छात्रसंघ चुनाव की लड़ाई हाई कोर्ट तक पहुंची, कोर्ट ने राजस्थान विश्वविद्यालय को किया तलब
राजस्थान हाई कोर्ट ने राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव नहीं करवाने पर राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से एक अगस्त तक जवाब मांगा है। जस्टिस अनूप ढंड ने यह अंतरिम आदेश राजस्थान विश्वविद्यालय के एमए के छात्र जय राव की याचिका पर दिए।
राव के एडवोकेट शांतनु पारीक ने कोर्ट को बताया कि विश्वविद्यालय के हर छात्र को अपना प्रतिनिधि चुनने का संवैधानिक अधिकार है। अपने प्रतिनिधि के माध्यम से ही विद्यार्थियों की समस्याएं प्रशासन तक पहुंचती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी केरल विश्वविद्यालय के मामले में इसे मूलभूत अधिकार माना है।
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नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान
विश्वविद्यालय ने लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के आधार पर एक कोड ऑफ कंडक्ट बना रखा है। यदि उसकी अवहेलना होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को नहीं मान रहा।
याचिका में कहा गया कि कमेटी की सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिलने के बावजूद राजस्थान विश्वविद्यालय प्रशासन ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए छात्रसंघ चुनाव कराने के लिए अभी तक अधिसूचना जारी नहीं की है। क्या विश्वविद्यालय तय समय में चुनाव करा पाएगा?
FAQ
- 1. राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव क्यों नहीं हो रहे हैं?
राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव नहीं हो रहे हैं क्योंकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का पालन नहीं किया और चुनाव की अधिसूचना अब तक जारी नहीं की है। - 2. हाई कोर्ट ने राजस्थान विश्वविद्यालय को क्या आदेश दिया है?
हाई कोर्ट ने राजस्थान विश्वविद्यालय को एक अगस्त तक जवाब देने का आदेश दिया है, जिसमें छात्रसंघ चुनाव नहीं करवाने पर स्पष्टीकरण मांगने की बात कही गई है। - 3. लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का क्या महत्व है?
लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के तहत हर साल छात्रसंघ चुनाव कराने की आवश्यकता है, ताकि छात्रों को अपने प्रतिनिधि चुनने का मूलभूत अधिकार प्राप्त हो। सुप्रीम कोर्ट ने इन सिफारिशों को मंजूरी दी है।
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