नेताओं की बयानबाजी में मर्यादा टूटी, पांचना की लड़ाई सुलह पर आई
Jinesh Jain | Jun 27, 2026, 18:48 IST
राजस्थान की साप्ताहिक चिट्ठी
यह हफ्ता राजस्थान के लिए सत्ता, सियासत और समझौते का रहा। राज्य की सियासत में जहां तीखे तीर चल रहे हैं, वहीं विकास की नई राहें भी खुल रही हैं।
राजस्थान में इस हफ्ते भी सियासत की गरमाहट दिखी। सचिवालय में आम लोगों के लिए सख्ती की खबरें आईं। राहत की खबर यह रही कि पांचना बांध के पानी को लेकर चल रहा आंदोलन खत्म हो गया। इस सप्ताह पचपदरा रिफाइनरी में प्रॉडक्शन शुरू हो गया।
इस हफ्ते राजस्थान की राजनीति में आरोपों के ऐसे तीर चले कि मर्यादा की दीवारें ढहती दिखी। कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बीच सियासी विवाद अब निजी हमलों में बदल रहा है।
किरोड़ी ने डोटासरा के परिवार पर गलत तरीके से ओबीसी सर्टिफिकेट बनाकर आरएएस बनने के आरोप लगाए थे। इसके जवाब में डोटासरा ने कृषि मंत्री पर खाद-बीज छापों में करोड़ों की वसूली के आरोप मढ़ दिए। यहां तक कह दिया कि कभी किरोड़ी केस हटवाने के लिए पूर्व सीएम अशोक गहलोत के पैरों में गिरे थे। इस जंग में मदन दिलावर ने कूदकर डोटासरा को भ्रष्टाचार के दलदल में डूबा बताया।
एक कार्यक्रम में डोटासरा ने माना कि पिछली सरकार में उनसे कुछ बेईमानों को अच्छी जगह बिठाने की गलती हुई। साथ ही उन्होंने भाजपा के मंत्रियों की योग्यता पर तीखा तंज कसा। उनका कहना था कि शिक्षा मंत्री को 'श' लिखना नहीं आता। उच्च शिक्षा मंत्री अपना विभाग भूलकर परिवहन बोल जाते हैं।
यह बयानबाजी आगे भी जारी रहती दिख रही है। किरोड़ी जहां खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ क्रूसेडर के रूप में स्थापित रखना चाहते हैं, वहीं डोटासरा आक्रामक विपक्ष की भूमिका में भाजपा सरकार को घेरने पर काम कर रहे हैं। हालांकि, इस तरह की बयानबाजी से प्रदेश के राजनीतिक विमर्श का स्तर लगातार गिर रहा है।
शासन सचिवालय जयपुर सत्ता का दिल है। वहां अब आम जनता और कर्मचारियों के लिए नियम बेहद कड़े कर दिए गए हैं। कार्मिक विभाग से जारी सर्कुलर ने सचिवालय को लगभग किले में तब्दील कर दिया है।
सचिवालय परिसर को नो-फोटोग्राफी जोन घोषित किया गया है। बिना इजाजत फोटो-वीडियो बनाने पर केस दर्ज होगा। ऑफिस टाइम के पहले और बाद में या छुट्टियों के दिन अस्थायी पास वालों की एंट्री पूरी तरह बैन रहेगी। कर्मचारियों के लिए आईडी कार्ड पहनना अनिवार्य कर दिया गया है।
![rajasthan-secretariate-jaipur]()
यह फैसला ठीक उस वक्त आया है, जब 19 जून से तबादलों पर से रोक हटी है। सचिवालय में नेताओं-कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। सरकार का तर्क सुरक्षा और कार्य संस्कृति को सुधारना हो सकता है, लेकिन लोकतंत्र में जनता के सचिवालय में ऐसी पाबंदियां सवाल खड़े करती हैं।
प्रदेश के आर्थिक और बुनियादी ढांचे के लिए यह हफ्ता उम्मीदें लेकर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई 2026 को राजस्थान को दो बड़ी सौगातें देने जा रहे हैं।
अप्रैल में लगी भीषण आग के झटके से उबरते हुए पचपदरा रिफाइनरी में मरम्मत कार्य पूरा हो गया है। 1 जुलाई से व्यावसायिक पेट्रोल उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद 4 जुलाई को पीएम इसका लोकार्पण करेंगे।
![पचपदरा रिफाइनरी]()
13,037.66 करोड़ के जयपुर मेट्रो फेज-2 प्रोजेक्ट को वित्तीय मंजूरी मिल चुकी है। जमीन पर काम भी शुरू हो गया है। पीएम मोदी इसका भी डिजिटल शिलान्यास करेंगे।
79,459 करोड़ रुपये की पचपदरा रिफाइनरी राजस्थान की पहली एकीकृत रिफाइनरी है। इसका शुरू होना पेट्रोकेमिकल हब बनने के सपने के लिए अच्छा कदम है। वहीं जयपुर मेट्रो का फेज-2 राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक बनाएगा।
इस हफ्ते की सबसे राहत भरी खबर पूर्वी राजस्थान से आई। पांचना बांध के पानी को लेकर दो प्रमुख समुदायों (मीणा और गुर्जर) के बीच चल रहा 20 साल पुराना गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया।
कमांड क्षेत्र (मीणा बाहुल्य) को पानी देने के अदालती आदेश के खिलाफ डूब क्षेत्र (गुर्जर बाहुल्य) के गांवों ने मोर्चा खोल रखा था। बांध में पानी होने के बावजूद वैमनस्यता के कारण 20 साल से पानी रिलीज नहीं हो पा रहा था। आंदोलन में रेल मार्ग तक जाम किए गए।
![पांचना बांध विवाद का अंत]()
इस हफ्ते कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने दोनों पक्षों के साथ अलग-अलग बैठकर समझाइश की और आंदोलन को स्थगित करवा दिया। यह समाधान राजस्थान के सामाजिक ताने-बाने के लिए एक बहुत बड़ी जीत है।
गुर्जर और मीणा समुदायों के बीच का यह विवाद लंबे समय से राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बना हुआ था। इससे क्षेत्र में न केवल सामाजिक समरसता बढ़ेगी, बल्कि किसानों को खेतों के लिए पानी भी मिल सकेगा।
उत्तराखंड के बाद अब राजस्थान भी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार ने इसके ड्राफ्ट के लिए एक उच्च स्तरीय राज्य समिति का गठन कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। इन्होंने उत्तराखंड के यूसीसी मॉडल को तैयार किया था।
यूसीसी लागू होने के बाद शादी, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे निजी मामलों में सभी धर्मों के नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होगा।
राजस्थान सरकार का यह कदम भाजपा के कोर वैचारिक एजेंडे को राज्य स्तर पर लागू करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। राजस्थान की अपनी भौगोलिक, जनजातीय (Tribal) और सांस्कृतिक विविधताएं हैं। समिति के सामने बड़ी चुनौती यह होगी कि वे जनजातीय परंपराओं और स्थानीय रीति-रिवाजों को ठेस पहुंचाए बिना एक सर्वमान्य मॉडल कैसे तैयार करते हैं।
अगले हफ्ते फिर मिलेंगे नई चिट्ठी के साथ।
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कांग्रेस में मरहम की सियासत, संकट में आए बाबा, भाजपा की बत्ती गुल
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कहीं मंत्री का गालीकांड तो कहीं घटिया दवा का खेल, गहरा सबक दे गया यह हफ्ता
सियासत का पारा हाई
किरोड़ी ने डोटासरा के परिवार पर गलत तरीके से ओबीसी सर्टिफिकेट बनाकर आरएएस बनने के आरोप लगाए थे। इसके जवाब में डोटासरा ने कृषि मंत्री पर खाद-बीज छापों में करोड़ों की वसूली के आरोप मढ़ दिए। यहां तक कह दिया कि कभी किरोड़ी केस हटवाने के लिए पूर्व सीएम अशोक गहलोत के पैरों में गिरे थे। इस जंग में मदन दिलावर ने कूदकर डोटासरा को भ्रष्टाचार के दलदल में डूबा बताया।
एक कार्यक्रम में डोटासरा ने माना कि पिछली सरकार में उनसे कुछ बेईमानों को अच्छी जगह बिठाने की गलती हुई। साथ ही उन्होंने भाजपा के मंत्रियों की योग्यता पर तीखा तंज कसा। उनका कहना था कि शिक्षा मंत्री को 'श' लिखना नहीं आता। उच्च शिक्षा मंत्री अपना विभाग भूलकर परिवहन बोल जाते हैं।
यह बयानबाजी आगे भी जारी रहती दिख रही है। किरोड़ी जहां खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ क्रूसेडर के रूप में स्थापित रखना चाहते हैं, वहीं डोटासरा आक्रामक विपक्ष की भूमिका में भाजपा सरकार को घेरने पर काम कर रहे हैं। हालांकि, इस तरह की बयानबाजी से प्रदेश के राजनीतिक विमर्श का स्तर लगातार गिर रहा है।
सचिवालय में सख्ती, नो-कैमरा, नो-एंट्री
सचिवालय परिसर को नो-फोटोग्राफी जोन घोषित किया गया है। बिना इजाजत फोटो-वीडियो बनाने पर केस दर्ज होगा। ऑफिस टाइम के पहले और बाद में या छुट्टियों के दिन अस्थायी पास वालों की एंट्री पूरी तरह बैन रहेगी। कर्मचारियों के लिए आईडी कार्ड पहनना अनिवार्य कर दिया गया है।
rajasthan-secretariate-jaipur
यह फैसला ठीक उस वक्त आया है, जब 19 जून से तबादलों पर से रोक हटी है। सचिवालय में नेताओं-कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। सरकार का तर्क सुरक्षा और कार्य संस्कृति को सुधारना हो सकता है, लेकिन लोकतंत्र में जनता के सचिवालय में ऐसी पाबंदियां सवाल खड़े करती हैं।
विकास की नई रफ्तार
अप्रैल में लगी भीषण आग के झटके से उबरते हुए पचपदरा रिफाइनरी में मरम्मत कार्य पूरा हो गया है। 1 जुलाई से व्यावसायिक पेट्रोल उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद 4 जुलाई को पीएम इसका लोकार्पण करेंगे।
पचपदरा रिफाइनरी
13,037.66 करोड़ के जयपुर मेट्रो फेज-2 प्रोजेक्ट को वित्तीय मंजूरी मिल चुकी है। जमीन पर काम भी शुरू हो गया है। पीएम मोदी इसका भी डिजिटल शिलान्यास करेंगे।
79,459 करोड़ रुपये की पचपदरा रिफाइनरी राजस्थान की पहली एकीकृत रिफाइनरी है। इसका शुरू होना पेट्रोकेमिकल हब बनने के सपने के लिए अच्छा कदम है। वहीं जयपुर मेट्रो का फेज-2 राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक बनाएगा।
पांचना बांध विवाद का अंत
कमांड क्षेत्र (मीणा बाहुल्य) को पानी देने के अदालती आदेश के खिलाफ डूब क्षेत्र (गुर्जर बाहुल्य) के गांवों ने मोर्चा खोल रखा था। बांध में पानी होने के बावजूद वैमनस्यता के कारण 20 साल से पानी रिलीज नहीं हो पा रहा था। आंदोलन में रेल मार्ग तक जाम किए गए।
पांचना बांध विवाद का अंत
इस हफ्ते कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने दोनों पक्षों के साथ अलग-अलग बैठकर समझाइश की और आंदोलन को स्थगित करवा दिया। यह समाधान राजस्थान के सामाजिक ताने-बाने के लिए एक बहुत बड़ी जीत है।
गुर्जर और मीणा समुदायों के बीच का यह विवाद लंबे समय से राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बना हुआ था। इससे क्षेत्र में न केवल सामाजिक समरसता बढ़ेगी, बल्कि किसानों को खेतों के लिए पानी भी मिल सकेगा।
यूसीसी की ओर बढ़ते कदम
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। इन्होंने उत्तराखंड के यूसीसी मॉडल को तैयार किया था।
यूसीसी लागू होने के बाद शादी, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे निजी मामलों में सभी धर्मों के नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होगा।
राजस्थान सरकार का यह कदम भाजपा के कोर वैचारिक एजेंडे को राज्य स्तर पर लागू करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। राजस्थान की अपनी भौगोलिक, जनजातीय (Tribal) और सांस्कृतिक विविधताएं हैं। समिति के सामने बड़ी चुनौती यह होगी कि वे जनजातीय परंपराओं और स्थानीय रीति-रिवाजों को ठेस पहुंचाए बिना एक सर्वमान्य मॉडल कैसे तैयार करते हैं।
अगले हफ्ते फिर मिलेंगे नई चिट्ठी के साथ।
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