राजस्थान SOG ने बनाया खास AI सॉफ्टवेयर, अब फोटो देखते ही पकड़े जाएंगे फर्जी अभ्यर्थी

Jageshwar prasad | May 14, 2026, 18:13 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट के खेल को खत्म करने के लिए SOG ने एक AI सॉफ्टवेयर तैयार किया है। यह सॉफ्टवेयर चेहरे की पहचान कर उम्मीदवार का पूरा रिकॉर्ड और आपराधिक इतिहास तुरंत सामने ला देगा।

News In Short

  • डमी कैंडिडेट को पकड़ने के लिए SOG ने एक AI सॉफ्टवेयर तैयार किया
  • यह फेस सर्च तकनीकआधारित है, जो चेहरे के मिलान से काम करता है।
  • इसे सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग (DoIT) की मदद से बनाया गया है।
  • इसमें प्रदेश के करीब 50 लाख अभ्यर्थियों का डेटा फीड है, जो लगातार बढ़ रहा है।
  • यदि कोई डमी कैंडिडेट नाम बदलकर भी परीक्षा देता है, तो AI तकनीक उसे पहचान लेगी।

News In Detail

राजस्थान में पेपर लीक और डमी कैंडिडेट के बढ़ते मामलों के बीच स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने तकनीकी मोर्चे पर एक बड़ी जीत हासिल की है। आईजी (IG) शरद कविराज के नेतृत्व में एक ऐसा फेस सर्च सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है, जो भर्ती परीक्षाओं में होने वाले फर्जीवाड़े को मिटाने की क्षमता रखता है।



यह तकनीक उन शातिर अपराधियों और डमी कैंडिडेट्स के लिए घातक साबित होगी जो दूसरों की जगह परीक्षा में बैठकर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करते थे।



AI की पैनी नजर से बचना मुश्किल

इस सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली बेहद सरल लेकिन अचूक है। जैसे ही किसी संदिग्ध की फोटो सिस्टम में डाली जाती है, AI तकनीक लाखों डेटाबेस में से उस चेहरे का मिलान करती है।



सॉफ्टवेयर केवल नाम या पते पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह चेहरे के बायोमेट्रिक फीचर्स को पढ़ता है। ऐसे में यदि किसी ने अलग-अलग परीक्षाओं में अपना नाम बदलकर भी फॉर्म भरा है, तो यह तकनीक उसे तुरंत पकड़ लेगी।



विशाल डेटाबेस और पारदर्शिता

SOG ने इस सॉफ्टवेयर को और अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए इसमें करीब 50 लाख अभ्यर्थियों का डेटाबेस शामिल किया है। यह डेटा राजस्थान के SSO (Single Sign-On) आईडी और पूर्व की परीक्षाओं से लिया गया है।



इसका मुख्य उद्देश्य आगामी परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है। जैसे ही कोई नया छात्र रजिस्ट्रेशन करता है, उसका डेटा भी इस डिजिटल लाइब्रेरी में जुड़ जाता है। इससे परीक्षा केंद्र पर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया और भी पुख्ता हो जाएगी।



डमी कैंडिडेट का पुराना पैंतरा अब होगा फेल

अब तक अपराधी क्या करते थे कि फॉर्म भरते समय मूल कैंडिडेट की जगह डमी कैंडिडेट की फोटो का इस्तेमाल करते थे या फोटो में एडिटिंग कर देते थे। पहले यह जांचना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण था। लेकिन अब यह सॉफ्टवेयर दो अलग-अलग फोटो के बीच सूक्ष्म अंतर और समानता को भांप लेता है।



यदि किसी उम्मीदवार का पिछला कोई आपराधिक रिकॉर्ड है या वह पहले कभी नकल करते हुए पकड़ा गया है, तो सॉफ्टवेयर तुरंत रेड फ्लैग या अलर्ट जारी कर देगा।



दर्जनों मुन्नाभाई पहले ही चढ़े हत्थे

SOG के अनुसार, इस तकनीक का परीक्षण शुरू हो चुका है और इसके उपयोग से अब तक दर्जनों डमी कैंडिडेट पकड़े भी जा चुके हैं। आने वाली सभी बड़ी भर्ती परीक्षाओं में इस AI टूल का इस्तेमाल अनिवार्य किया जाएगा। यह कदम उन मेहनती अभ्यर्थियों के लिए उम्मीद की किरण है जो दिन-रात तैयारी करते हैं और धांधली के कारण पीछे रह जाते हैं।



अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

SOG का AI सॉफ्टवेयर क्या है?

यह एक फेस सर्च सॉफ्टवेयर है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम करता है। इसे राजस्थान SOG ने DoIT के साथ मिलकर बनाया है ताकि भर्ती परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट और फर्जीवाड़े को रोका जा सके।



यह डमी कैंडिडेट्स को कैसे पकड़ता है?

यह सॉफ्टवेयर चेहरे के मिलान की तकनीक का उपयोग करता है। इसमें 50 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का डेटा है। जैसे ही किसी संदिग्ध की फोटो डाली जाती है, सॉफ्टवेयर उसके चेहरे की बनावट का मिलान अपने डेटाबेस से करता है और उसका असली नाम, पता और पिछला रिकॉर्ड दिखा देता है।



क्या नाम बदलने पर भी यह सॉफ्टवेयर अपराधी को पहचान सकता है?

हां, क्योंकि यह तकनीक नाम या कागजों के बजाय चेहरे पर आधारित है। यदि कोई चेहरा पहले किसी आपराधिक गतिविधि या किसी अन्य नाम से परीक्षा देने में शामिल रहा है, तो AI उसे तुरंत ट्रैक कर लेगा।



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