राजस्थान की चिट्ठी: पंचायत चुनाव का घमासान, टाइगर श्रॉफ के शूटर्स गिरफ्तार; बेटियों ने बढ़ाया देश का मान
Saurabh Mishra | Oct 24, 2026, 18:18 IST
राजस्थान की चिट्ठी
राजस्थान में इस हफ्ते गांवों की सरकार चुनने की शुरुआत हुई, तो एक एफआईआर के लिए कांग्रेस ने कमिश्नर कार्यालय के बाहर धरना दिया। भ्रष्टाचार के मामलों में 27 अफसर घिरे, मुंबई के शूटर्स कोटा में पकड़े गए और बीकानेर हाउस की तस्वीरों पर सियासत गरमाई। 'राजस्थान की चिठ्ठी'में पढ़िए सत्ता के दांव-पेच, पूर्व मंत्री जोशी की जेल से वापसी, देश का मान बढ़ाने वाली राजस्थान की बेटियों की कहानी।
राजस्थान में इस हफ्ते गांवों की सरकार चुनने का सिलसिला शुरू हुआ, तो जयपुर में एक एफआईआर के लिए कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने दो रातें सड़क पर गुजार दीं। उधर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भ्रष्टाचार के मामलों में 27 अफसरों पर मुकदमे का रास्ता खोला, तो एक्टर टाइगर श्रॉफ के गोलीकांड के आरोपी कोटा में धरे गए। दिल्ली के बीकानेर हाउस में प्रियंका गांधी के बेटे की प्रदर्शनी पर सियासी बवाल मचा, तो जेल से बाहर आए पूर्व मंत्री महेश जोशी ने सरकार से हिसाब मांग लिया।
इन सबके बीच राजस्थान की बेटियों ने जापान में गोल्ड-सिल्वर जीतकर देश का मान बढ़ाया। तो आइए, इस हफ्ते की चिट्ठी में जानते हैं कहां किसकी मुश्किल बढ़ी, किसने सियासी दांव चला और किसने कमाल कर दिखाया। सबसे पहले शुरुआत राजस्थान में पंचायती राज चुनाव की खबर से।
राजस्थान में इस हफ्ते गांवों की सरकार चुनने का सिलसिला शुरू हो गया। 22 अक्टूबर को पहले फेज में 16 जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए वोटिंग हुई। करीब 63 फीसदी मतदान हुआ। कहीं वोट डालने के लिए कतारें लगीं, तो कहीं आरक्षण और परिसीमन की नाराजगी भी खुलकर देखने को मिली। अब 24 अक्टूबर को इन्हीं जिलों की 3 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में पंच-सरपंच चुने जाएंगे। वोटिंग के बाद गिनती होगी और नतीजे भी उसी दिन आएंगे।
अगले फेज में जिला परिषद और पंचायत समिति के लिए 28 अक्टूबर, 3 और 14 नवंबर को वोट डाल जाएंगे, जबकि पंच-सरपंच के लिए 30 अक्टूबर, 5 और 16 नवंबर को वोटिंग होगी। जिला परिषद और पंचायत समिति के नतीजे 20 नवंबर को आएंगे। यानी गांवों में अभी कई दिन तक जोड़-तोड़ और वोटों का हिसाब-किताब चलता रहेगा।
मरुधरा के गांवों में सरकार चुनने की हलचल थी, तो जयपुर में कांग्रेस एक एफआईआर के लिए पुलिस से उलझी रही। मामला एनएसयूआई नेता रितु बराला से जुड़ा था, जिन्होंने 13 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मियों पर मारपीट का आरोप लगाया था। जयपुर में जीरो एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो 19 अक्टूबर की शाम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली समेत कांग्रेस नेता पुलिस कमिश्नरेट में धरने पर बैठ गए। दिग्गजों के लिए ऐसा करना इसलिए भी जरूरी था क्योंकि हुक्म सीधे राहुल गांधी का था।
आधी रात को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी रितु बराला को समर्थन देने कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। पीसीसी चीफ समेत दिग्गज कांग्रेस नेताओं की दो रातें वहीं गुजरीं और करीब 43 घंटे तक धरना चला। आखिरकार पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने लिखकर दे दिया कि दिल्ली में इसी मामले की जांच चल रही, इसलिए जयपुर में अलग एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती। इसके बाद 21 अक्टूबर को धरना खत्म हुआ। अब कांग्रेस ने पुलिस के इस फैसले को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। यानी कमिश्नरेट से धरना उठा है, लेकिन एफआईआर की लड़ाई तो अभी बाकी है।
जयपुर में एफआईआर (FIR) को लेकर कांग्रेस का धरना खत्म हुआ, तो मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भ्रष्टाचार के मामलों में कड़े तेवर दिखा दिए। आमतौर पर शांत नजर आने वाले मुख्यमंत्री ने 23 अक्टूबर को 21 मामलों में 27 अफसरों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी। इनमें जमीनों के खेल में फंसे दो एसडीएम, आय से ज्यादा संपत्ति के आरोपों से घिरे एक तत्कालीन डीएसपी, लेखा सेवा के एक अधिकारी और एक विकास अधिकारी शामिल हैं।
कृषि विभाग के 5, पीडब्ल्यूडी के 3 और वाणिज्यिक कर विभाग के दो मामलों में भी कार्रवाई का रास्ता खुला है। सरकार इसे भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस बता रही, लेकिन कहानी में पेच यह है कि जिन 27 अफसरों पर शिकंजा कसा, उनके नाम, जिले और कथित घोटाले की रकम अब भी पर्दे में हैं। किस पर गाज गिरी और किसे राहत मिली, इसका पूरा हिसाब सामने नहीं आया। अब देखना है कि शांत मिजाज
CM भजनलाल के ये कड़े तेवर आगे भी कायम रहते हैं या कार्रवाई का शोर मंजूरी की फाइलों तक ही सिमट जाता।
इस हफ्ते मुंबई के हाईप्रोफाइल गोलीकांड का राजस्थान कनेक्शन भी खूब चर्चा में रहा। 18 अक्टूबर की शाम बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलियां चलीं, तो अगले ही दिन तीन आरोपी कोटा रेलवे स्टेशन पर धरे गए। दो आईपीएस अधिकारियों के तालमेल के दम पर आरोपी दबोचे गए। मुंबई क्राइम ब्रांच के DCP राज तिलक रोशन ने अपनी बैचमेट और कोटा एसपी तेजस्वनी गौतम को फोन घुमाया। फिर क्या था, पुणे-जयपुर एक्सप्रेस के कोटा रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही पुलिस ने महज 15 मिनट में शूटर्स को ट्रेन के जनरल कोच से दबोच लिया।
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी जयपुर से दिल्ली और फिर नेपाल भागने की फिराक में थे। जांच में सलमान खान, आमिर खान और रणवीर सिंह के घरों की रेकी की बात भी सामने आई। मुंबई पुलिस तीनों को अपने साथ ले गई, जहां अदालत ने 31 अक्टूबर तक शूटर्स को पुलिस हिरासत में भेज दिया।
राजस्थान की सियासत इस हफ्ते दिल्ली के बीकानेर हाउस भी पहुंच गई। हुआ यूं कि प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी शुरू होने से कुछ घंटे पहले 105 में से 74 तस्वीरें हटवा दी गईं। इनमें दिल्ली में हुए छात्र और युवा आंदोलनों से जुड़ी फोटो भी थी। तिरंगे वाली तस्वीरों पर भी आपत्ति उठी। रेहान का आरोप है कि तस्वीरें नहीं हटाने पर प्रदर्शनी रद्द करने की चेतावनी दी गई थी। प्रियंका गांधी भड़क गईं। उन्होंने कहा कि आज मेरे बेटे के साथ हुआ, कल किसी दूसरे कलाकार के साथ होगा।
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने इसे सेंसरशिप और लोकतंत्र पर हमला बताया। उधर, राजस्थान सरकार के अधीन बीकानेर हाउस प्रबंधन की सफाई आई कि तस्वीरें उसकी नीति के खिलाफ थीं। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें राजनीतिक संदेश था, जबकि यहां कला, संस्कृति और वन्यजीवों से जुड़ी प्रदर्शनियां ही दिखाई जाती हैं। अब सवाल यही है कि तस्वीरों पर आपत्ति थी, तो प्रदर्शनी शुरू होने से चंद घंटे पहले ही क्यों जताई गई? तस्वीरें हटीं, लेकिन सियासी बवाल खड़ा हो गया।
सियासी खींचतान और अपराध की खबरों के बीच, इस हफ्ते राजस्थान की दो बेटियों ने देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। जापान के नागोया में एशियन पैरा गेम्स में सीकर की मोना अग्रवाल और जयपुर की अवनी लेखरा ने एक ही मुकाबले में गोल्ड और सिल्वर पर निशाना साधा। महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल SH1 स्पर्धा में मोना ने 250 अंक के साथ गोल्ड जीता, तो अवनी ने 249.6 अंक लेकर सिल्वर अपने नाम किया। दोनों के बीच महज 0.4 अंक का फासला रहा।
मुकाबला आखिरी शॉट तक रोमांचक बना रहा और मोना ने नया रिकॉर्ड भी कायम किया। मोना अग्रवाल ने 23 अक्टूबर को महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन SH1 स्पर्धा में भी गोल्ड जीता। इस तरह उन्होंने दो गोल्ड मेडल अपने नाम किए।खास बात यह रही कि पोडियम पर पहले दो स्थानों पर राजस्थान की बेटियां थीं। यानी जापान की धरती पर निशाना दो बेटियों ने साधा और गर्व पूरे देश को हुआ।
राजस्थान की सियासत में इस हफ्ते पूर्व पीएचईडी मंत्री महेश जोशी की भी वापसी हुई। जल जीवन मिशन के कथित घोटाले में करीब पांच महीने जेल काटने के बाद 17 अक्टूबर को जोशी बाहर आए। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलते ही उनके तेवर भी बदले नजर आए। उन्होंने सलाखों से बाहर निकलते ही कहा कि मैं पहले भी निर्दोष था, आज भी हूं। साथ ही भजनलाल सरकार से जल जीवन मिशन पर श्वेतपत्र मांग लिया। उन्होंने कहा कि जनता को बताया जाए, किस सरकार में कितना काम हुआ और किन अफसरों की क्या जिम्मेदारी थी।
उधर, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मंत्री जोशी को जमानत देते हुए कहा कि बिना मुकदमा चलाए लंबे समय तक जेल में रखना सजा नहीं बन सकता। कोर्ट ने यह भी देखा कि मामले में 22 आरोपी, 124 गवाह और करीब 20 हजार पन्नों के दस्तावेज हैं, लेकिन सुनवाई अभी शुरू नहीं हुई। जोशी को पासपोर्ट जमा कराने और जांच में सहयोग करने की शर्त पर राहत मिली है। यानी जेल के दरवाजे तो खुल गए, लेकिन घोटाले की कानूनी लड़ाई अभी बाकी है।
राजस्थान के डीग से इस हफ्ते ऐसी खबर आई, जिसने रिश्तों को शर्मसार कर दिया। जनूथर के बड़ेसरा गांव में 20 अक्टूबर को 13 साल के जुड़वां भाइयों विनय और विष्णु के शव मिले। पुलिस जांच में जो खुलासा हुआ, उसने सबको हिलाकर रख दिया। आरोप है कि बच्चों की अपनी मां प्रीति ने प्रेमी राजेश के साथ मिलकर दोनों की हत्या की साजिश रची। वजह थी प्रेम संबंध खुलने का डर।
बच्चों के गले पर कुल्हाड़ी से वार किए गए और शव घर के पास चारे के ढेर में छिपा दिए गए। मां के बदले बर्ताव से पुलिस को शक हुआ। फिर मोबाइल चैट, घर में मिले खून के निशान और कुएं से बरामद कपड़ों ने राज खोल दिया। पुलिस ने प्रीति और राजेश को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों के खिलाफ जांच जारी है, जिस मां के आंचल में बच्चे खुद को सबसे सुरक्षित समझते हैं, उसी पर उनकी जान लेने का आरोप है। इस वारदात ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया।
तो फिलहाल राजस्थान की चिट्ठी में इतना ही। गांवों में सरकार बनाने की कवायद जारी है, तो जयपुर में एफआईआर से लेकर भ्रष्टाचार की फाइलों तक कई सवालों के जवाब बाकी हैं। इस बीच राजस्थान की बेटियों ने खुश होने का मौका भी दिया। अगले हफ्ते फिर मिलेंगे, राजस्थान की सियासत के नए किस्सों, पर्दे के पीछे की हलचल और कुछ अनकही कहानियों के साथ। तब तक के लिए नमस्कार।
इन सबके बीच राजस्थान की बेटियों ने जापान में गोल्ड-सिल्वर जीतकर देश का मान बढ़ाया। तो आइए, इस हफ्ते की चिट्ठी में जानते हैं कहां किसकी मुश्किल बढ़ी, किसने सियासी दांव चला और किसने कमाल कर दिखाया। सबसे पहले शुरुआत राजस्थान में पंचायती राज चुनाव की खबर से।
गांवों में चुनावी बिसात, अब किसके हाथ आएगी पंचायत?
अगले फेज में जिला परिषद और पंचायत समिति के लिए 28 अक्टूबर, 3 और 14 नवंबर को वोट डाल जाएंगे, जबकि पंच-सरपंच के लिए 30 अक्टूबर, 5 और 16 नवंबर को वोटिंग होगी। जिला परिषद और पंचायत समिति के नतीजे 20 नवंबर को आएंगे। यानी गांवों में अभी कई दिन तक जोड़-तोड़ और वोटों का हिसाब-किताब चलता रहेगा।
एफआईआर पर अड़ी कांग्रेस, 43 घंटे चला सियासी संग्राम
आधी रात को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी रितु बराला को समर्थन देने कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। पीसीसी चीफ समेत दिग्गज कांग्रेस नेताओं की दो रातें वहीं गुजरीं और करीब 43 घंटे तक धरना चला। आखिरकार पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने लिखकर दे दिया कि दिल्ली में इसी मामले की जांच चल रही, इसलिए जयपुर में अलग एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती। इसके बाद 21 अक्टूबर को धरना खत्म हुआ। अब कांग्रेस ने पुलिस के इस फैसले को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। यानी कमिश्नरेट से धरना उठा है, लेकिन एफआईआर की लड़ाई तो अभी बाकी है।
भ्रष्टाचार पर सीएम भजनलाल के कड़े तेवर, 27 अफसर घेरे में, नामों पर पर्दे का फेर
कृषि विभाग के 5, पीडब्ल्यूडी के 3 और वाणिज्यिक कर विभाग के दो मामलों में भी कार्रवाई का रास्ता खुला है। सरकार इसे भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस बता रही, लेकिन कहानी में पेच यह है कि जिन 27 अफसरों पर शिकंजा कसा, उनके नाम, जिले और कथित घोटाले की रकम अब भी पर्दे में हैं। किस पर गाज गिरी और किसे राहत मिली, इसका पूरा हिसाब सामने नहीं आया। अब देखना है कि शांत मिजाज
CM भजनलाल के ये कड़े तेवर आगे भी कायम रहते हैं या कार्रवाई का शोर मंजूरी की फाइलों तक ही सिमट जाता।
दो IPS की जुगलबंदी से टाइगर श्रॉफ के शूटर्स की नाकाबंदी
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी जयपुर से दिल्ली और फिर नेपाल भागने की फिराक में थे। जांच में सलमान खान, आमिर खान और रणवीर सिंह के घरों की रेकी की बात भी सामने आई। मुंबई पुलिस तीनों को अपने साथ ले गई, जहां अदालत ने 31 अक्टूबर तक शूटर्स को पुलिस हिरासत में भेज दिया।
बीकानेर हाउस में तस्वीरों पर तकरार, प्रियंका-गहलोत का पलटवार
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने इसे सेंसरशिप और लोकतंत्र पर हमला बताया। उधर, राजस्थान सरकार के अधीन बीकानेर हाउस प्रबंधन की सफाई आई कि तस्वीरें उसकी नीति के खिलाफ थीं। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें राजनीतिक संदेश था, जबकि यहां कला, संस्कृति और वन्यजीवों से जुड़ी प्रदर्शनियां ही दिखाई जाती हैं। अब सवाल यही है कि तस्वीरों पर आपत्ति थी, तो प्रदर्शनी शुरू होने से चंद घंटे पहले ही क्यों जताई गई? तस्वीरें हटीं, लेकिन सियासी बवाल खड़ा हो गया।
राजस्थान की बेटियों का सटीक निशाना, बढ़ाया देश का मान
मुकाबला आखिरी शॉट तक रोमांचक बना रहा और मोना ने नया रिकॉर्ड भी कायम किया। मोना अग्रवाल ने 23 अक्टूबर को महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन SH1 स्पर्धा में भी गोल्ड जीता। इस तरह उन्होंने दो गोल्ड मेडल अपने नाम किए।खास बात यह रही कि पोडियम पर पहले दो स्थानों पर राजस्थान की बेटियां थीं। यानी जापान की धरती पर निशाना दो बेटियों ने साधा और गर्व पूरे देश को हुआ।
जेल से निकले पूर्व मंत्री जोशी, अब सरकार से हिसाब मांगने की ठानी
उधर, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मंत्री जोशी को जमानत देते हुए कहा कि बिना मुकदमा चलाए लंबे समय तक जेल में रखना सजा नहीं बन सकता। कोर्ट ने यह भी देखा कि मामले में 22 आरोपी, 124 गवाह और करीब 20 हजार पन्नों के दस्तावेज हैं, लेकिन सुनवाई अभी शुरू नहीं हुई। जोशी को पासपोर्ट जमा कराने और जांच में सहयोग करने की शर्त पर राहत मिली है। यानी जेल के दरवाजे तो खुल गए, लेकिन घोटाले की कानूनी लड़ाई अभी बाकी है।
डीग में रिश्ते शर्मसार, जुड़वां बेटों की हत्या में मां और प्रेमी गिरफ्तार
बच्चों के गले पर कुल्हाड़ी से वार किए गए और शव घर के पास चारे के ढेर में छिपा दिए गए। मां के बदले बर्ताव से पुलिस को शक हुआ। फिर मोबाइल चैट, घर में मिले खून के निशान और कुएं से बरामद कपड़ों ने राज खोल दिया। पुलिस ने प्रीति और राजेश को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों के खिलाफ जांच जारी है, जिस मां के आंचल में बच्चे खुद को सबसे सुरक्षित समझते हैं, उसी पर उनकी जान लेने का आरोप है। इस वारदात ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया।
तो फिलहाल राजस्थान की चिट्ठी में इतना ही। गांवों में सरकार बनाने की कवायद जारी है, तो जयपुर में एफआईआर से लेकर भ्रष्टाचार की फाइलों तक कई सवालों के जवाब बाकी हैं। इस बीच राजस्थान की बेटियों ने खुश होने का मौका भी दिया। अगले हफ्ते फिर मिलेंगे, राजस्थान की सियासत के नए किस्सों, पर्दे के पीछे की हलचल और कुछ अनकही कहानियों के साथ। तब तक के लिए नमस्कार।
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