सरिस्का सीटीएच पर बैठक में हंगामा, जूली ने घेरे अफसर तो बाहर ग्रामीणों ने दिखाए काले झंडे
News In Short
- सरिस्का टाइगर रिजर्व में सीटीएच बदलाव को लेकर विवाद गहराया।
- नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अलवर कलेक्टर के सामने जताया एतराज।
- जूली ने अफसरों से पूछा कि क्या खनन शुरू करवाने के लिए हो रहा बदलाव।
- कलेक्ट्रेट के बाहर जूली को घेरा ग्रामीणों ने, पुलिस ने किया बीच-बचाव।
- कांग्रेस का आरोप, खनन माफिया की मिलीभगत से बदल रहे सीटीएच।
News In Detail
अलवर। राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व में क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (सीटीएच) के पुनर्गठन का विवाद बढ़ता जा रहा है। अलवर मिनी सचिवालय में बुधवार को आयोजित जिला स्तरीय बैठक सीटीएच के मुद्दे को लेकर हंगामे की भेंट चढ़ गई। एक तरफ जहां नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अधिकारियों पर खनन माफियाओं के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया, वहीं बैठक के बाहर उन्हीं की पार्टी के कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने जूली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
क्या खनन के लिए बदला जा रहा नक्शा?
बैठक के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली आक्रामक दिखे। उन्होंन कलेक्टर अर्तिका शुक्ला और वन अधिकारियों के सामने सीधा सवाल दागा कि आखिर सीटीएच के दायरे में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी? क्या टहला और आसपास के क्षेत्रों में खनन शुरू करवाने के लिए सीटीएच की सीमाओं के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। उन्होंने पूछा, जब बाघों की संख्या बढ़ रही है और उनका हैबिटेट बढ़ रहा है तो सुरक्षित क्षेत्र को कम या शिफ्ट क्यों किया जा रहा है? अधिकारियों से कोई ठोस जवाब नहीं मिलने पर जूली ने इसे एक बड़ा घोटाला करार दिया।
टहला के ग्रामीणों ने जूली को घेरा
हैरानी की बात तब हुई जब बैठक खत्म होने के बाद जूली सचिवालय से बाहर निकले। वहां मौजूद टहला क्षेत्र के ग्रामीणों ने जूली को घेर लिया। खुद को कांग्रेस कार्यकर्ता बताने वाले ग्रामीणों ने नेता प्रतिपक्ष के स्टैंड का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें सीटीएच के नए प्लान पर कोई आपत्ति नहीं है।
ग्रामीणों का तर्क था कि सीटीएच के कड़े नियमों के कारण उन्हें खुद के घर बनाने के लिए पत्थर तक नसीब नहीं होते हैं। ग्रामीणों ने जूली पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। इस दौरान माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि जूली समर्थकों और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालना पड़ा।
जूली की ग्रामीणों से नोकझोंक
ग्रामीणों का तर्क था कि सीटीएच के कड़े नियमों के कारण उन्हें अपने स्वयं के घर बनाने के लिए पत्थर तक नसीब नहीं होते थे। ग्रामीणों ने जूली पर सीटीएच को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। इस दौरान माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि जूली समर्थकों और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालना पड़ा।
जूली का आरोप, पर्दे के पीछे बड़ा खेल
बाद में मीडिया से बातचीत में कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने कहा कि सीटीएच को लेकर सरकार और प्रशासन जनता को लगातार गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है। उनका यह भी सवाल उठाया कि क्या अधिकारी इस मामले में मिले हैं या फिर किसी दबाव में काम कर रहे हैं। अलवर जिले से दो मंत्री होने के बावजूद इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा है। कांग्रेस इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी।
क्या है सीटीएच विवाद की जड़
दरअसल, सरिस्का के सीटीएच के नए सीमांकन का प्रस्ताव विचाराधीन है। सीटीएच में वह क्षेत्र होता है, जहां मानवीय हस्तक्षेप पूरी तरह प्रतिबंधित होता है। विपक्ष कांग्रेस का आरोप है कि सरकार कुछ खास रसूखदारों और खनन लॉबी को फायदा पहुँचाने के लिए उन क्षेत्रों को सीटीएच से बाहर कर रही है, जहां कीमती पत्थर और खनिज संपदा है। दूसरी ओर, ग्रामीण इसे अपनी विकास की बाधाएं दूर होने के तौर पर देख रहे हैं।
दोनों मंत्री अलवर से ही
राजस्थान का सरिस्का टाइगर रिजर्व अलवर जिले में आता है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा का संबंध भी अलवर से हैं। कांग्रेस का आरोप है कि दोनों मंत्री सरिस्का में बंद पड़ी 56 खदानों को खुलवाने के लिए सीटीएच में बदलाव करा रहे हैं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है, जहां से सीटीएच को सीमांकन नए सिरे से कराने के निर्देश हैं।
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