राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर होमवर्क पूरा, इंतजार होगा खत्म
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में भाजपा सरकार बनने के ढाई साल बाद खाली पड़े बोर्ड और निगमों में नियुक्तियों की तैयारी तेज।
- राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का बयान,सूचियां तैयार,अब मुख्यमंत्री स्तर पर घोषणा होना बाकी।
- आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए सामाजिक और सांगठनिक संतुलन साधने पर जोर।
- महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग और लोकायुक्त जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों में बड़े पदों पर नियुक्ति का इंतजार।
राजस्थान में दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद से ही राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार हो रहा है। हालांकि कुछ राजनीतिक नियुक्तियां हुई भी हैं। लेकिन,अधिकांश होना बाकी हैं।
प्रदेश के भाजपा नेताओं और कार्यकर्ता बेसब्री से इन नियुक्तियों को इंतजार कर रहे हैं। प्रदेश भाजपा ने इन नियुक्तियों के संबंध में होमवर्क पूरा कर लिया है। संभावित दावेदारों की लिस्ट भी तैयार कर ली है।
हाल ही में आरपीएससी (RPSC) और राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में नियुक्तियां की गई थीं। अब अन्य बोर्ड, आयोग, निगम और अकादमियों में पद पाने के लिए दावेदारों की सक्रियता अचानक बढ़ गई है।
राज्य में इसी साल पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव होने वाले हैं। इसे देखते हुए सरकार और संगठन दोनों स्तर पर राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की जा रही है।
पिछले दिनों भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दिल्ली दौरों को भी इसी संदर्भ में जोड़ कर देखा गया। करीब 11 महीने बाद नियुक्तियों की शुरू हुई इस कवायद ने नेताओं की जयपुर से दिल्ली तक दौड़ बढ़ा दी है।
ढाई साल से पेंडिंग पड़ी नियुक्तियों को लेकर भले कांग्रेस साल उठा रही हो लेकिन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने साफ कर दिया कि संगठन के स्तर पर सूचियां तैयार कर ली गई है। अब मुख्यमंत्री को घोषणा करनी बाकी है जो कभी भी हो सकती है।
सामाजिक संतुलन पर जोर
राजस्थान की राजनीति में बोर्ड और निगम केवल प्रशासनिक संस्थाएं नहीं रहे हैं। बल्कि ये हमेशा से ही सांगठनिक संतुलन और कार्यकर्ताओं को प्रतिनिधित्व देने का बड़ा माध्यम रहे हैं।
जिन नेताओं को विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिल पाया या जिन्हें संगठन में जगह नहीं मिली, उन्हें इन नियुक्तियों के जरिए एडजेस्ट किया जाता है।
इनमें हो चुकी हैं नियुक्तियां
भजनलाल सरकार ने अब तक राजस्थान धरोहर संरक्षण प्राधिकरण, किसान आयोग, जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड, सैनिक कल्याण सलाहकार समिति, अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास आयोग, देवनारायण बोर्ड, श्रीयादे माटी कला बोर्ड, विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड और राज्य वित्त आयोग जैसे प्रमुख संस्थानों में नियुक्तियां कर दी हैं।
कई महत्वपूर्ण पद अब भी खाली
राज्य में अभी भी कई आयोग और संस्थानों के शीर्ष पद रिक्त हैं। इनमें लोकायुक्त सहित कई महत्वपूर्ण संस्थाएं शामिल हैं। नियुक्तियों में देरी को लेकर कुछ साल पहले हाईकोर्ट भी बेहद तल्ख टिप्पणियां कर चुका है।
नियुक्तियों के इंतजार में लोकायुक्त,राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड,राजस्थान स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बोर्ड,बीस सूत्री कार्यक्रम एवं समन्वय समिति,राज्य महिला आयोग, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग,राज्य उपभोक्ता आयोग,पिछड़ा वर्ग आयोग, अल्पसंख्यक आयोग,मानवाधिकार आयोग,अनुसूचित जनजाति आयोग और विभिन्न अकादमियां हैं।
इन संस्थाओं का सरकार की प्रशासनिक मशीनरी को गति देने में बड़ा योगदान रहता है।
विपक्ष का हमला
विपक्षी दल कांग्रेस ने हालिया नियुक्तियों को लेकर सरकार को घेरा है। कांग्रेस प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी का आरोप है कि सरकार के ढाई साल पूरे होने को हैं, लेकिन महत्वपूर्ण बोर्ड और निगमों में नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं।
कांग्रेस ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियुक्तियों में योग्यता के बजाय वैचारिक निकटता को प्राथमिकता दी जा रही है, जो संस्थागत निष्पक्षता के खिलाफ है।
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