अब 'कसूरी' नहीं, 'नागौरी' कहिए! नागौर की पान मेथी को मिली पहचान, 500 करोड़ के कारोबार की तैयारी

Ashish Bhardwaj | Mar 14, 2026, 17:56 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में नागौरी पान मेथी को 'कम्युनिटी वैरायटी' का दर्जा मिला है, जिसे पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&FRA) ने प्रदान किया। इस दर्जे से अब नागौरी मेथी के बीज या नाम का गलत इस्तेमाल नहीं होगा।

News In Short

  • राजस्थान में नागौरी पान मेथी को मिला 'कम्युनिटी वैरायटी' का दर्जा।
  • पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&FRA) ने दिया है ये दर्जा।
  • अब नागौरी मेथी के बीज या इसके नाम का नहीं होगा गलत इस्तेमाल।
  • यह दर्जा स्थानीय किसानों को बनाएगा आत्मनिर्भर।
  • जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग (GI Tag) दिलाने की दिशा में सबसे बड़ी जीत।

News In Detail

जागेश्वर प्रसाद @ जयपुर



राजस्थान में नागौर जिले की मिट्टी की सोंधी महक अब पूरी दुनिया में अपनी असली पहचान के साथ बिखरेगी। केंद्र सरकार के पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&FRA) ने नागौरी पान मेथी को 'कम्युनिटी वैरायटी' (सामुदायिक किस्म) के रूप में पंजीकृत कर लिया है। यह फैसला महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब तक जो मेथी 'कसूरी' के नाम से बेची जा रही थी, उसे अब 'नागौरी पान मेथी' के नाम से ही पहचान और कानूनी सुरक्षा मिलेगी।



क्यों खास है यह रजिस्ट्रेशन

नाम पर कानूनी हक: अब कोई भी बाहरी कंपनी नागौरी मेथी के बीज या इसके नाम का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगी।



GI टैग की ओर कदम: विशेषज्ञों का मानना है कि यह पंजीकरण भविष्य में इस मेथी को 'जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग' (GI Tag) दिलाने की दिशा में सबसे बड़ी जीत है।



किसानों को मिलेगा लाभ: अब तक बिचौलिए और कंपनियां इसे 'कसूरी' ब्रांड के तहत बेचकर मुनाफा कमाते थे, लेकिन अब इसका सीधा ब्रांडिंग लाभ नागौर के स्थानीय किसानों को मिलेगा।



सिर्फ 70 वर्ग किमी का है 'जादुई' घेरा

नागौरी पान मेथी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसका उत्पादन नागौर के एक विशेष 70 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में ही संभव है। यहां की जलवायु और मिट्टी में कुछ ऐसी खासियतें हैं जो इसे दुनिया में सबसे अलग बनाती हैं:



मिट्टी का रसायन: यहां की दोमट मिट्टी में सल्फर और पोटेशियम की प्रचुरता है, जो पत्तियों में एक खास सुगंध (Volatile Compounds) पैदा करती है।



कुदरती संतुलन: हल्की भुरभुरी मिट्टी पानी को इस तरह सोखती है कि जड़ें गहराई तक जाती हैं और आवश्यक खनिजों का अवशोषण करती हैं, जिससे इसका स्वाद और खुशबू अन्य किसी भी मेथी से कहीं ज्यादा तेज होती है।



खेतों में उग रहा है 'हरा सोना'

आंकड़ों पर गौर करें तो नागौरी मेथी किसी 'खजाने' से कम नहीं है:



बंपर कमाई: एक सीजन में करीब 10 बार पत्तियों की कटिंग की जा सकती है, जिससे किसान प्रति एकड़ 2.5 लाख रुपये तक की आय प्राप्त कर रहे हैं।



करोड़ों का टर्नओवर: वर्ष 2024-25 में नागौर के किसानों ने करीब 450 करोड़ रुपये की मेथी बेची है।



एक्सपोर्ट हब: आने वाले समय में इसका निर्यात बढ़कर 500 करोड़ रुपये के पार जाने का अनुमान है।



अक्टूबर की जाती है बुवाई

नागौर का शुष्क वातावरण और रबी के मौसम की सर्द रातें इस फसल के लिए वरदान साबित होती हैं। अक्टूबर में बुवाई के बाद जो फसल तैयार होती है, उसकी मांग अब अंतरराष्ट्रीय मसाला बाजारों में भी तेजी से बढ़ रही है।



हो सकता है संजीवनी साबित

नागौर की पान मेथी को ‘कम्युनिटी वैरायटी’ का दर्जा राजस्थान की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी जैसा साबित हो सकता है। इससे इस पारंपरिक फसल की पहचान मजबूत होगी और स्थानीय किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। साथ ही इससे किसानों की आय बढ़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में भी मदद मिलेगी।



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