तीन बार असफलता, चौथी कोशिश में AIR-251: IAS आराधना चौहान की जिंदगी की 5 बड़ी सीख
Saurabh Mishra | Sept 05, 2026, 15:27 IST
IAS आराधना चौहान की '12th Fail' कहानी
इंदौर की आराधना चौहान ने UPSC की तीन असफलताओं के बाद चौथी कोशिश में AIR-251 हासिल कर IAS बनने का सपना पूरा किया। अब वह राजस्थान कैडर की IAS हैं।
एक बार की नाकामी इंसान को रोक सकती, दूसरी बार की हार उसे अपने फैसले पर सोचने को मजबूर करती और तीसरी असफलता कई बार सपने बदलने की वजह बन जाती। लेकिन इंदौर की आराधना चौहान ने हर हार के बाद अपना रास्ता बदलने के बजाय अपनी तैयारी बदली। पहली कोशिश में सफलता नहीं मिली। दूसरी बार प्रीलिम्स और मेन्स निकालकर इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन महज 20 नंबर से अंतिम चयन से चूक गईं।
तीसरे प्रयास में आराधना का प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं हुआ। लगातार तीन झटकों के बाद भी उन्होंने UPSC का सपना नहीं छोड़ा। चौथी कोशिश में सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 251 हासिल कर वह कर दिखाया, जिसके लिए 4 साल तक लगातार संघर्ष किया था।
आराधना का सफर सिर्फ एक प्रतियोगी परीक्षा पास करने की कहानी नहीं। इसमें नौकरी छोड़कर तैयारी करने का फैसला है, सेल्फ स्टडी पर भरोसा, असफलताओं के बाद रणनीति बदलना है और वह दौर भी है, जब एमबीए को आगे का रास्ता मानने की तैयारी हो चुकी थी। इसी बीच '12th Fail' फिल्म ने उन्हें एक बार फिर अपने लक्ष्य पर डटे रहने का हौसला दिया।
आराधना चौहान राजस्थान कैडर की 2024 बैच की IAS अधिकारी हैं। फिलहाल वे श्रीगंगानगर में जिला निर्वाचन कार्यालय में ओएसडी (OSD) की जिम्मेदारी संभाल रहीं। इससे पहले वे 2025 में कोटा में असिस्टेंट कलेक्टर के तौर पर काम कर चुकी। ट्रेनिंग के दौरान भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय में असिस्टेंट सेक्रेटरी के तौर पर भी जिम्मेदारी निभा चुकी।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2023 में AIR-251 हासिल करने के बाद उनके प्रशासनिक करियर की शुरुआत हुई। हालांकि इस मुकाम तक पहुंचने से पहले उन्होंने इंजीनियरिंग, कॉरपोरेट नौकरी और कई वर्षों की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का लंबा दौर देखा।
IAS आराधना चौहान का जन्म मध्य प्रदेश के रतलाम में हुआ। शुरुआती पढ़ाई भी वहीं हुई थी। सातवीं के बाद वे इंदौर आ गईं और यहां सिका स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद भोपाल के MANIT से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया।
पढ़ाई के बाद 2019 में उन्होंने पुणे के कॉरपोरेट सेक्टर में करीब एक साल नौकरी की। नौकरी के साथ यूपीएससी का लक्ष्य बना रहा, लेकिन जून 2020 में उन्होंने नौकरी छोड़कर पूरी तरह सिविल सेवा की तैयारी पर ध्यान देने का फैसला किया।
आराधना ने अपनी तैयारी का आधार सेल्फ स्टडी को बनाया। ऑनलाइन पढ़ाई के साथ किताबें, नोट्स और टेस्ट सीरीज का सहारा लिया। जरूरत पड़ने पर कोचिंग के मेंटर्स से भी मार्गदर्शन लिया। तैयारी के शुरुआती दौर में उन्हें समझ आया कि यूपीएससी सिर्फ किसी विषय को रटने की परीक्षा नहीं है। समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था और देश-दुनिया के घटनाक्रम को समझना भी उतना ही जरूरी है।
2021 में आराधना ने दूसरा प्रयास दिया। इस बार प्रीलिम्स और मेन्स दोनों निकालकर इंटरव्यू तक पहुंचीं। लेकिन अंतिम चयन से वे सिर्फ 20 नंबर पीछे रह गईं। सफलता के बेहद करीब पहुंचकर मिली यह हार उनके लिए आसान नहीं थी। वे काफी निराश हुईं और तनाव में आ गईं। ऐसे समय में परिवार ने उन्हें संभाला और दोबारा तैयारी शुरू करने का हौसला दिया।
इसके बाद उन्होंने तीसरी कोशिश की, लेकिन इस बार प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं हुआ। लगातार दूसरी बड़ी निराशा के बाद तनाव बढ़ना स्वाभाविक था। फिर भी आराधना ने UPSC छोड़ने का फैसला नहीं किया।
2023 का चौथा प्रयास आराधना के लिए निर्णायक साबित हुआ। प्रीलिम्स और मेन्स की परीक्षा देने के बाद वे इंटरव्यू की तैयारी कर रही थीं। इसी दौरान अक्टूबर 2023 में ‘12वीं फेल’ फिल्म रिलीज हुई।
आराधना ने फिल्म देखी तो उसकी कहानी का एक हिस्सा उन्हें अपने सफर से जुड़ा लगा। बार-बार असफल होने के बावजूद लक्ष्य के लिए संघर्ष करते रहने का संदेश उन्हें भीतर तक प्रभावित कर गया। फिल्म में अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की पंक्ति ‘हार नहीं मानूंगा’ ने भी उनका हौसला बढ़ाया।
उन्हें 2021 का वह इंटरव्यू याद आया, जहां वे सिर्फ 20 नंबर से चयन से रह गई थीं। इस बार उन्होंने इंटरव्यू की तैयारी को और गंभीरता से लिया। फिल्म उनके लिए मोटिवेशन का जरिया बनी, लेकिन असली ताकत उन तीन असफलताओं के बाद भी तैयारी जारी रखने के फैसले में थी। आखिरकार चौथे प्रयास में उनका चयन हुआ और उन्हें AIR-251 मिली।
रिजल्ट का दिन आराधना के लिए बेहद भावुक था। सुबह से ही परिवार के साथ नतीजे का इंतजार हो रहा था। जब रिजल्ट आया, उस वक्त वे परिवार के साथ लंच कर रही थीं। उन्होंने लिस्ट खोली और अपना नाम देखा। आराधना के मुताबिक करीब आधे घंटे तक उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि इस बार उनका चयन हो गया है। चार प्रयासों की मेहनत, इंतजार और असफलताओं के बाद आया यह परिणाम पूरे परिवार के लिए भावुक पल था। खुशी इतनी थी कि उसके बाद खाना भी ठीक से नहीं खा सकीं।
![UPSC CSE Result 2023; Indore Aradhana Chauhan Success Story - AIR 251 | MP News]()
आराधना की कहानी बताती है कि परीक्षा का एक परिणाम आपकी क्षमता तय नहीं करता। इंटरव्यू तक पहुंचकर हारना हो या प्रीलिम्स में ही रुक जाना, हर असफलता के बाद यह देखना जरूरी है कि कमी कहां रही और अगली बार क्या बदला जा सकता है।
आराधना के मुताबिक UPSC में सिर्फ लंबे समय तक पढ़ना पर्याप्त नहीं है। प्रीलिम्स के लिए इकोनॉमी, पॉलिटी और मॉडर्न हिस्ट्री जैसे विषयों की मजबूत पकड़ के साथ पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों और मॉक टेस्ट पर काम करना जरूरी है। मेन्स और इंटरव्यू को भी तैयारी का हिस्सा पहले से बनाना चाहिए।
आराधना ने अपनी तैयारी में सेल्फ स्टडी को प्राथमिकता दी। ऑनलाइन संसाधनों, नोट्स, स्टैंडर्ड किताबों और टेस्ट सीरीज का इस्तेमाल किया। उनकी तैयारी यह दिखाती है कि संसाधन चाहे जो हों, पढ़ाई की जिम्मेदारी खुद लेना और अपनी जरूरत के हिसाब से रणनीति बनाना सबसे अहम है।
UPSC की तैयारी से पहले कॉरपोरेट सेक्टर में काम करने का आराधना का अनुभव भी उनके सफर का हिस्सा रहा। नौकरी ने उन्हें कामकाजी दुनिया को समझने का मौका दिया। लंबे संघर्ष के दौरान जीवन के दूसरे अनुभव भी व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं।
आराधना के इंटरव्यू में इंदौर से जुड़े सवाल भी पूछे गए। उनसे पूछा गया कि इंदौर स्वच्छता में नंबर-1 क्यों है। उन्होंने जवाब में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के साथ शहर के लोगों की भागीदारी और सामाजिक जागरूकता को अहम बताया।
वे यह भी कहती हैं कि इंटरव्यू में हर सवाल का जवाब आना जरूरी नहीं है। उनसे भी कुछ तकनीकी सवाल पूछे गए, जिनका वे जवाब नहीं दे पाईं। लेकिन उन्होंने आत्मविश्वास बनाए रखा। उनके मुताबिक यही संतुलन इंटरव्यू में बेहद महत्वपूर्ण है।
![AS आराधना चौहान की कहानी, तीन बार हार कर भी नहीं मानी हार]()
आराधना के पिता वीसी चौहान रिटायर्ड एक्साइज अधिकारी हैं। उनका परिवार मूल रूप से मंदसौर के गरोड़ा से जुड़ा है। मां रेखा चौहान गृहिणी हैं और झाबुआ के बामनिया की रहने वाली हैं।
परिवार में पढ़ाई का माहौल रहा है। आराधना की दो बड़ी बहनों में एक डॉक्टर और दूसरी IITian हैं। उनका छोटा भाई भी UPSC की तैयारी कर रहा है और एक बार परीक्षा दे चुका है।
2021 में इंटरव्यू से बाहर होने के बाद आराधना काफी निराश थीं। तीसरे प्रयास में प्रीलिम्स भी नहीं निकला तो परिवार ने उन्हें कोई दबाव नहीं दिया। उन्हें पुराने जॉब पर लौटने या आगे MBA करने का विकल्प दिया गया। आराधना ने MBA के लिए आवेदन भी किया था।
यानी उनके सामने दूसरा रास्ता मौजूद था, लेकिन उन्होंने UPSC को एक और मौका देने का फैसला किया। यही फैसला उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ बन गया।
आराधना चौहान की कहानी UPSC की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए इसलिए खास है, क्योंकि इसमें सफलता से ज्यादा संघर्ष दिखाई देता है। तीन असफलताओं के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य को छोड़ा नहीं। हर बार यह समझने की कोशिश की कि कहां कमी रह गई और अगली कोशिश में उसे कैसे दूर किया जाए।
उनका सफर यह भी बताता है कि प्रतियोगी परीक्षा में सिर्फ प्रतिभा या पढ़ाई के घंटे मायने नहीं रखते। लंबे संघर्ष में धैर्य, रणनीति, आत्मविश्वास और परिवार का साथ भी उतना ही जरूरी है।
तीन बार नाकाम होने के बाद चौथी कोशिश में AIR-251 हासिल करने वाली आराधना के लिए ‘12वीं फेल’ फिल्म ने जरूर हौसला बढ़ाया, लेकिन उनकी सफलता की असली वजह वह जिद रही, जिसने हर हार के बाद उन्हें फिर किताबों के सामने बैठा दिया।
डॉक्टर नेहा राजपूत ने छोड़ा स्टेथोस्कोप, अब IAS बनकर बदल रहीं व्यवस्था
RBI में नौकरी, लंच ब्रेक में पढ़ाई, बिना कोचिंग के IAS बनीं सृष्टि डबास
असफलताओं से मिला कामयाबी का सूत्र, फिर आईएएस जसमीत सिंह संधू बन गए टॉपर
माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़ आईएएस बने माधव भारद्वाज, पिता थे LBSNAA में कर्मचारी
तीसरे प्रयास में आराधना का प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं हुआ। लगातार तीन झटकों के बाद भी उन्होंने UPSC का सपना नहीं छोड़ा। चौथी कोशिश में सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 251 हासिल कर वह कर दिखाया, जिसके लिए 4 साल तक लगातार संघर्ष किया था।
आराधना का सफर सिर्फ एक प्रतियोगी परीक्षा पास करने की कहानी नहीं। इसमें नौकरी छोड़कर तैयारी करने का फैसला है, सेल्फ स्टडी पर भरोसा, असफलताओं के बाद रणनीति बदलना है और वह दौर भी है, जब एमबीए को आगे का रास्ता मानने की तैयारी हो चुकी थी। इसी बीच '12th Fail' फिल्म ने उन्हें एक बार फिर अपने लक्ष्य पर डटे रहने का हौसला दिया।
राजस्थान कैडर की IAS, श्रीगंगानगर में संभाल रहीं जिम्मेदारी
UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2023 में AIR-251 हासिल करने के बाद उनके प्रशासनिक करियर की शुरुआत हुई। हालांकि इस मुकाम तक पहुंचने से पहले उन्होंने इंजीनियरिंग, कॉरपोरेट नौकरी और कई वर्षों की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का लंबा दौर देखा।
रतलाम में जन्म, इंदौर में पढ़ाई और फिर कॉरपोरेट नौकरी
पढ़ाई के बाद 2019 में उन्होंने पुणे के कॉरपोरेट सेक्टर में करीब एक साल नौकरी की। नौकरी के साथ यूपीएससी का लक्ष्य बना रहा, लेकिन जून 2020 में उन्होंने नौकरी छोड़कर पूरी तरह सिविल सेवा की तैयारी पर ध्यान देने का फैसला किया।
आराधना ने अपनी तैयारी का आधार सेल्फ स्टडी को बनाया। ऑनलाइन पढ़ाई के साथ किताबें, नोट्स और टेस्ट सीरीज का सहारा लिया। जरूरत पड़ने पर कोचिंग के मेंटर्स से भी मार्गदर्शन लिया। तैयारी के शुरुआती दौर में उन्हें समझ आया कि यूपीएससी सिर्फ किसी विषय को रटने की परीक्षा नहीं है। समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था और देश-दुनिया के घटनाक्रम को समझना भी उतना ही जरूरी है।
दूसरी कोशिश में इंटरव्यू तक पहुंच 20 नंबर से चूक गईं
इसके बाद उन्होंने तीसरी कोशिश की, लेकिन इस बार प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं हुआ। लगातार दूसरी बड़ी निराशा के बाद तनाव बढ़ना स्वाभाविक था। फिर भी आराधना ने UPSC छोड़ने का फैसला नहीं किया।
चौथा प्रयास क्यों बना गेमचेंजर?
आराधना ने फिल्म देखी तो उसकी कहानी का एक हिस्सा उन्हें अपने सफर से जुड़ा लगा। बार-बार असफल होने के बावजूद लक्ष्य के लिए संघर्ष करते रहने का संदेश उन्हें भीतर तक प्रभावित कर गया। फिल्म में अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की पंक्ति ‘हार नहीं मानूंगा’ ने भी उनका हौसला बढ़ाया।
उन्हें 2021 का वह इंटरव्यू याद आया, जहां वे सिर्फ 20 नंबर से चयन से रह गई थीं। इस बार उन्होंने इंटरव्यू की तैयारी को और गंभीरता से लिया। फिल्म उनके लिए मोटिवेशन का जरिया बनी, लेकिन असली ताकत उन तीन असफलताओं के बाद भी तैयारी जारी रखने के फैसले में थी। आखिरकार चौथे प्रयास में उनका चयन हुआ और उन्हें AIR-251 मिली।
रिजल्ट आया तो आधे घंटे तक समझ नहीं आया कि सपना पूरा हो गया
UPSC CSE Result 2023; Indore Aradhana Chauhan Success Story - AIR 251 | MP News
आराधना की तैयारी से युवाओं के लिए 5 बड़ी सीख
1. असफलता को अपनी पहचान न बनने दें
2. मेहनत के साथ सही रणनीति जरूरी
3. सेल्फ स्टडी को अपनी ताकत बनाएं
4. जिंदगी को सिर्फ परीक्षा तक सीमित न करें
5. इंटरव्यू में आत्मविश्वास बनाए रखें
वे यह भी कहती हैं कि इंटरव्यू में हर सवाल का जवाब आना जरूरी नहीं है। उनसे भी कुछ तकनीकी सवाल पूछे गए, जिनका वे जवाब नहीं दे पाईं। लेकिन उन्होंने आत्मविश्वास बनाए रखा। उनके मुताबिक यही संतुलन इंटरव्यू में बेहद महत्वपूर्ण है।
AS आराधना चौहान की कहानी, तीन बार हार कर भी नहीं मानी हार
परिवार ने नहीं छोड़ा साथ, MBA का विकल्प भी था तैयार
परिवार में पढ़ाई का माहौल रहा है। आराधना की दो बड़ी बहनों में एक डॉक्टर और दूसरी IITian हैं। उनका छोटा भाई भी UPSC की तैयारी कर रहा है और एक बार परीक्षा दे चुका है।
2021 में इंटरव्यू से बाहर होने के बाद आराधना काफी निराश थीं। तीसरे प्रयास में प्रीलिम्स भी नहीं निकला तो परिवार ने उन्हें कोई दबाव नहीं दिया। उन्हें पुराने जॉब पर लौटने या आगे MBA करने का विकल्प दिया गया। आराधना ने MBA के लिए आवेदन भी किया था।
यानी उनके सामने दूसरा रास्ता मौजूद था, लेकिन उन्होंने UPSC को एक और मौका देने का फैसला किया। यही फैसला उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ बन गया।
आराधना की कहानी: हार के बाद रास्ता नहीं, तरीका बदलना सीखें
उनका सफर यह भी बताता है कि प्रतियोगी परीक्षा में सिर्फ प्रतिभा या पढ़ाई के घंटे मायने नहीं रखते। लंबे संघर्ष में धैर्य, रणनीति, आत्मविश्वास और परिवार का साथ भी उतना ही जरूरी है।
तीन बार नाकाम होने के बाद चौथी कोशिश में AIR-251 हासिल करने वाली आराधना के लिए ‘12वीं फेल’ फिल्म ने जरूर हौसला बढ़ाया, लेकिन उनकी सफलता की असली वजह वह जिद रही, जिसने हर हार के बाद उन्हें फिर किताबों के सामने बैठा दिया।
ये भी पढ़ें:-
RBI में नौकरी, लंच ब्रेक में पढ़ाई, बिना कोचिंग के IAS बनीं सृष्टि डबास
असफलताओं से मिला कामयाबी का सूत्र, फिर आईएएस जसमीत सिंह संधू बन गए टॉपर
माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़ आईएएस बने माधव भारद्वाज, पिता थे LBSNAA में कर्मचारी
कब आएगी लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त? महिलाओं को मिलेंगे 1500 रुपए, जानें जरूरी बातें
By Sourabh Bhatnagar
छत्तीसगढ़ में इलेक्शन हाईजैक! डाकिए की मिलीभगत से बैलेट गायब का आरोप, गड़बड़ी पर रोकी मतगणना
By VINAY VERMA
अजमेर में रिटायर्ड अधिकारी से 26.75 लाख की ठगी, मकान सौदे के नाम पर रकम लेने का आरोप
By Jyoti Mahender Bhardwaj
दादी की जगह पोते को मिल सकती है अनुकंपा नियुक्ति: सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे की याचिका खारिज की, एमपी हाईकोर्ट का फैसला बरकरार
By Arohi Raj
डीम्ड फॉरेस्ट को बेचने पर तुला रीको, जयपुर कलक्टर ने भी कानून के विपरीत पक्ष में खोला म्यूटेशन
By Mukesh Sharma
धीरेंद्र शास्त्री पर बिफर गईं साध्वी हर्षा रिछारिया : बोलीं- संतों को सेवादारों पर भरोसा नहीं तो सुरक्षा कौन देगा?
By Amresh Kushwaha
नवरात्रि से पहले आकाश विजयवर्गीय की गरबा आयोजकों को नसीहत, प्रशासन से की ये अपील
By Manya Jain