राजस्थान में 4 साल से छात्रसंघ चुनाव बंद, फिर भी छात्रों से वसूले 22 करोड़; निर्मल चौधरी बोले- शुल्क भी बंद हो
राजस्थान में पिछले चार साल से छात्रसंघ चुनाव नहीं हो रहे हैं लेकिन सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रों से शुल्क वसूलने का सिलसिला जारी है। सवाल उठने के बाद शुल्क के नाम बदल दिए गए लेकिन वसूली बंद नहीं हुई। राजस्थान यूनिवर्सिटी (RU) ने इस सत्र में छात्रसंघ चुनाव शुल्क का नाम बदलकर ‘छात्र कल्याण शुल्क’ कर दिया है। वहीं, उच्च शिक्षा विभाग ने सरकारी कॉलेजों को 'स्टूडेंट्स यूनियन शुल्क' की जगह 'विद्यार्थी निधि' के नाम से शुल्क लेने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान यूनिवर्सिटी ने 4 साल में लिए 2.75 करोड़ रुपए
राजस्थान यूनिवर्सिटी में पिछले चार साल में छात्रसंघ शुल्क के नाम पर करीब 2.75 करोड़ रुपए लिए गए हैं। इस सत्र से विश्वविद्यालय ने इसका नाम बदलकर छात्र कल्याण शुल्क कर दिया है। अब एडमिशन फीस के साथ प्रत्येक छात्र से 280 रुपए लिए जा रहे। वहीं, सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में यह शुल्क 210 रुपए है। संस्कृत विश्वविद्यालय सहित अन्य विश्वविद्यालयों में भी फीस के साथ छात्रसंघ से जुड़ा शुल्क लिया जा रहा है।
सरकारी कॉलेजों में 22 करोड़ रुपए जुटाने का अनुमान
प्रदेश के 600 से ज्यादा सरकारी कॉलेजों में स्नातक (UG) स्तर पर करीब 2.86 लाख और स्नातकोत्तर (PG) स्तर पर करीब 46 हजार सीटें हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रत्येक छात्र से हर साल 100 रुपए छात्रसंघ शुल्क लिया जाता रहा है। इस तरह चार साल में सरकारी कॉलेजों में करीब 22 करोड़ रुपए जुटाए जाने का अनुमान है।
उच्च शिक्षा विभाग के नए निर्देशों के मुताबिक, इस राशि को अब ‘विद्यार्थी निधि’ मद में रखा जाएगा। कॉलेज इस पैसे को छात्र हित से जुड़े कामों पर खर्च कर सकेंगे। हालांकि, छात्रसंघ चुनाव नहीं होने के बावजूद शुल्क लिए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हर साल बढ़ रही सरकारी कॉलेजों में छात्रों की संख्या
सरकारी कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या के आंकड़े भी सामने आए हैं। वर्ष 2023-24 में 5,14,649 छात्र थे। वर्ष 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 5,33,787 हो गई। वहीं, 2025-26 में सरकारी कॉलेजों में 5,42,195 छात्र दर्ज किए गए। यानी इस सत्र में भी पांच लाख से ज्यादा विद्यार्थियों से शुल्क लिया गया है।
बताया गया है कि वर्ष 2019 में भी छात्रसंघ शुल्क का नाम बदलने के संबंध में आदेश जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद कई कॉलेजों में प्रति छात्र 100 रुपए ‘स्टूडेंट्स यूनियन’ के नाम पर लिए जाते रहे।
निर्मल चौधरी बोले- चुनाव नहीं तो शुल्क भी बंद हो
राजस्थान यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष निर्मल चौधरी ने छात्रसंघ चुनाव शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जब चार साल से चुनाव नहीं हो रहे हैं, तो छात्रों से छात्रसंघ शुल्क वसूलना गलत है। सरकार को चुनाव शुरू कराने चाहिए और यदि चुनाव नहीं कराए जाते हैं, तो यह शुल्क तत्काल बंद किया जाना चाहिए।
छात्रसंघ चुनावों पर रोक के बीच शुल्क का नाम बदलने से यह सवाल उठ रहा है कि छात्रों से जुटाई गई राशि किस तरह खर्च की जा रही है। अब इस राशि के इस्तेमाल और उससे होने वाले छात्र हित के कार्यों को लेकर पारदर्शिता की मांग भी महत्वपूर्ण हो गई है।