तबादलों से सीएमओ की दूरी, नहीं दिया दखल, 30 साल में ऐसा पहली बार

Mukesh Sharma | Jul 10, 2026, 18:10 IST
सीएमओ में बदली हवा
राजस्थान में तबादलों की आज 10 जुलाई आखिरी तारीख है। इस बार तबादलों में सीएमओ का नाममात्र का दखल रहा है। सचिवालय सूत्रों के अनुसार करीब 30 साल में पहली बार सीएमओ से कोई सिफारिशी लिस्ट जारी नहीं हुई है।

ऐसे समझें पूरा मामला



  • तबादलों का आज आखिरी दिन, सूचियों को लेकर हो रही मारा-मारी।
  • तबादला सूचियों से दूर रहा मुख्यमंत्री कार्यालय, कोई दखल नहीं।
  • अखिल अरोड़ा ने तबादला संबंधी काम करने से किया साफ इनकार।
  • पुरानी खींचतान का असर, शिखर और सुधांश विवाद के बाद बदला ढर्रा।
  • शिखर अग्रवाल सीएमओ से बाहर, फिर भी उनका दबदबा कायम।

राजस्थान में तबादला को लेकर मारामारी चल रही है। सभी मंत्रियों, भाजपा विधायक, विधायक प्रत्याशी और सांसदों के पास तबादला चाहने वालों की भीड़ लगी हुई है। अफसरों के दफ्तरों में भी रात-दिन तबादलों की लिस्ट बनाने, नाम जोड़ने व काटने के काम हो रहे हैं।



आश्चर्य की बात यह है कि इन तबादलों में मुख्यमंत्री कार्यालय से तबादलों के लिए न कोई सिफारिश आ रही हैं और न ही नाम भेजे जा रहे हैं। सचिवालय सूत्रों के अनुसार पिछले 30 साल में ऐसा पहली बार देखने में आया है कि अब तक सीएमओ से तबादले के लिए कोई लिस्ट नहीं आई है।



​ना ही सीएमओ से अब तक किसी मंत्री या सचिव या विभागाध्यक्ष को तबादलों की सिफारिशें भेजी हैं। सूत्रों का इससे भी इनकार नहीं है कि सीएमओ में तैनात किसी अफसर ने अपने स्तर पर किसी की सिफारिश की हो। लेकिन, सीएमओ के स्तर पर अब तक कोई लिस्ट नहीं भेजी गई है।



इसलिए हो रहा है ऐसा

सूत्रों के अनुसार राजस्थान में भाजपा सरकार के गठन के बाद एसीएस शिखर अग्रवाल को सीएम सचिव और सुधांश पंत को मुख्य सचिव बनाया गया था।



सरकार की पूरी कमान शिखर अग्रवाल के हाथ में थी। सभी प्रकार के नीतिगत फैसले अग्रवाल के स्तर पर ही हो रहे थे। उनके रहते हुए सीएमओ की ओर से तबादले हों या दूसरे काम, हर काम के लिए निर्देश आते थे। इसी कारण तत्कालीन मुख्य सचिव सुधांश पंत और सीएमओ में मतभेद हो गए थे।



अंतत: सुधांश पंत 10 नवंबर के आदेश से डेपुटेशन पर दिल्ली चले गए थे। उनके स्थान पर मौजूदा मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को दिल्ली से ही भेजा गया था। पंत के दिल्ली तबादले के करीब 11 दिन बाद ही राजस्थान की पूरी ब्यूरोक्रेसी में बदलाव हुआ था।



इस फेरबदल में मुख्यमंत्री के सचिव के तौर पर कार्यरत एसीएस शिखर अग्रवाल को उद्योग विभाग की कमान सौंप दी गई। अग्रवाल के स्थान पर अखिल अरोड़ा को सीएम सचिव बनाया गया।



न सीएम इच्छुक और न ही अरोड़ा

सचिवालय के सूत्रों के अनुसार अखिल अरोड़ा के सीएमओ की कमान संभालने के बाद से ही सीएमओ का तबादलों में कोई दखल नहीं हो रहा है।



यह पहली बार है जब न सीएम भजनलाल शर्मा और न उनके सचिव अखिल अरोड़ा तबादलों में रुचि नहीं ले रहे हैं।



जानकारों का कहना है कि सीएम के सचिव अखिल अरोड़ा ने तबादलों का काम करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। उन्होंने साफ कह दिया है कि वह नीतियां बनाने, सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग सहित दूसरे जरुरी काम करेंगे, लेकिन तबादले संबंधी कोई काम नहीं करेंगे। इसी कारण पूरा सीएमओ तबादलों को लेकर शांत है और औपचारिक काम ही कर रहा है।



अग्रवाल को कम आंकना भूल

सचिवालय सूत्रों का दावा है कि आईएएस शिखर अग्रवाल भले ही सीएमओ में नहीं हैं, लेकिन उन्हें अभी भी किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं समझा जा सकता।



जानकार सूत्रों के अनुसार अग्रवाल की काबिलियत से पूरी नौकरशाही और सभी राजनीतिज्ञ परिचित हैं। इसलिए भले ही वह सीएमओ में नहीं हैं, लेकिन आज भी सरकार के बड़े नीतिगत मामलों में वह पूरा दखल रखते हैं।



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