविधान के अनुच्छेद 44 का हवाला दिया, जिसके तहत राज्य को समान नागरिक संहिता की कोशिश करने का निर्देश है। वहीं मंच ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 25 और 26 नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देते हैं। उनके अनुसार अनुच्छेद 44 नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है, इसलिए इसका क्रियान्वयन मौलिक अधिकारों को प्रभावित करने की कीमत पर नहीं होना चाहिए।
बहुसांस्कृतिक ढांचे पर असर की आशंका
साझा मंच ने आशंका जताई कि अगर अलग-अलग समुदायों को उनकी मौजूदा परंपराओं से अलग किसी वैधानिक व्यवस्था का पालन करने के लिए बाध्य किया गया, तो इससे संवैधानिक अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। मंच का कहना है कि अलग-अलग समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद विविधता भारत की बहुलतावादी संरचना का हिस्सा है। इसलिए किसी भी बदलाव से पहले व्यापक संवाद जरूरी है।
UCC के खिलाफ साझा मंच ने राजस्थान के सामाजिक, धार्मिक और मानवाधिकार संगठनों से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की। मंच ने कहा कि उसका मकसद किसी एक समुदाय का विरोध करना नहीं। मंच के अनुसार यह संविधान, लोकतंत्र और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का मामला है। सभा के दौरान सरकार से मांग की गई कि UCC लागू करने से पहले व्यापक सार्वजनिक विमर्श कराया जाए और राजस्थान में फिलहाल यह कानून लागू न किया जाए।
FAQ
- जयपुर में UCC के विरोध में क्या हुआ?
मुस्लिम समाज ने मोती डूंगरी रोड स्थित मुसाफिर खाने में सभा की। लोगों ने सरकार से UCC लागू न करने की मांग की। बाद में विधानसभा कूच की कोशिश को पुलिस ने रोक दिया। - राजस्थान में UCC का मसौदा किसने तैयार किया है?
राज्य सरकार ने इसके लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई थी। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। - मुस्लिम समाज के विरोध प्रदर्शन का नतीजा क्या निकला?
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को एमडी रोड पर ही समझाइश के बाद रोक दिया। इसके बाद उन्होंने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
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