बॉर्डर की अधिसूचित जमीनों के बिना अनुमति हो रहे सौदे, कोर्ट ने 2006 की रजिस्ट्री को घोषित किया शून्य
News In Short
- राजस्थान में सीमावर्ती क्षेत्र में बिना अनुमति के जमीनों का खरीद-फरोख्त।
- बीकानेर की एक अदालत का ऐसे एक मामले में आया बड़ा फैसला।
- अदालत ने पूगल में 7.58 हेक्टेयर भूमि की रजिस्ट्री को किया निरस्त।
- इस भूमि की खरीद-फरोख्त के लिए नहीं ली गई थी अनुमति।
- अब तक अधिसूचित क्षेत्र में जमीनों की सैकड़ों रजिस्ट्री हो चुकी हैं रद्द।
News In Detail
राजस्थान में बीकानेर की एक अदालत ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने जमीन के खेल में लगे भू-माफियाओं और नियमों को ताक पर रखने वालों की नींद उड़ा दी है। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान से लगते हुए पूगल क्षेत्र में 7.58 हेक्टेयर कृषि भूमि की रजिस्ट्री को 'अवैध और शून्य' (Null and Void) घोषित कर दिया है। इस भूमि का सौदा करीब 18 साल पहले बिना अनुमति के हुआ था।
क्या है पूरा मामला?
यह कानूनी लड़ाई वर्ष 2006 से चली आ रही थी। मामला बीकानेर के पूगल तहसील के गांव करकरी भासियां का है। यहां खसरा नंबर 1275, 1314, 2663/1274 और 1278 की कुल 7.58 हेक्टेयर जमीन को 29 मई 2006 को उप-पंजीयक कार्यालय में रजिस्टर कराया गया था।
सरकार ने इस रजिस्ट्री को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि यह जमीन अधिसूचित सीमा क्षेत्र में आती है। नियमानुसार, बॉर्डर एरिया में किसी भी तरह की जमीन की खरीद-फरोख्त से पहले सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है। इस मामले में ऐसी कोई अनुमति नहीं ली गई थी, जो सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों और कानून का उल्लंघन था।
कानून के विरुद्ध उद्देश्य से हुआ समझौता शून्य
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (संख्या-5) अनुभव सिडाना ने राजस्थान राज्य बनाम दर्शन सिंह के प्रकरण में यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अधिसूचित सीमा क्षेत्र में बिना अनुमति के जमीन की खरीद-फरोख्त करना कानून के विरुद्ध है। ऐसी कोई भी रजिस्ट्री न केवल अवैध है, बल्कि प्रभावहीन भी मानी जाएगी। कानून के विरुद्ध उद्देश्य से किया गया कोई भी समझौता शुरू से ही शून्य होता है। इस टिप्पणी के साथ ही अदालत ने 29 मई 2006 को हुए सेल डीड को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया।
ऐसे सैकड़ों रजिस्ट्री हो चुकी रद्द
मीडिया में खबरें आने के बाद बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर जैसे सीमावर्ती जिलों में प्रशासन ने हरकत में आते हुए सैकड़ों अवैध रजिस्ट्रियां रद्द कर चुका है। रद्द की गई रजिस्ट्रियों के खिलाफ कुछ लोग सिविल न्यायालय पहुंचे थे। अब कोर्ट के ताजा फैसले ने सरकार और प्रशासन के उस कदम पर अंतिम मुहर लगा दी है।
सुरक्षा के लिहाज से क्यों अहम है यह फैसला?
भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे राजस्थान के इलाकों में जमीन की खरीद-फरोख्त सिर्फ एक संपत्ति का सौदा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय भी है। बिना जांच-पड़ताल और अनुमति के सीमावर्ती क्षेत्रों में जमीन का मालिकाना हक बदलना संवेदनशील जानकारी और घुसपैठ जैसी गतिविधियों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
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