कलेक्टर मैडम का बड़ा धमाका, मंत्री के बहनोई सीएमएचओ को हटवाया, नौकरशाही में मची खलबली

Jinesh Jain | Apr 12, 2026, 16:08 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान का आदिवासी जिला प्रतापगढ़ फिर चर्चा में है। कलेक्टर की सिफारिश पर प्रदेश के रसूखदार मंत्री के बहनोई सीएमएचओ को प्रतापगढ़ से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

News In Short

  • प्रतापगढ़ की कलेक्टर की सिफारिश पर सीएमएचओ डॉ. जीवराज मीणा को हटाया।
  • डॉ. मीणा एपीओ, भजनलाल सरकार के राजस्व मंत्री हेमंत मीणा के हैं बहनोई।
  • पिछली कलेक्टर अंजलि राजौरिया ने भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर की थी सिफारिश।
  • उदयपुर सांसद से टकराने पर कलेक्टर अंजलि का कर दिया था ट्रांसफर।
  • अंजलि की जगह अब शुभम चौधरी को बनाया गया प्रतापगढ़ कलेक्टर।

News In Detail

Pratapgarh: राजस्थान में प्रतापगढ़ की कलेक्टर की सिफारिश पर वहां के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. जीवराज मीणा को हटा दिया गया है। डॉ. मीणा भजनलाल सरकार के रसूखदार राजस्व मंत्री हेमंत मीणा के बहनोई हैं



सीएमएचओ डॉ. मीणा को एपीओ कर जयपुर मुख्यालय तलब कर लिया गया है। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायत थीं। डॉ. मीणा को हटाने के लिए प्रतापगढ़ की पिछली कलेक्टर अंजलि राजोरिया ने सिफारिश की थी।



सांसद से टकराने पर हटी आईएएस अंजलि राजोरिया

प्रतापगढ़ राजस्थान का आदिवासी जिला है, जहां कलेक्टर अंजलि राजोरिया का तबादला उदयपुर सांसद मुन्नालाल रावत से टकराहट के बाद कर दिया गया था। सांसद रावत ने अंजलि राजोरिया के खिलाफ संसद के बजट सत्र में शून्यकाल में गंभीर आरोप लगाए थे।



उन्होंने कहा था कि आरोप लगाया था कि आईएएस अधिकारी अंजलि व्यक्तिगत अहंकार के कारण डीएमएफ में सुझाए विकास कार्यों की स्वीकृति नहीं दे रही है। हाल ही में 65 आईएएस अधिकारियों के किए गए ट्रांसफर में आईएएस अंजलि को प्रतापगढ़ से हटा दिया गया। उनकी जगह कलेक्टर के रूप में आईएएस शुभम चौधरी ने अब कार्यभार संभाला।



शुभम चौधरी के समय हुआ धमाका

अंजलि राजोरिया की जगह प्रतापगढ़ कलेक्टर बनकर आई शुभम चौधरी की छवि भी स्ट्रांग महिला आईएएस अधिकारी के रूप में मानी जाती हैं। हालांकि उनके प्रतापगढ़ कलेक्टर का कार्यभार संभालने के बाद डॉ. जीवराज मीणा को हटाने के आदेश आए हैं।



वैसे, सीएमएचओ डॉ. जीवराज मीणा को हटाने के लिए अंजलि राजोरिया ने ही सिफारिश कर दी थी। उनके पास डॉ. मीणा के खिलाफ गंभीर शिकायत आई थी। उन्होंने राजस्व मंत्री हेमंत मीणा के रिश्तेदार होने के प्रभाव को दरकिनार कर फरवरी में ही डॉ. जीवराज मीणा को हटाने की चिकित्सा विभाग से सिफारिश कर दी थी।



​विवादों का पुराना नाता और 'वसूली' के आरोप

​डॉ. जीवराज मीणा का कार्यकाल शुरू से ही विवादों से घिरा रहा है। विभागीय सूत्रों की मानें तो मंत्री के रसूख के कारण निजी अस्पतालों के साथ उनके टकराव की खबरें अक्सर सुर्खियां बनती रही हैं। सबसे गंभीर मोड़ तब आया, जब एक निजी अस्पताल संचालक ने उन पर अवैध वसूली के खुले आरोप लगाए।



​यह मामला केवल कागजों तक सीमित नहीं रहा, सोशल मीडिया पर इससे जुड़े वीडियो और पोस्ट इस कदर वायरल हुए कि विभाग की साख पर सवाल खड़े हो गए।



आम जनता और विभिन्न स्थानीय संगठनों ने सड़कों पर उतरकर इस भ्रष्टाचार के खिलाफ पारदर्शी जांच की मांग की थी। मामला हाई कोर्ट तक भी पहुंचा, जिससे प्रशासनिक स्तर पर भारी हलचल पैदा हुई।



​एपीओ के बाद वापसी और फिर वही आरोप

​डॉ. मीणा को इन विवादों के चलते पहले भी अगस्त 2024 में एपीओ किया जा चुका है। उस समय उन्हें फील्ड से हटाकर मुख्यालय भेजा गया था, जिसे एक सख्त संदेश माना गया। हालांकि, कुछ समय बाद उन्हें पुनः जिम्मेदारी सौंप दी गई, लेकिन वापसी के बाद भी स्थितियां नहीं बदलीं। पुराने आरोपों ने रह-रहकर सिर उठाया और नई अनियमितताओं की चर्चाएं आम होती गईं।



इन अधिकारियों को भी हटाने की सिफारिश

प्रतापगढ़ की पूर्व कलेक्टर अंजलि राजोरिया ने डॉ. जीवराज मीणा के साथ ही एनआरएचएम के जिला लेखा कार्यक्रम प्रबंधक प्रखर शाह, पीसीपीएनडीटी समन्वयक महेश पाटीदार और मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना प्रभारी डॉ. नितेश मीणा को भी उदयपुर संभाग से बाहर हटाने की सिफारिश की। अंजलि ने एनएचएम के निदेशक को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि उनकी जांच में इनके खिलाफ भ्रष्टाचार और ​अनियतिता का मामला पाया गया है। इनकी विस्तृत जांच होना जरूरी है।



​महिला कलेक्टरों का बढ़ता रसूख

राजस्थान में महिला आईएएस अधिकारियों की एक नई खेप आई है, जो किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है।



अंजलि राजोरिया: प्रतापगढ़ की पूर्व कलेक्टर, जिन्होंने स्थानीय सांसद के विरोध के बावजूद झुकना स्वीकार नहीं किया। हालांकि, उन्हें तबादले का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी गरिमा बनाए रखी।



शुभम चौधरी (प्रतापगढ़): सवाई माधोपुर से लेकर डूंगरपुर तक का अनुभव रखने वाली शुभम ने आते ही कड़ा संदेश दिया कि नियम सबके लिए बराबर हैं।



​डॉ. मंजू : सरहदी जिले श्रीगंगानगर में भू-माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोला और करोड़ों की सरकारी जमीन बचाई। भले ही इसके लिए उन्हें राजनेताओं के कोप का भाजन बनना पड़ा।



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