क्या बच्चों के नाम पर हो रही है सियासत, सूची से भाजपा नेताओं के नाम गायब, सोशल मीडियो पर हो रही चर्चा
News In Short
- राजस्थान शिक्षा विभागका सार्थक नाम अभियान पर उठने लगे सवाल।
- शिक्षा विभाग की सार्थक नाम सूची में भाजपा नेताओं के नाम गायब।
- 2950 नामों में कांग्रेस नेताओं के कई नामों को सूची में मिली जगह।
- सोशल मीडिया पर नामों को लेकर किया जा रहा कटाक्ष।
- बच्चों के अर्थहीन और नकारात्मक नामों को बदलने की यह है मुहिम।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान के शिक्षा विभाग का सार्थक नाम अभियान विवादों में फंसता दिख रहा है। जिस मुहिम को बच्चों के नाम बदलकर उनके आत्मविश्वास और गौरव को बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था, वह अब राजनीतिक चर्चा और सोशल मीडिया पर कटाक्ष का केंद्र बन गई है।
हाल ही में विभाग ने कक्षा 1 से 9 तक के विद्यार्थियों के लिए 2950 उपयुक्त नामों की एक सूची जारी की। लेकिन जैसे ही यह सूची सार्वजनिक हुई, इसमें शामिल और गायब नामों को लेकर एक नया बवाल खड़ा हो गया है।
सीएम का नाम गायब, विपक्ष के नेताओं को मिली जगह
इस सूची में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का नाम ही गायब है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस के प्रमुख नेताओं के नाम राहुल और अशोक को इस सूची में प्रमुखता से जगह दी गई है।
इतना ही नहीं, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का नाम भी इस सार्थक फेहरिस्त से बाहर रखा गया है। इसके अलावा भारतीय राजनीति में रसूख रखने वाले सुषमा और विजया जैसे नामों को भी सूची में शामिल नहीं किया गया। इसके विपरीत प्रियंका, इंदिरा और प्रियदर्शिनी जैसे नाम सूची में मौजूद हैं।
इस विसंगति ने प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है सार्थक नाम अभियान का उद्देश्य?
शिक्षा विभाग के अनुसार इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों की मदद करना है, जिनके नाम अर्थहीन, नकारात्मक या पुराने पड़ चुके हैं। इसकी वजह से उन्हें स्कूल या समाज में शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। विभाग का मानना है कि एक सकारात्मक और गरिमापूर्ण नाम बच्चे के व्यक्तित्व और सामाजिक छवि को बेहतर बनाता है। योजना के तहत स्कूल स्तर पर अभिभावकों की सहमति से नाम संशोधन की प्रक्रिया अपनाई जानी है।
विवादित नामों ने बढ़ाया असमंजस
हैरानी की बात यह है कि जिन नामों को सार्थक और सांस्कृतिक रूप से गौरवशाली बताया गया है, उनमें से कई नाम खुद विवादों के घेरे में हैं।
लड़कों के लिए सुझाए गए नामों में दहीभाई, जयचंद, दगड़ूराम और कामदेव जैसे नाम शामिल हैं।लड़कियों की सूची में चंपाकली, कैकयी, गुलकंद, गुलाबी और नागश्री जैसे नाम दिए गए हैं। इतना ही नहीं, सूची में जेंडर को लेकर भी भारी भ्रम देखा गया। बालिकाओं की सूची में कमललोचन, हितकारी, फणिभूषण और झंकार जैसे नाम शामिल किए गए हैं, जो आमतौर पर पुल्लिंग या लड़कों के नाम माने जाते हैं।
अफसरों की चूक ने बढ़ाई मंत्री की मुश्किलें
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर इस अभियान के जरिए एक सकारात्मक बदलाव लाना चाहते थे, लेकिन अफसरों द्वारा तैयार की गई इस सूची ने उनके अभियान की हवा निकाल दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि नामों का चयन करते समय आवश्यक शोध और संवेदनशीलता का अभाव साफ दिखाई देता है। फिलहाल, इस सूची को लेकर प्रदेश में बहस तेज है।
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