क्या राजस्थान पुलिस का डेटा हैकर्स के पास पहुंचा? 86 लाख ईमेल और 59 हजार मोबाइल नंबर होने का दावा
Ashish Bhardwaj | Oct 23, 2026, 14:26 IST
क्या राजस्थान पुलिस का डेटा हैक हो गया
राजस्थान पुलिस के डेटा की साइबर सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। Scarlettgroup नाम के एक साइबर अटैकर्स ग्रुप ने दावा किया है कि उसके पास राजस्थान पुलिस और सरकारी विभागों से जुड़ा डेटा है। ग्रुप ने अपने दावे के समर्थन में FIR और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के नमूने साझा करने की बात भी कही है। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
5,926 मेलबॉक्स और 86.3 लाख ईमेल हैक होने का दावा
दावे में 22,686 अटैचमेंट का भी जिक्र है, जिनका कुल आकार करीब 6.63 GB बताया गया है। कथित डेटा में FIR, ई-केवाईसी (eKYC), गवाहों के बयान और सरकारी ईमेल से जुड़े दस्तावेज शामिल होने की बात कही गई है। हालांकि, इनमें कितने रिकॉर्ड असली हैं, कितने पुराने हैं और कितने एक ही व्यक्ति से जुड़े हैं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
वरिष्ठ अधिकारियों के ईमेल और VPN भी निशाने पर
यदि ये जानकारियां असली हैं, तो मामला सिर्फ ईमेल लीक तक सीमित नहीं रहेगा। लॉगिन जानकारी का दुरुपयोग कर सरकारी खातों या नेटवर्क तक अनधिकृत पहुंच बनाने की कोशिश की जा सकती है। लेकिन अभी यह साबित नहीं हुआ है कि इन क्रेडेंशियल के जरिए किसी सरकारी सिस्टम में प्रवेश किया गया या नहीं।
पुलिसकर्मियों को पासवर्ड बदलने की सलाह
सरकारी ईमेल के इस्तेमाल पर प्रतिबंध
पुलिस मुख्यालय ने FIR, केस डायरी, गवाहों के बयान, बैंक विवरण और जांच रिपोर्ट जैसे दस्तावेजों तक पहुंच अधिकृत कर्मचारियों तक सीमित रखने पर भी जोर दिया है। ऐसे दस्तावेजों को बिना अनुमति डाउनलोड करने या निजी ईमेल पर भेजने पर रोक लगाई गई है।
फर्जी ईमेल और ठगी का खतरा
यदि किसी पुलिसकर्मी के लॉगिन क्रेडेंशियल भी बाहर गए हैं, तो उसके खाते में मौजूद दस्तावेजों तक पहुंचने की कोशिश हो सकती है। कमजोर पासवर्ड या एक ही पासवर्ड का कई जगह इस्तेमाल खतरा बढ़ा सकता है। हालांकि, अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि कथित डेटा में कितने आम नागरिकों, पुलिसकर्मियों या सरकारी अधिकारियों की जानकारी है।
रैनसमवेयर जैसे हमलों में अपराधी डेटा चुराकर सार्वजनिक करने की धमकी भी दे सकते हैं। लेकिन राजस्थान पुलिस के इस मामले में सिस्टम लॉक किए जाने, फिरौती मांगे जाने या किसी सेवा के ठप होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है।
CERT-In को सूचना, जांच से खुलेगा राज
Scarlettgroup से कथित संपर्क और 100 से 200 डॉलर में समझौते की कोशिश की जानकारी भी सामने आई है, लेकिन इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। फिलहाल जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि हैकर्स के पास वास्तविक सरकारी डेटा है या वे दबाव बनाने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर दावा कर रहे हैं। असली स्थिति तकनीकी जांच और डिजिटल साक्ष्यों से ही सामने आएगी।
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