60 हजार सरकारी शिक्षकों की नौकरी पर लटकी तलवार, सामने आ रही है यह बड़ी वजह

Purshottam Kumar Joshi | Jan 08, 2026, 18:10 IST
Photograph: (the sootr)
सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने राजस्थान के 60 हजार पुराने शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक रही है। उन्हे दो साल के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टैट) पास करनी होगी। अन्यथा उनकी नौकरी जा सकती है।

Jaipur. राजस्थान में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद करीब 60 हजार थर्ड ग्रेड शिक्षकों की नौकरी पर संकट खड़ा हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने उन पुराने शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीचर एजिबिलिटी टेस्ट, टैट) की अनिवार्यता कर दी है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश साल 2010 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए हैं। इन्हे दो साल में शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करनी होगी। इसके दायरे में लगभग 60 हजार थर्ड ग्रेड शिक्षक आ रहे हैं।



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टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टैट) अनिवार्य

राजस्थान के लगभग 60,000 ग्रेड थर्ड शिक्षकों के लिए नौकरी का संकट खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, अब इन शिक्षकों को दो साल के भीतर टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टैट) पास करना अनिवार्य होगा। यह आदेश उन शिक्षकों के लिए है, जिनकी नियुक्ति 2010 में हुई थी, जब टैट लागू नहीं था। अगर इन शिक्षकों ने समय सीमा के भीतर यह परीक्षा पास नहीं की, तो उनकी सेवाओं पर संकट आ सकता है। यह आदेश इन शिक्षकों के लिए एक बड़ा झटका साबित हो रहा है, जिनकी नियुक्ति काफी समय पहले हुई थी और जिन्होंने अब तक सेवाएं दी हैं।



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क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जिन शिक्षकों की सेवा में पांच साल बचे हैं, उन्हे TET परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। ऐसे शिक्षकों को सेवा जारी रखने और पदोन्नति के लिए दो साल के भीतर टैट पास करना होगा। हालांकि, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच साल से कम का समय बचा है, उन्हें इस आदेश से छूट मिलेगी। यह आदेश विशेष रूप से उन शिक्षकों के लिए लागू है, जिन्होंने 2010 से पहले नौकरी शुरू की थी और अब उन्हें परीक्षा पास करने का दबाव बनाया जा रहा है।



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जानिए टैट (शिक्षक पात्रता परीक्षा) कब हुई लागू

शिक्षक पात्रता परीक्षा ( टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत अनिवार्य किया गया था। 23 अगस्त 2010 को इस परीक्षा को पूरे देश में लागू किया गया। इसके बाद 2011 में पहली बार सीटीईटी (CTET) परीक्षा आयोजित की गई। राजस्थान में इसे रीट (REET) के नाम से 2011 में लागू किया गया है। इसके आधार पर ग्रेड थर्ड शिक्षकों की भर्ती की गई। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन पुराने शिक्षकों के लिए यह परीक्षा पास करना अनिवार्य हो गया है, जो एक बड़ी चुनौती बन गई।



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ग्रेड थर्ड शिक्षकों पर बढ़ा संकट

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में लगभग 2.30 लाख शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें से करीब 1.70 लाख शिक्षक 2011 के बाद रीट के आधार पर भर्ती हुए थे। लेकिन करीब 60,000 शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी भर्ती 2010 से पहले हुई थी और अब उन्हें TET की परीक्षा पास करनी होगी। इन शिक्षकों के लिए यह एक बड़ा संकट है, क्योंकि उन्हें दो साल के भीतर यह परीक्षा पास करनी होगी, अन्यथा उनकी नौकरी पर खतरा मंडरा सकता है।



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शिक्षक संगठनों का विरोध

शिक्षकों के लिए टैट की अनिवार्यता अब अव्यवहारिक हो गई है, क्योंकि अधिकांश सेवारत शिक्षक अपनी उम्र और जिम्मेदारियों के कारण परीक्षा की तैयारी नहीं कर सकते। इस मुद्दे को लेकर देशभर के 14 शिक्षक संगठनों ने अखिल भारतीय संयुक्त संघर्ष समिति का गठन किया है। इन संगठनों ने 5 फरवरी को दिल्ली में संसद कूच करने का ऐलान किया है और विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई है। इसके साथ ही, एसटीएफआइ (STFI) ने इस मामले में पुनर्विचार याचिका भी दाखिल की है।



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शिक्षकों की मांग

शिक्षक संगठनों का कहना है कि टैट की अनिवार्यता उन शिक्षकों के लिए बहुत कठिनाईपूर्ण हो सकती है, जिनकी उम्र अधिक है या जो परिवार की जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई में सक्रिय नहीं हैं। वे चाहते हैं कि सरकार इस निर्णय पर पुनर्विचार करे और पुराने शिक्षकों के लिए कुछ रियायतें दी जाएं, ताकि वे अपनी नौकरी बचा सकें और सही तरीके से कार्य कर सकें।



राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत प्रदेश महामंत्री उपेंद्र शर्मा ने बताया किसेवारत शिक्षकों के लिए अब पढ़ाई कर टेट पास करना अव्यवहारिक है। उनके लिए टेट की अनिवार्यता खत्म करने की मांग को लेकर देश के 14 शिक्षक संगठनों ने अखिल भारतीय संयुक्त संघर्ष समिति का गठन किया है। 5 फरवरी को देशभर के शिक्षक दिल्ली में संसद कूच करते हुए विरोध प्रदर्शन करेंगे। एसटीएफआइ की ओर से कोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दर्ज की गई है।



सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनाया था फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से संबंधित ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। शीर्ष कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए निर्देश दिया कि देशभर के ऐसे शिक्षक, जिनकी सेवा अवधि पांच वर्ष से अधिक बची है, उन्हें दो साल के भीतर टीईटी परीक्षा पास करनी होगी। अन्यथा अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी।



मुख्य बिंदू:

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 60 हजार सरकारी शिक्षकों की नौकरी पर लटकी तलवार ।
  • सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया है कि सभी शिक्षकों को टीचर एजिबिलिटी टेस्ट पास करना अनिवार्य होगा, ताकि वे अपनी सेवा जारी रख सकें और पदोन्नति के योग्य हों।
  • पुराने शिक्षकों के लिए टीचर एजिबिलिटी टेस्ट(टैट) की अनिवार्यता अव्यवहारिक हो सकती है, क्योंकि अधिकांश शिक्षक अपनी उम्र, परिवार की जिम्मेदारियों और समय की कमी के कारण परीक्षा की तैयारी नहीं कर सकते हैं।
  • शिक्षक संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की है और 5 फरवरी को दिल्ली में संसद कूच करने का ऐलान किया है।
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