मंत्रीजी को मिला पर्सनल स्टाफ, भारी-भरकम तोप की तलाश, अरावली की आस
राजस्थान के लिए यह सप्ताह सियासी सरगर्मियों और कानून-व्यवस्था के अजब-गजब घटनाक्रमों से तपिश भरा रहा। एक तरफ जयपुर की सड़कों पर दो प्रमुख दल आमने-सामने नजर आए। वहीं, 400 साल पुरानी तोप की तलाश ने राजस्थान और मध्यप्रदेश पुलिस की नींद उड़ा दी।
जंतर-मंतर से जयपुर की सड़कों तक
दिल्ली में छात्र आंदोलन के दौरान राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने की आंच जयपुर तक जा पहुंची। जयपुर में कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ता आमने-सामने दिखे। दोनों दलों ने एक-दूसरे के प्रदेश कार्यालयों के घेराव की कोशिश की।
हालांकि, इस विरोध-प्रदर्शन से ज्यादा नेताओं की तीखी बयानबाजी ने ध्यान खींचा। राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों को भाड़े का टट्टू करार दे दिया। इस बयान के आते ही विपक्ष आक्रामक हो गया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने तुरंत मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा कि मदन राठौड़ ने देश के भविष्य-युवाशक्ति का अपमान किया है। वे भाड़े के टट्टू नहीं, भारत का भविष्य हैं।
डोटासरा ने मदन राठौड़ को पर्ची से बना अध्यक्ष तक कह डाला। इस पर राठौड़ ने जवाब देते हुए कहा कि डोटासरा अपने हाईकमान को धत्ता बताकर अध्यक्ष बने होंगे। उनकी तरह बदजुबान नहीं हो सकते।
विवाद में कूदते हुए भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल ने डोटासरा का एक पुराना वीडियो शेयर किया। उन्होंने लिखा कि REET पेपर लीक के समय इस्तीफा न देने वाले आज किस नैतिकता से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं।
तीन हफ्ते बाद भूपेंद्र यादव को मिला निजी सचिव
प्रशासनिक मोर्चे पर भी इस हफ्ते दो बड़ी खबरें चर्चा के केंद्र में रहीं। एक केंद्र की राजनीति से जुड़ी और दूसरी राज्य कैडर से जुड़ी।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को तीन हफ्ते बाद आईएएस अधिकारी प्रशांत कुमार के रूप में नया निजी सचिव मिल गया है।
दरअसल, जुलाई की शुरुआत में केंद्रीय मंत्री की कोर टीम के चार प्रमुख सहयोगियों को एक साथ हटा दिया गया था। मोदी सरकार के कार्यकाल में किसी केंद्रीय मंत्री की कोर टीम में ऐसा क्लीन स्वीप दुर्लभ माना गया।
इस घटनाक्रम का असर इतना गहरा था कि यादव एक सप्ताह से भी ज्यादा समय तक अपने संसदीय क्षेत्र अलवर से दूर रहे। हाल ही में 12 जुलाई को भिवाड़ी के टपूकड़ा में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में पहली बार नजर आए।
विदेश यात्रा पर आईएएस अंबरीश कुमार एपीओ
राज्य स्तर पर राजस्थान में 2004 बैच के सीनियर आईएएस अधिकारी अंबरीश कुमार को एपीओ कर दिया दिया है। वे बिना सरकारी मंजूरी के विदेश दौरे पर चले गए थे। नियमों के मुताबिक कोई भी सरकारी अधिकारी बिना पूर्वानुमति विदेश यात्रा नहीं कर सकता।
अंबरीश कुमार इससे पहले मई में तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने अफसरों को ईशा फाउंडेशन और लैंडमार्क फोरम जैसे संगठनों के महंगे कोर्स करने के निर्देश दे दिए थे। उनकी जगह अब डॉ. रोहित गुप्ता को खाद्य विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
3.5 टन की तोप का रहस्यमय सफर
इस हफ्ते का सबसे हैरान कर देने वाला मामला मध्य प्रदेश के नरवर किले से तोप चोरी का है। किले से 16वीं शताब्दी की 3.5 टन वजनी दुर्लभ तोप गायब हो गई।
सुरक्षा में तैनात गार्ड नदारद थे। चोरों ने आवाज दबाने और तोप को सुरक्षित रखने के लिए उसे रजाई और गद्दों में लपेटा। बीयरिंग वाली ट्रॉलियों से 3000 फीट ऊंची पहाड़ी से नीचे उतारा और गाड़ियों में लादकर ले गए।
एमपी पुलिस की सूचना पर राजस्थान के करौली जिले में हिण्डौन के गांवड़ा मीणा गांव में छापेमारी की गई। कई जगहों पर जमीन खोदकर तोप खोजी गई। भरतपुर से विशेष मेटल डिटेक्टर के साथ पुरातत्व विभाग की टीम बुलाई गई।
बिना किसी ठोस सबूत के पूरे गांव को चोरों की पनाहगाह के रूप में चित्रित किए जाने से लोग आक्रोशित हो गए। इसके चलते पुलिस को खुदाई का काम फिलहाल रोकना पड़ा है। पुलिस के हाथ अभी तक सिर्फ मिट्टी की ढेरियां ही लगी हैं।
अरावली पर मांगे आम जनता से सुझाव
राजस्थान के पर्यावरण के लिहाज से इस हफ्ते की सबसे महत्वपूर्ण खबर अरावली संरक्षण से जुड़ी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्च-स्तरीय समिति ने अरावली की सटीक परिभाषा तय करने 21 दिन में सुझाव व दस्तावेज मांगे हैं।
पर्यावरण मंत्रालय के एक पैनल ने सुझाव दिया था कि 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली भू-आकृतियों को ही अरावली पहाड़ माना जाए। विशेषज्ञों ने इस मानक का विरोध किया, क्योंकि इससे अरावली का एक बड़ा हिस्सा कानूनी संरक्षण से बाहर हो जाता। वहां अवैध खनन को बढ़ावा मिलता।
विवाद बढ़ता देख सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश पर रोक लगा दी। इस नई विशेषज्ञ समिति का गठन किया। राजस्थान के लिए अरावली महत्वपूर्ण है। इसका बड़ा हिस्सा राजस्थान में ही आता है।
यह समिति 31 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी। इससे यह तय होगा कि आने वाले समय में अरावली में नियंत्रित खनन की अनुमति होगी या सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
अगले हफ्ते फिर मिलते हैं नई चिट्ठी के साथ।
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