ओबीसी आयोग ने सीएम को सौंपी रिपोर्ट, कंप्यूटर से तय होगा आरक्षण
समझें क्या है पूरा मामला
- ओबीसी आयोग ने CM भजनलाल को सौंपी रिपोर्ट।
- निकाय-पंचायत चुनावों का रास्ता हुआ साफ।
- 60 नगरीय निकाय अध्यक्ष पद ओबीसी के लिए प्रस्तावित।
- कंप्यूटर से तय होगा ओबीसी आरक्षण।
- कैबिनेट मंजूरी के बाद तेज होगी चुनाव प्रक्रिया।
राजस्थान में नगरीय निकाय और पंचायती राज चुनावों को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी राजनीतिक आयोग ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंप दी। इस रिपोर्ट के आधार पर अब सरकार ओबीसी आरक्षण को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। कैबिनेट की मुहर लगते ही चुनावी तैयारियां तेज हो जाएंगी।
राज्य निर्वाचन आयोग भी इसके बाद चुनाव कार्यक्रम जारी करने की दिशा में कदम बढ़ाएगा।
60 अध्यक्ष पद ओबीसी के लिए प्रस्तावित
आयोग की सिफारिशों में एक बड़ा आंकड़ा सामने आया है। प्रदेश के 309 नगरीय निकायों में से 60 अध्यक्ष पद ओबीसी के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव है। इसी अनुपात के आधार पर पंचायती राज संस्थाओं में भी ओबीसी आरक्षण लागू किया जाएगा।
यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री आवास पर सौंपी गई। आयोग के अध्यक्ष और पूर्व जिला न्यायाधीश मदन लाल भाटी ने खुद यह रिपोर्ट सीएम को सौंपी। उनके साथ आयोग के सदस्य राजीव सक्सेना, मोहन मोरवाल, गोपाल कृष्ण और पवन मंडाविया भी मौजूद रहे। इस अवसर पर मंत्री मदन दिलावर, झाबर सिंह खर्रा और जोगाराम पटेल भी उपस्थित रहे।
अब सरकार करेगी रिपोर्ट का अध्ययन
रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अगला कदम सरकार का है। सरकार अब रिपोर्ट में शामिल आंकड़ों और आयोग की सिफारिशों का विस्तृत अध्ययन करेगी। इस अध्ययन के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।
स्वायत्त शासन विभाग और पंचायती राज विभाग मिलकर आरक्षण की अंतिम सूची तैयार करेंगे। इसके बाद विभिन्न पदों और सीटों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे चुनाव कराने का रास्ता लगभग साफ हो जाएगा।
इस बार पर्ची नहीं, कंप्यूटर तय करेगा आरक्षण
इस बार आरक्षण तय करने के तरीके में भी बड़ा बदलाव किया गया है। पहले पर्ची निकालकर लॉटरी की प्रक्रिया होती थी। लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा।
पूरी प्रक्रिया अब कंप्यूटर आधारित प्रणाली से पूरी की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे दो बड़े फायदे होंगे। पहला, पारदर्शिता बढ़ेगी। दूसरा, आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पहले से ज्यादा व्यवस्थित होगी।
चुनाव कार्यक्रम पर जल्द हो सकता है फैसला
सरकार ने पहले ही हाई कोर्ट में एक रोडमैप पेश किया था। उस रोडमैप के अनुसार ओबीसी आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया 14 अगस्त तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित कर सकता है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 17 अगस्त के आसपास नगरीय निकाय चुनावों की घोषणा हो सकती है। इसके बाद पंचायत चुनावों की अधिसूचना जारी होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम तारीखें राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होंगी।
हाई कोर्ट की समयसीमा भी अहम
इस पूरी प्रक्रिया के पीछे एक अदालती दबाव भी है। राजस्थान हाई कोर्ट ने राजस्थान सरकारऔर निर्वाचन आयोग को साफ निर्देश दिए हैं। कोर्ट का कहना है कि पंचायत और निकाय चुनाव तय समय सीमा में कराए जाएं।
इसी वजह से ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को चुनाव प्रक्रिया का सबसे अहम चरण माना जा रहा है। अब सभी की नजर दो बड़े फैसलों पर टिकी है। पहला, कैबिनेट का फैसला। दूसरा, राज्य निर्वाचन आयोग की अगली घोषणा। इन्हीं दोनों से प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों का पूरा कार्यक्रम सामने आ सकेगा।
FAQ
- OBC आयोग ने रिपोर्ट किसे सौंपी है?
राज्य OBC राजनीतिक आयोग ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंपी। यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री आवास पर सौंपी गई। - कितने निकाय अध्यक्ष पद OBC के लिए प्रस्तावित हैं?
प्रदेश के 309 नगरीय निकायों में से 60 अध्यक्ष पद OBC के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव है। यही अनुपात पंचायती राज संस्थाओं में भी लागू होगा। - इस बार पंचायत चुनाव में आरक्षण कैसे तय होगा?
इस बार पर्ची निकालकर लॉटरी नहीं होगी। पूरी आरक्षण प्रक्रिया कंप्यूटर आधारित प्रणाली से पूरी की जाएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
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