समान नाम पर 'नकली' कलेक्टर बना, गांव वालों ने कंधों पर जुलूस निकाला, फिर एक QR कोड ने बिगाड़ा सारा खेल

Ashish Bhardwaj | Mar 18, 2026, 15:30 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के निशांत कुमार ने यूपीएससी में 899वीं रैंक का दावा किया। इस पर गांव में जश्न का माहौल रहा, लेकिन एडमिट कार्ड का QR कोड स्कैन होते ही उसका यह दावा नकली निकला। अब उस पर कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

News In Short

  • राजस्थान के युवक निशांत कुमार ने खुद को बताया सिविल सेवा परीक्षा में चयनित।
  • ग्रामीणों ने कंधों पर बिठाया, मालाओं से लाद दिया और निकाला विजय जुलूस।
  • पूर्व मंत्री शकुन्तला रावत समेत कई बड़े नेता और अधिकारी पहुंचे बधाई देने।
  • एडमिट कार्ड पर मौजूद QR कोड स्कैन किया तो दावा पाया गया फर्जी।
  • स्कैन में आगरा के निशांत का नाम निकला, जिसकी 899वीं रैंक आई।

News In Detail

सुनील जैन@अलवर



कहते हैं कि झूठ के पांव नहीं होते। ऐसा ही राजस्थान में बानसूर के नांगल भाव सिंह के साथ हुआ। उसने यूपीएससी के सिविल सेवा परीक्षा 2025 में खुद को चयनित होने का दावा कर अपनी 899वीं रैंक बताई। इस पर न केवल उसका परिवार फूला ना समाया, बल्कि पूर्व मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी जमकर बधाई दी। जैसे ही उसके एडमिट कार्ड का QR कोड स्कैन हुआ, 'कलेक्टर साहब' की पोल पट्टी खुल गई। असली उम्मीदवार आगरा का निशांत पाया गया, जिनकी 899वीं रैंक है।



जश्न ऐसा कि लगा वाकई 'कलेक्टर' बन गया

6 मार्च को जब UPSC का रिजल्ट आया, तो निशांत ने दावा किया कि उसने 899वीं रैंक हासिल की है। फिर क्या था, ग्रामीणों ने निशांत को कंधों पर बिठा लिया, मालाओं से लाद दिया और पूरे गांव में ढोल-नगाड़ों के साथ विजय जुलूस निकाला। पूर्व मंत्री शकुन्तला रावत समेत कई बड़े नेता और अधिकारी उसके घर बधाई देने पहुंच गए। निशांत ने मंच से अपने 'फर्जी संघर्ष' की ऐसी कहानी सुनाई कि सुनने वालों की आंखें भर आईं।



हमनाम उम्मीदवार का लिया सहारा

निशांत ने जालसाजी बड़ी सफाई से की थी। उसने आगरा के एक असली उम्मीदवार (जिसका नाम भी निशांत था और रैंक 899 थी) के एडमिट कार्ड में छेड़छाड़ कर उसे अपना बता दिया। उसने सबको यकीन दिलाया कि उसने बिना किसी बड़े संसाधन के, सिर्फ यूट्यूब और ऑनलाइन पढ़ाई से यह मुकाम पाया है।



एक स्कैन और 'कलेक्टर साहब' ढेर

निशांत की असलियत तब सामने आई, जब किसी ने उसके एडमिट कार्ड पर मौजूद QR कोड को स्कैन कर लिया। स्कैन करते ही स्क्रीन पर आगरा के असली उम्मीदवार का डेटा आ गया। जांच में पता चला कि बानसूर के इस निशांत ने केवल प्रारंभिक परीक्षा दी थी और वह मुख्य परीक्षा की सूची में ही जगह बनाने में असफल रहा।



अब बगले झांक रहे हैं बधाई देने वाले

जैसे ही यह खबर फैली कि निशांत 'फर्जी IAS' है, गांव में सन्नाटा पसर गया। जो नेता और अधिकारी उसके साथ फोटो खिंचवा रहे थे, वे अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। दस्तावेजों में हेराफेरी और धोखाधड़ी के इस मामले में अब निशांत पर कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।



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