एसआई भर्ती 2021: चयनित थानेदारों ने सरकार को दिया एफिडेविट, बोले-हम अग्निपरीक्षा से गुजरने को तैयार
News In Short
- एसआई भर्ती 2021 के चयनितों ने नौकरी से नहीं हटाने का चला आखिरी दांव।
- चयनित थानेदारों ने सरकार को एफिडेविट देकर नौकरी से नहीं हटाने का अनुरोध।
- अभ्यर्थी और परिजन बोले, ईमानदारी साबित करने के लिए कोई भी टेस्ट देने को तैयार।
- कोर्ट से भर्ती रद्द होने के बाद 750 से अधिक चयनित थानेदारों की नौकरी पर लटकी तलवार।
- यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंचाने की तैयारी।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में सब-इंस्पेक्टर भर्ती 2021 का विवाद अब ऐसे मोड़ पर आ खड़ा हुआ है, जहां न्याय और भविष्य के बीच की लकीर धुंधली पड़ती जा रही है। राजस्थान हाई कोर्ट की खंडपीठ द्वारा भर्ती रद्द करने के फैसले के बाद 750 से अधिक चयनित प्रोबेशनर सब-इंस्पेक्टरों के सामने अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है। इन अभ्यर्थियों और उनके परिजनों ने अब सरकार से कहा है कि हमारा नार्को टेस्ट करवा लो, लेकिन हमें सामूहिक दंड न दिया जाए। इस भावनात्मक अनुरोध का एफिडेविट सरकार को भी दिया गया है।
ऐसे चैक कर सकते हैं हमारी ईमानदारी
इन अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा दर्द यह है कि उन्हें संदेह के उसी कटघरे में खड़ा कर दिया है, जिसमें नकलची और पेपर लीक माफिया खड़े हैं। सरकार को भेजे गए एफिडेविट में उन्होंने स्पष्ट कहा है कि वे अपनी ईमानदारी प्रमाणित करने के लिए किसी भी वैज्ञानिक जांच (नार्को या पॉलीग्राफ) से गुजरने को तैयार हैं।
दोषी मिलें तो कुर्क कर लें संपत्ति
इन अभ्यर्थियों की मांग है कि अगर कोई दोषी मिले तो उसकी संपत्ति कुर्क कर वसूली की जाए। लेकिन छंटनी के बजाय पूरी भर्ती को रद्द करना उन निर्दोष युवाओं के साथ अन्याय है, जिन्होंने बिना किसी अनुचित साधन के यह मुकाम हासिल किया है। चयनित अभ्यर्थियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे उन्हें हटाने की साजिश करार दिया है।
जब अन्य भर्तियां जारी तो हमारी रद्द क्यों
चयनित अभ्यर्थियों का तर्क है कि जब पिछली सरकार की 19 संदिग्ध भर्तियों में से 17 की जांच जारी है और वे रद्द नहीं की गईं तो केवल एसआई भर्ती के साथ ही यह भेदभावपूर्ण सामूहिक दंड क्यों। अभ्यर्थियों का आरोप है कि कुछ अधिकारी कोर्ट को गुमराह कर रहे हैं कि दोषियों और निर्दोषों को अलग करना असंभव है।
सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल
750 परिवारों की बर्बादी का यह डर अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंचाने की तैयारी में है। असफल अभ्यर्थी पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर अपना पक्ष सुनने की गुहार लगा चुके हैं। कुल मिलाकर यह मामला अब केवल एक परीक्षा का नहीं, बल्कि साख और संघर्ष की उस लड़ाई का है जहां चयनित अपनी ईमानदारी साबित करने के लिए कोई भी अग्निपरीक्षा देने को मजबूर हैं।
सीएम को लिखा पत्र, कोर्ट आदेश की पालना कराएं
इस भावनात्मक पत्र के बाद हाई कोर्ट से परीक्षा रद्ध करवाने वाले और परीक्षा में फेल रहे कैंडीडेट्स ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हाई कोर्ट आदेश की पालना करवाने की अपील की है। यह अपील तब की है, जब इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में पहले ही कैवीयेट दायर कर दी है। कैवीयट के पीछे मकसद यह है कि सलेक्टेड कैंडीडेट्स की अपील पर कोई आदेश देने से पहले उन्हें सुना जाए।
विवाद से भर्ती रद्द होने तक की कहानी
विज्ञप्ति और परीक्षा (फरवरी-सितंबर 2021): राजस्थान लोक सेवा आयोग ने 3 फरवरी, 2021 को 859 पदों के लिए भर्ती निकाली। परीक्षा का आयोजन 13 से 15 सितंबर, 2021 के बीच किया गया। परीक्षा के दौरान ही कई केंद्रों से पेपर लीक और डमी अभ्यर्थियों के बैठने की खबरें सामने आने लगी थीं।
2023 में रिजल्ट और नियुक्तियां: तमाम विवादों के बावजूद जून 2023 में अंतिम परिणाम घोषित किए। चयनित अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग के लिए भेजा गया। लगभग 750 अभ्यर्थी प्रोबेशन पर हैं।
SOG की जांच और गिरफ्तारियां: दिसंबर 2023 में राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के बाद जांच तेज हुई। स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप SOG ने खुलासा किया कि पेपर RPSC के भीतर से ही लीक हुआ था।
जांच में अब तक करीब 140 गिरफ्तारियां हो चुकी है। इनमें 69 से ज्यादा ट्रेनी सब-इंस्पेक्टर और RPSC के पूर्व सदस्य रामूराम राइका और बाबूलाल कटारा भी शामिल थे।
28 अगस्त, 2025: हाईकोर्ट की सिंगल बेंच का फैसला
जस्टिस समीर जैन की सिंगल बेंच ने पूरी भर्ती को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि परीक्षा की पवित्रता पूरी तरह भंग हो चुकी है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब धांधली इतने बड़े पैमाने पर हो, तो दूध और पानी को अलग करना यानि दोषी और निर्दोष की छंटनी असंभव है।
सितंबर 2025: चयनित अभ्यर्थियों ने सिंगल बेंच के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 24 सितंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया और हाई कोर्ट की डिविजन बेंच को तीन महीने में सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया।
4 अप्रेल 2026 डिवीजन बेंच का फैसला: राजस्थान हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस एस.पी. शर्मा की अगुआई वाली डिविजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए पूरी भर्ती को रद्द करने पर अंतिम मुहर लगा दी। कोर्ट ने इसे सिस्टम की विफलता करार दिया।
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