राजस्थान की चिट्ठी: CJI विवाद, कांग्रेस में बवाल और इलाज के इंतजार में बेटी की मौत

Saurabh Mishra | Sept 05, 2026, 20:19 IST
राजस्थान की चिट्टी
राजस्थान के लिए यह हफ्ता उठापठक भरा रहा। सियासत में मर्यादाएं टूटीं, तो हाईकोर्ट के कार्यवाहक सीजेआई के खिलाफ विरोध की गूंज सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची। कोटा की बेटी AIIMS दिल्ली में सर्जरी की तारीखों का इंतजार करती रही और दम तोड़ दिया।

राजस्थान के लिए यह हफ्ता सियासी उठापटक, अदालती खींचतान और व्यवस्था पर उठे सवालों से भरा रहा। हाईकोर्ट के कार्यवाहक CJI के खिलाफ उठी आवाज सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची, तो निकाय चुनाव के टिकट ने बीकानेर कांग्रेस में ऐसा बवाल खड़ा किया कि बात मारपीट तक पहुंच गई। कोटा की बेटी को AIIMS दिल्ली में 13 साल तक सर्जरी की तारीख का इंतजार रहा और आखिरकार उसकी मौत हो गई। वहीं, जयपुर के जिस सरकारी स्कूल की बदहाली पर पत्थरबाजी तक हुई, वहां अब बुलडोजर चल चुका है और नई इमारत की नींव रख दी गई है।



राजस्थान हाईकोर्ट के CJI विवाद की गूंज सुप्रीम कोर्ट तक

राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को लेकर विवाद तब गहरा गया, जब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने 2, 10 और 17 अगस्त को CJI सूर्यकांत को तीन पत्र लिखे। इनमें जस्टिस शर्मा पर प्रशासनिक अधिकारों के कथित दुरुपयोग और केस लिस्टिंग में दखल के आरोप लगाए गए। साथ ही राजस्थान में जल्द स्थायी चीफ जस्टिस नियुक्त करने की मांग की गई।



विवाद बढ़ा तो जस्टिस शर्मा ने 1 से 5 सितंबर तक खुद को न्यायिक काम से अलग कर लिया। वकीलों ने उनके कोर्ट रूम के बाहर नारेबाजी भी की। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान का नया चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश कर दी। दिलचस्प यह कि मार्च 2023 में कॉलेजियम ने जस्टिस शर्मा की राजस्थान वापसी की मांग ठुकराकर उनका ट्रांसफर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट किया था, लेकिन मई 2026 में उन्हें फिर राजस्थान भेजने की मंजूरी दी गई थी।



जस्टिस शर्मा ने भी अपने ऊपर लगे आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया। उनका कहना था कि उनकी छवि खराब करने और प्रमोशन रोकने के लिए अभियान चलाया गया। नए रोस्टर के मुताबिक वे 7 सितंबर से जोधपुर मुख्य पीठ में बैठेंगे, जबकि वहां के वकीलों ने 6 सितंबर तक हड़ताल का ऐलान किया है।



कांग्रेस की अंतर्कलह सड़क पर आई

राजस्थान में निकाय चुनाव में भाजपा से मुकाबले की तैयारी कर रही कांग्रेस इस हफ्ते बीकानेर में अपने ही लोगों से उलझती नजर आई। टिकट बंटवारे की नाराजगी वार्ड 50 के चुनाव कार्यालय के उद्घाटन के दौरान मारपीट तक पहुंच गई। शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल ने आरोप लगाया कि पूर्व पार्षद दीपक अरोड़ा के बेटे मोहित और उसके साथियों ने उनके साथ मारपीट की। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।



कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल में देर नहीं की। 24 घंटे के भीतर पूर्व पार्षद दीपक अरोड़ा और उनके बेटे मोहित को छह साल के लिए प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया। महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष की भूमिका की भी जांच होगी और PCC अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने दो दिन में रिपोर्ट मांगी है।



मामला यहीं नहीं रुका। पुलिस ने मुख्य आरोपी मोहित अरोड़ा समेत अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, दीपक अरोड़ा ने कांग्रेस की जिला इकाई और आलाकमान पर पलटवार करते हुए फर्जी सिंबल तैयार करने का आरोप लगाया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। यानी निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई ने सियासी पारा और चढ़ा दिया है।



बीकानेर मेयर


कोटा की बेटी को मिलती रही तारीख, आखिर में हो गई मौत

एक पिता के सामने उसकी औलाद चली जाए, इससे बड़ा दर्द शायद ही कोई हो। कोटा के मुकेश कुमार की 15 साल की बेटी तन्वी जन्म से ही दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रही थी। 13 साल तक उसका AIIMS दिल्ली में इलाज चला, लेकिन सर्जरी नहीं हो सकी। पिता हर बार उम्मीद लेकर दिल्ली जाते और हाथ में अगली तारीख लेकर लौटते रहे। इस दौरान परिवार 100 से ज्यादा बार AIIMS पहुंचा।



1 सितंबर को तन्वी का ऑक्सीजन लेवल 48 फीसदी तक गिर गया और उसकी मौत हो गई। पिता ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है और FIR दर्ज कराने की तैयारी में हैं। AIIMS ने जांच कमेटी बनाई है और पोस्टमॉर्टम भी हो चुका है। अब जांच कमेटी तन्वी के इलाज, मेडिकल रिकॉर्ड और मौत की परिस्थितियों की पड़ताल करेगी। लेकिन पिता का सवाल यही है-13 साल के इंतजार के बाद अब इस जांच से क्या मिलेगा?



भैंसों के तबेले वाले स्कूल पर आखिर चला बुलडोजर

जयपुर के बगरू विधानसभा क्षेत्र के रामपुरा-कंवरपुरा गांव का सरकारी प्राइमरी स्कूल पिछले महीने राजस्थान की बड़ी खबर बन गया था। जर्जर इमारत की वजह से बच्चों की पढ़ाई पास के एक तबेले में चल रही थी। 21 अगस्त को CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका और उनकी टीम ‘स्कूल सुधारो अभियान’ के तहत स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची तो ग्रामीणों से विवाद हो गया। बात मारपीट तक पहुंची, गाड़ियों के शीशे टूटे और दोनों पक्षों ने FIR दर्ज कराई।



इस घटना ने सरकारी स्कूलों की बदहाली पर पूरे प्रदेश में बहस छेड़ दी। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के इस्तीफे की मांग भी उठी। लेकिन विवाद के 12 दिन बाद, 2 सितंबर को उसी जर्जर स्कूल की इमारत पर बुलडोजर चला दिया गया। अब 18 लाख रुपए की लागत से नई बिल्डिंग बनेगी।



रांका ने X पर लिखा कि निरीक्षण के दौरान पत्थर फेंके गए और मारपीट हुई, लेकिन बच्चों के लिए अच्छा स्कूल बनेगा तो सब कुछ सार्थक लगेगा। यानी जिस विवाद की शुरुआत पत्थरबाजी से हुई, वह आखिरकार नई स्कूल बिल्डिंग की नींव तक पहुंच गया। अंत भला तो सब भला।



राजस्थान स्कूल


अगले हफ्ते फिर मिलेंगे नई चिठ्ठी के साथ!

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