सरिस्का में बाघिन ने दिए 3 शावकों को जन्म, कुनबा बढ़कर हुआ 52, अब छोटा पड़ने लगा जंगल
News In Short
- सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघिन ST-17 ने तीन नए शावकों को दिया जन्म।
- अकबरपुर रेंज में कैमरा ट्रैप और ग्राउंड पेट्रोलिंग के दौरान इन शावकों की पुष्टि।
- बाघों की बढ़ती संख्या के बाद सरिस्का की बाउंड्री अब छोटी पड़ने लगी।
- फिलहाल सरिस्का का जंगल 35 से 40 बाघों के लिए उपयुक्त माना।
- सरिस्का से जल्द ही अब सुकोला गांव के विस्थापन की बारी।
News In Detail
सुनील जैन@अलवर
राजस्थान के प्रसिद्ध सरिस्का टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए बेहद सुखद खबर सामने आई है। बाघिन ST-17 ने तीन नए शावकों को जन्म दिया है। इसके बाद सरिस्का में बाघों का कुनबा अब अर्धशतक पार करते हुए 52 तक पहुंच गया है।
अधिकारियों ने सरिस्का के अकबरपुर रेंज में कैमरा ट्रैप और ग्राउंड पेट्रोलिंग के दौरान इन नन्हें शावकों के जन्म की पुष्टि हुई है। हालांकि, इस बढ़ती संख्या ने प्रबंधन के सामने जंगल के सिमटते क्षेत्रफल को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है
कैमरा ट्रैप में दिखे नन्हे मेहमान
सरिस्का प्रशासन के अनुसार बाघिन ST-17 और उसके तीनों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनकी गतिविधियां सामान्य पाई गई हैं। यह बाघिन ST-17 की दूसरी सफल ब्रीडिंग है। अकबरपुर रेंज के सघन वन क्षेत्र में बाघिन के साथ अठखेलियां करते शावकों की तस्वीरें वन विभाग के मॉनिटरिंग दल के उत्साह को बढ़ाने वाली हैं। संबंधित टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे 24 घंटे इन शावकों की सुरक्षा और नियमित मॉनिटरिंग करें।
शून्य से शिखर तक का सफर
सरिस्का का यह पुनरुत्थान दुनिया के वन्यजीव इतिहास में एक मिसाल है। वर्ष 2004-05 में अवैध शिकार के कारण सरिस्का बाघ विहीन हो गया था। वर्ष 2008 में रणथंभौर से बाघों को लाकर दुनिया का पहला टाइगर री-लोकेशन प्रोजेक्ट शुरू हुआ। गहन गश्त, कैमरा ट्रैप नेटवर्क, शिकार प्रजातियों का संवर्धन और गांवों का विस्थापन इस सफलता के मुख्य आधार रहे हैं।
सरिस्का में 40 बाघों की क्षमता, 52 का बसेरा
बाघों की बढ़ती संख्या के बीच चिंताजनक पहलू भी सामने आया है। हाल ही में मीडिया कार्यशाला के दौरान क्षेत्रीय निदेशक संग्राम सिंह कटियार ने स्पष्ट किया कि सरिस्का का वर्तमान क्षेत्रफल करीब 35 से 40 बाघों के लिए ही उपयुक्त है। वर्तमान में यहां 52 बाघ हैं, जो क्षमता से काफी अधिक हैं।
कटियार का कहना है कि सरिस्का में बाघों की डेंसिटी बढ़ रही है। यदि अगले एक साल में 10-12 और बाघ बढ़ते हैं तो क्षेत्रीय संघर्ष या बाघों के आबादी क्षेत्र में निकलने का खतरा बढ़ सकता है। इसके लिए जंगल के विस्तार के प्रयास किए जा रहे हैं।
सुकोला गांव के विस्थापन की बारी
सरिस्का प्रशासन के अनुसार जंगल को बाघों के अनुकूल बनाने के लिए ग्रामीणों का विस्थापन एक अनिवार्य प्रक्रिया है। सुकोला गांव का सर्वे पूरा हो चुका है और सहमति के आधार पर ग्रामीणों को जल्द ही दूसरी जगह बसाया जाएगा।
इसके साथ ही शाकाहारी वन्यजीवों के लिए 500 हेक्टेयर में नई ब्रीड की 'ग्रासलैंड' तैयार की जा रही है। मानसून के बाद सरिस्का में एक नई तरह की वनस्पति देखने को मिलेगी, जो वन्यजीवों के लिए पोषक चारा उपलब्ध कराएगी।
अब सोलर बोरवेल से बुझेगी प्यास
गर्मियों के मौसम को देखते हुए उपवन संरक्षक अभिमन्यु सहारण ने बताया कि अब वन्यजीवों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। पहले टैंकरों के जरिए वाटर होल्स भरे जाते थे। अब जगह-जगह सोलर बोरवेल लगाए गए हैं, जो स्वतः पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं। इससे वन्यजीवों को भीषण गर्मी में भी प्राकृतिक रूप से पानी उपलब्ध रहेगा।
पर्यटन में 30% उछाल की उम्मीद
दिल्ली और जयपुर के नजदीक होने के कारण सरिस्का पर्यटकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। टाइगर साइटिंग बढ़ने से पर्यटन गतिविधियों में 30 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है।
कोर एरिया के दुर्गम रास्तों और घने जंगल की तुलना में पर्यटक अब बफर जोन को अधिक पसंद कर रहे हैं, जहाँ बाघों को देखना आसान हो रहा है। प्रशासन यहाँ पर्यटकों के लिए सुविधाएं और 'टूरिज्म हब' विकसित कर रहा है।
आगेे क्या
हालांकि, सरिस्का में क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (Critical Tiger Habitat) का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसके बाद ही सरिस्का में क्षेत्र विस्तार पर अंतिम मुहर लग सकेगी। वर्तमान परिस्थितियों में सरिस्का न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए बाघ संरक्षण का एक सफल मॉडल बनकर उभरा है।
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